राधाकृष्ण दास समग्र परिचय

जन्म- 1865 ई. काशी

निधन- 1907 ई.

पिता का नाम– कल्याणदास तथा

माता का नाम- गंगाबीबी था। ये भारतेंदु हरिश्चन्द्र की बुआ थी। राधाकृष्ण दास वल्लभ संप्रदाय/ पुष्टिमार्ग में दीक्षित थे।

राधा कृष्ण दास की प्रमुख काव्य रचनाएँ-

1. भारत बारहमास- यह राष्ट्रभक्ति से संबंधित कविताओं का संकलन है। इसमें 57 कविताएँ संकलित हैं। इनकी दो  कविताएँ खड़ीबोली और अन्य ब्रजभाषा में है। ‘पथिक’ और ‘स्वदेश प्रेम’ ये दोनों खड़ीबोली में है।

2. देश-दशा- राष्ट्रीयता से संबंधित इस रचना में कुल 78 कविताएँ हैं।

3. जुबिली- यह राजभक्ति से संबंधित कविता है।

4. मेकडानेल पुष्पांजलि– यह राजभक्ति से संबंधित है।

5. विजयिनी विलाप– यह राष्ट्रीयता से संबंधित लंबी कविता है।

6. विनय- यह काव्य संकलन है। इसमें कृष्ण भक्ति से संबंधित 23 कविताएँ हैं।

7. राम-जानकी- यह खंडकाव्य है।

8. प्रताप विसर्जन 9. रहिमन विलास 10. पृथ्वीराज-प्रयाण,

11. छप्पन की विदाई, नए वर्ष की बधाई 12. फुटकर कविता

13. सुनीति    

राधाकृष्ण दास के प्रमुख नाटक-

1. दु:खिनी बाला- यह राधाकृष्णदास की पहली और सर्वश्रेष्ठ रचना थी।

2. महाराणा प्रताप या राजस्थान केशरी

3. धर्मालाप- यह सबसे बड़ा नाटक है।

4. महारानी पद्मावती या मेवाड़ कमलिनी

5. सती प्रताप- भारतेंदु के इस अधूरे नाटक को राधाकृष्ण दास ने पूरा किया।

राधाकृष्ण दास के प्रमुख उपन्यास-

1. निःसहाय हिंदू- यह इनकी मौलिक रचना सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में हिन्दुओं की निस्सहायता और मुसलमानों की धार्मिक कट्टरता का चित्रण है।

राधाकृष्ण दास के प्रमुख लेख-

1. हिंदी क्या है?

2. मुसलमानी दफ्तरों में हिंदी

3. होली है

4. कुछ प्राचीन भाषा कवियों का वर्णन

5. विक्टोरिया शोकप्रकाश

6. पंच

7. स्वर्ग और सैर

8. वर्तमान वाइसराय और गवर्नर-जेनरल राईट अनरेबल लार्ड जार्ज नैथिनियल कर्जन ऑफ कैडेल्स्टन

9. भाषा कविता की भाषा

10. पुरातत्त्व    

राधाकृष्ण दास द्वारा लिखित के प्रमुख जीवन चरित्र–

1. वीरवर बाप्पा रावल

2. श्रीनागरीदास जी का जीवन चरित्र

3. कविवर बिहारीलाल

4. आर्य-चरित्र

5. ईश्वरचंद्र विद्यासागर

6. भारतेंदु बाबू हरिश्चन्द्र का जीवनचरित्र

7. सूरदास

8. हिंदी भाषा के सामयिक पत्रों का इतिहास

राधाकृष्ण दास के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य:

1. इन्होंने भारतेंदु हरिश्चन्द्र का अधूरा नाटक ‘सती प्रताप’ को पूरा किया।

2. इन्होंने पहले ‘दुखिनी बाला’ नामक एक छोटा सा रूपक लिखा था, जो ‘हरिश्चन्द्र चंद्रिका’ और ‘मोहन चंद्रिका’ में   प्रकाशित हुआ था। इसमें जन्मपत्री मिलान, बाल विवाह, अपव्यय आदि कुरीतियों का दुष्परिणाम दिखाया गया है।

3. इनका दूसरा नाटक है ‘महारानी पद्मावती अथवा मेवाड़ कमलिनी’ जिसकी रचना चितौड़ पर अलाउद्दीन घटना को लेकर हुई है।

4. इनका सबसे उत्कृष्ट और बड़ा नाटक ‘महाराणा प्रताप’ या ‘राजस्थान केशरी’ इसका अभिनय कई बार कई जगह किया गया।

5. ये ‘नागरी प्रचारिणी सभा, काशी’ के सभापति व सहायक रहे हैं।

6. प्रयाग प्रेस से 1900 ई. में ‘सरस्वती’ पत्रिका का प्रकाशन राधाकृष्ण दास के प्रयासों का ही प्रतिफल था।

7. ‘हिंदी में सामाजिक पत्रों का इतिहास’ 1900 ई. इनका प्रसिद्ध लेख है, जिसे ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होने  का गौरव प्राप्त है।

8. भारतीय इतिहास की ओर रुचि हो जाने से इसी काल में ‘आर्यचरितामृत’ रूप में बाप्पा रावल की जीवनी लिखा। समाज सुधार पर भी इन्होंने कई लेख लिखे।

9. ‘राधाकृष्ण-ग्रंथावली’ के पहला खंड में इनकी निम्नलिखित रचनाएँ हैं- इसमें 13 कविताएँ, 10 लेख, 8 जीवन-चरित्र और 5 नाटक है।

जय हिंद

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