ऋतु बसंत (कविता)

आया बसंत, आया ऋतुराज,

भू पर लाया खुशियों का सौगात।

बाग-बगीचे हुए खुशहाल,

खेतों में फूले सरसों भरमार।

आम के पेड़ों पर लदे मोजरें,

झूम के गाये प्यारी कोयल।

पीली सरसों हवा में झूमे,

झूम-झूम के गीत सुनाये।  

अलसी खेतों में डोल रही है,

डोल-डोल कुछ बोल रही है।  

रंग-बिरंगी धरा हो रही,

प्रकृति ओस से रोज नहाये।

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