वर्णों की बूंदें (कविता)

अक्षर हैं वर्णों की बूँदें, मन की खुशबू सी महके। सार्थक स्वर, मधुर व्यंजन, मिलकर रच दें भावों का संगम। कभी बने ये गीत सुहाने, कभी सजाएँ सपनों के ठिकाने। शब्दों के साथ खिले अक्षर, भावनाओं के दीप मिलें। ‘अ’ से आती अरुण किरण, ‘क’ से खिलता नद में कमल। ‘म’ से बनता मधुर मिठास,… Continue reading वर्णों की बूंदें (कविता)

मुकुटधर पांडेय (कविता)

छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर,जन्मे कवि महान।छायावाद के जनक बने वे,दिलाया हिंदी को सम्मान॥   ‘प्रेमपथिक’ लिखकर उन्होंने,कविता को दी राह नई।प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी को,दिखलाया उन्होंने चाह सही॥ प्रकृति-प्रेम और संवेदनाएँ,थी जिनकी पहचान।हृदय की गहराइयों से,गाया प्रकृति का गान॥ प्रेम की पगडंडी पर,चला कवि का कोमल मन।छाया में है ढूँढ़ता,सुख, शान्ति और अमन॥… Continue reading मुकुटधर पांडेय (कविता)

रघुवीर सहाय संपूर्ण साहित्यिक जीवन परिचय

कुछ होगा/ कुछ होगा अगर मैं बोलूँगा/ न टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता का/ मेरे अन्दर एक कायर टूटेगा जन्म- 9 दिसंबर 1929 ई. लखनऊ (उ.प्र) निधन- 30 दिसंबर 1990 ई. दिल्ली में हुआ था। पिता- हरदेव सहाय माता- तारादेवी थीं। ये प्रगतिशील काव्यधारा ‘नई कविता’ के प्रतिनिधि कवि थे। कवि के रूप में इन्हें… Continue reading रघुवीर सहाय संपूर्ण साहित्यिक जीवन परिचय

रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

1. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के रचनकार का नाम हैं ? A. हरिशंकर परसाई    B. रामवृक्ष बेनीपुरी C. रामविलास शर्मा    D. सरदार पूर्ण सिंह 2. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के प्रथम संस्करण में कुल कितने शब्द-चित्र हैं? A. ग्यारह   B. बारह   C. तेरह D. चौदह 3. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र… Continue reading रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

वर्ण और वर्णमाला से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

1. भाषा की सबसे लघुतम सार्थक इकाई क्या कहलाती है?     A. वर्ण  B. वाक्य  C. शब्द  D. अक्षर 2. ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समुदाय को क्या कहते है? A. अक्षर   B. वाक्य   C. अर्थ   D. शब्द 3. एक ध्वनि या एकाधिक ध्वनियों की इकाई को, जिसका उच्चारण एक झटके में होता है,… Continue reading वर्ण और वर्णमाला से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

चिंतन

अब बस भी कर ऐ जिंदगी, थोड़ी सुस्ता लेने दे।      अगला दर्द भी सह लेंगे, पिछला तो भुला लेने दे॥ 2. हर कदम हमने, जीने के लिए समझौता किया।      शौक तो ख़ुशी से जीने का था, लेकिन घुट-घुट जिया॥ 3. हम दिल के बुरे नहीं है, हमारी भी कुछ कहानी है।      बदली… Continue reading चिंतन

आचार्य महावीर प्रसाद द्वेवेदी जीवन परिचय

जन्म- सन् 1864 ई. में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के दौलतपुर गाँव में हुआ था। पिता- पंडित रामसहाय द्विवेदी थे। कहा जाता है कि उन्हें ‘महावीर का इष्ट’ था, इसलिए पिता ने अपने पुत्र का नाम ‘महावीर’ रखा। माता- ज्योतिष्मती थी। निधन- 21 दिसम्बर  1938 ई. को रायबरेली में हुआ। * महावीर प्रसाद द्विवेदी जी… Continue reading आचार्य महावीर प्रसाद द्वेवेदी जीवन परिचय

पंडित रामनरेश त्रिपाठी संपूर्ण परिचय

ये पूर्वछायावादी युग के हिंदी कवि, उपन्यासकार और संपादक थे। रामनरेश त्रिपाठी ने 'मिलन', 'पथिक' और 'स्वप्न' जैसी राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत रचनाएँ लिखी। इन्होंने ग्राम गीतों के संकलन ‘कविता कौमुदी’ का संपादन किया और बाल साहित्य के विकास में भी अपना योगदान दिया। ये हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रयाग के प्रचार मंत्री भी रहे थे।… Continue reading पंडित रामनरेश त्रिपाठी संपूर्ण परिचय

‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

1. “वे पूरबीपन की परवाह न करके अपने बैसवारे की ग्राम्य    कहावतें और शब्द भी बेधड़क रख दिया करते थे।”    शुक्ल जी की इन पंक्तियों का संबंध किससे है?     (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013) 2. “घूरे क लत्ता बीनै, कनातन क डौल बाँधे’ जैसा शीर्षक किस लेखक ने दिया है?    (प्रतापनारायण… Continue reading ‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

तन्हाई (कविता)

लगता है अब रातें भी मुझसे रूठने लगी हैं, हर यादें मेरे सीने में ज्वाला सी धधकने लगी हैं। अब तो चाँद भी मेरे छत से कहीं दूर चला जाता है, मेरी दर्द को देख कर, वह भी मुझ से कतराता है। मेरे भींगे हुए नैनों से डर कर, नींदें भी चली गई हैं, बीती… Continue reading तन्हाई (कविता)