अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान

जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्या’, ‘किसी’ और ‘किसको’ प्रश्नों के उत्तर मिले या यह प्रश्न बनता है, तब वहाँ क्रिया सकर्मक होती है। जैसे- 1. राम पुस्तक पढ़ता है। 2. राधा पत्र लिखती है 3. रामू जूते बना रहा है। 4. एक महिला आलू खरीद रही है। 4. राधा टीवी देख रही है।… Continue reading अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान

पोखरा ठकुराइन का (कविता)

एक दिन पोती ने दादी से पूछा-“दादी, ये बताओ न,सब कुछ ठकुराइन का ही क्यों है?” दादी मुस्कुराईं,झुर्रियों में छिपी कहानियों का पन्ना खोला-“क्यों बेटी, क्या पूछा तूने?” पोती बोली- पोखरा ठकुराइन का,कुआँ ठकुराइन का,तो फिर पानी किसका दादी?जिससे सबकी प्यास बुझे,उसपर भी उनका ही अधिकार है क्या? फुलवारी ठकुराइन की,आम-इमली ठकुराइन की,तो फिर फूलों… Continue reading पोखरा ठकुराइन का (कविता)

अंजान परी एलिशा

मलेशिया का लंकावी समुद्र तट, सांझ की सुनहरी धूप लहरों पर नाच रही थी। हम दोनों कुछ देर सागर में तैरने के बाद तट के किनारे चादर बिछाकर बैठे हुए थे। हवा में सनसनाहट थी और समुद्र के किनारे पेड़ों की सरसराहट मिलकर एक अद्भुत संगीत सुना रही थी। समुद्र की लहरें जैसे अपने ही… Continue reading अंजान परी एलिशा

पुकार गौरैया की (कविता)

प्रकृति की गोद में रहती,नन्ही-सी प्यारी गौरइया।सबेरे गीत सुनाती सबको,जगाती अपने नौनिहालों को। था पेड़ों पर उसका घरौंदा,फूलों से महका था आँगन।मानव ने जब कटवाए पेड़,लूट गया उसका मधुर जीवन। रोकर फिर, बोली गौरइया —“अब घर मैं कहाँ बनाऊँगी?कहाँ मिलेगा ठिकाना मुझको,अपने बच्चे कैसे पालूँगी?” बच्चों ने दी उसको हिम्मत —“मत रो, हम लाएँगे हरियाली।हम… Continue reading पुकार गौरैया की (कविता)

बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)

बचपन से ही नरेंद्र मेधावी थे। वे जो कुछ भी कहते, उनके साथी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे। एक दिन कक्षा में वे कुछ मित्रों को कहानी सूना रहे थे। उनके सभी साथी सुनने में मुग्ध थे। उन्हें पता ही नहीं चला कि शिक्षक कक्षा में आ गए और पढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी… Continue reading बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)

कौवा और कछुआ (बाल कथा)

एक समय की बात है। एक गाँव में एक बरगद के पेड़ पर एक चतुर कौवा रहता था। पेड़ के पास ही एक तालाब में एक कछुआ भी रहता था। कछुआ बहुत ही आलसी था। कुछ दिनों के बाद कछुआ भी पेड़ के कोटर में आकर रहने लगा। कौवा रोज मेहनत करके अपने लिए खाना… Continue reading कौवा और कछुआ (बाल कथा)

‘नदी के द्वीप’-‘अज्ञेय’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य

*यह कविता अज्ञेय द्वारा 11 दिसंबर, 1949 ई. को इलाहबाद में लिखी गयी। *यह 1965 ई. में आये उनके काव्य संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ में संकलित है। यह ‘प्रतीकात्मक’ कविता है। *‘नदी’ परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है और ‘द्वीप’ व्यक्तित्व का प्रतीक है। *विशिष्ट व्यक्तित्व होना दुर्भाग्य नहीं सौभाग्य की बात है।… Continue reading ‘नदी के द्वीप’-‘अज्ञेय’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य

मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)

एक छोटी सी मछली नदी में रहती थी। उसके मन में डर लगा रहता था कि कहीं उसे कोई बड़ी मछली खा न जाए। नदी एक दिन मछली से पूछी, तुम इतना डरती क्यों हो? मछली बोली मैं बहुत छोटी हूँ, इसलिए मैं बहुत डरती हूँ। नदी मछली से बोली, तुम डरो नहीं तेज तैरना… Continue reading मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (संघ प्रार्थना)

“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” अर्थ- हे! सदा सुख-स्नेह और प्यार करने वाली मातृभूमि, मैं तुझे सदैव नमस्कार करता हूँ। तूने हमें सुख से लालन-पालन किया है। “महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थेपतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥” अर्थ- हे पुण्यभूमि! हे मंगलमयी मातृभूमि! तेरी सुरक्षा और सेवाकार्य में मेरा यह शरीर समर्पित हो। मैं तुझे बारंबार… Continue reading राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (संघ प्रार्थना)