अविकारी शब्द ‘अव्यय’

अविकारी शब्द या अव्यय: ऐसे शब्द जिनके स्वरुप में लिंग, वचन, काल, पुरुष एवं कारक आदि के प्रभाव से कोई विकार नहीं होता अथार्त परिवर्तन नहीं होता है। वे अविकारी शब्द कहलाते हैं। अविकारी को ही ‘अव्यय’ कहते हैं। ‘अव्यय’ दो शब्दों के मिलने से बना है- अ + व्यय = अव्यय। ‘अ’ का अर्थ… Continue reading अविकारी शब्द ‘अव्यय’

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद:

क्रिया की परिभाषा-  जिस शब्द से किसी कार्य का करने या होने का बोध होता है, उसे ‘क्रिया’ कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका  रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ… Continue reading कर्म के आधार पर क्रिया के भेद:

शब्द-भेद (Parts Of Speech)

विकार की दृष्टि से शब्दों के दो भेद होते हैं– (1) विकारी शब्द और (2) अविकारी शब्द (1) विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- 1. संज्ञा, 2. सर्वनाम, 3. विशेषण और 4. क्रिया। (2) अविकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- 1. क्रिया विशेषण, 2. सम्बन्ध बोधक, 3. समुच्चय बोधक और 4. विस्मयादि बोधक… Continue reading शब्द-भेद (Parts Of Speech)

वाच्य (Voice)

‘वाच्य’ का शब्दिक अर्थ है- ‘बोलने का विषय’। क्रिया से जिस रूपांतरण से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किये गए विधान (कही गई बात) का विषय कर्ता है, कर्म है या भाव है उसे ‘वाच्य’ कहते हैं। हिंदी में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं- 1. कर्तृवाच्य (Active Voice) 2. कर्मवाच्य (Passive Voice) 3.… Continue reading वाच्य (Voice)

वृत्ति/क्रियार्थ (Mood)

सहायक क्रिया के वे अंश जिनसे उस क्रिया व्यापार के प्रति वक्ता की मानसिक अभिवृत्ति या ‘मूड’ (Mood) का पता चले वे ‘वृत्ति’ कहलाते हैं। वृत्ति का ‘क्रिया (प्रयोजन) /क्रियार्थ’ भी कहते हैं। क्रिया के जिस रूप से वक्ता अथवा लेखक के मन की स्थिति का ज्ञान होता है,, उसे ‘वृत्ति’ कहते हैं। जैसे- आज्ञा,… Continue reading वृत्ति/क्रियार्थ (Mood)

पक्ष (Aspect)

सहायक क्रिया के वे अंश जो क्रिया की अपूर्णता, पूर्णता किसी वस्तु या व्यक्ति की अवस्था या स्थिति आदि की सूचना देते हैं वे ‘पक्ष’ (Aspect)सूचक अंश (चिह्न) कहे जाते हैं। प्रत्येक कार्य किसी कालावधि के बीच होता है जो प्रारंभ से अंत तक फैला रहता है। इस फैली हुई कालावधि  में कार्य व्यापार को… Continue reading पक्ष (Aspect)

काल (Tense)

सहायक क्रिया क्रियापद पदबंध में ‘मुख्य क्रिया’ (सरल, संयुक्त, नामिक, मिश्र व्युत्पन्न आदि) को छोड़कर जो भी अंश शेष रह जाता है वह ‘सहायक क्रिया’ (Auxiliary verv) का होता है। जहाँ मुख्य क्रिया ‘क्रिया पदबंध’ को मुख्य अर्थ या कोशगत अर्थ देती है वहाँ सहायक क्रिया से व्याकरणिक अर्थ को सूचना मिलती है। काल, पक्ष,… Continue reading काल (Tense)

नीरव वेदना की दीपशिखा: महादेवी

नीरव नभ की श्यामल छाया मेंकिसने यह करुणा-दीप जलाया?किस वीणा के मूक स्वरों नेअश्रु-संगीत जगत में गाया? वह तुम ही थीं-वेदना की वेणु पर जीवन का राग सुनाती,निशा की नीरव गोद में बैठपीड़ा की ज्योति जगाती। तुम्हारी पंक्तियों मेंदुख की मंदाकिनी बहती है,हर अक्षर में मानोआत्मा की अनुगूँज रहती है। नील गगन की उदास चाँदनी-सीतुम्हारी… Continue reading नीरव वेदना की दीपशिखा: महादेवी

ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार

हम जीवन की आपाधापी में जब उलझे हुए रहते हैं, तब अक्सर उन चमत्कारों को भूल जाते हैं जो हर क्षण हमारे साथ घटित हो रहे होते हैं। हम बड़ी-बड़ी उपलब्धियों के लिए तो ईश्वर को याद करते हैं, पर उन सहज, निरंतर और नि:शब्द उपहारों पर ध्यान नहीं देते जिनके सहारे हमारा जीवन चल… Continue reading ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार

कलम है जीवन की नैया (कविता)

कलम है जीवन की नैया,शब्द बने इसके पतवार,सोच के सागर पार कराती,दिखलाती सत्य का संसार। अज्ञान की काली घटाओं में,यह दीपक बन जलती है,झूठ, भ्रम और अंधकार को,क्षण भर में ही छलती है। जहाँ मौन बोझिल हो जाए,वहाँ कलम स्वर पाती है,दबी हुई हर पीड़ा को,काग़ज़ पर उतार लाती है। सत्ता से प्रश्न पूछे जो,वह… Continue reading कलम है जीवन की नैया (कविता)