कलम है जीवन की नैया (कविता)

कलम है जीवन की नैया,शब्द बने इसके पतवार,सोच के सागर पार कराती,दिखलाती सत्य का संसार। अज्ञान की काली घटाओं में,यह दीपक बन जलती है,झूठ, भ्रम और अंधकार को,क्षण भर में ही छलती है। जहाँ मौन बोझिल हो जाए,वहाँ कलम स्वर पाती है,दबी हुई हर पीड़ा को,काग़ज़ पर उतार लाती है। सत्ता से प्रश्न पूछे जो,वह… Continue reading कलम है जीवन की नैया (कविता)

“करुणा की दीपशिखा : महादेवी”

वेदना की वीणा परसजाया जिसने संगीत जीवन का शब्दों में आँसू पिरोकरमानवता का दीप जलाया। वह स्वर थी नीरव पीड़ा का,वह करुणा की गहरी धारा थी,हिंदी के नभ में चाँद बनीवह काव्य-गगन की तारा थी। मृदुल भाव की मंद बयार,संवेदना का अमर उजाला,हर पंक्ति में झरता दिखताहृदय का निर्मल नीर निराला। नारी के मौन संतापों… Continue reading “करुणा की दीपशिखा : महादेवी”

क्यों जिंदगी इम्तिहान लेती है?

पता नहीं क्यों? जिंदगी इतना, इम्तिहान क्यों लेती है? खुशियों को राहें छीन, गम ही गम देती है जो ढूँढ़ता है चैन, उसे वह भटकाती है दिल के उजाले को, वह अक्सर धूँधला बनाती हैं कभी आशाओं की दीप जलाती है तो कभी वह आँसुओं से बुझाती है हँसी के पल दिखाकर वह न जाने… Continue reading क्यों जिंदगी इम्तिहान लेती है?

“नीर भरी संध्या की वेणु”

नीलिमा के नीरव आँगन मेंकिसने यह दीप जलाया है?किसके करुण कपोलों सेअश्रु-मोती झर आया है? शायद किसी विरही बादल नेमन की पीड़ा गाई होगी,या चाँदनी की मौन लहर नेअंतर की वीणा छेड़ी होगी। वन की पथराई छाया मेंजब पवन सिसकियाँ भरता है,तब लगता है कोई प्राची सेमूक व्यथा का पत्र धरता है। ओ अज्ञात पथिक!तुम्हारे… Continue reading “नीर भरी संध्या की वेणु”

स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा

स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें… Continue reading स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा

“शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”

स्वामी विवेकानंद बचपन से ही अत्यंत निडर, साहसी और तर्कशील स्वभाव के थे। उनका बाल्यकाल का नाम नरेंद्रनाथ था। वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करते थे, बल्कि हर बात को तर्क और अनुभव की कसौटी पर परखते थे। एक बार की बात है, नरेंद्र अपने मित्रों के साथ एक पेड़ पर… Continue reading “शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”

“एकाग्रता की शक्ति” : स्वामी विवेकानंद

पत्थर भी ध्यान नहीं तोड़ सके स्वामी विवेकानंद को ध्यान और साधना से विशेष लगाव था। वे प्रायः एकांत स्थानों में बैठकर ध्यान किया करते थे। एक बार की बात है, वे नदी के किनारे शांत वातावरण में ध्यानमग्न होकर बैठे थे। उसी समय कुछ शरारती युवक वहाँ से गुज़रे। उन्होंने स्वामी जी को ध्यान… Continue reading “एकाग्रता की शक्ति” : स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद की बुद्धिमत्ता और मर्यादा

“सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य के चरित्र, विचार और जीवन को महान बनाती है।” एक बार स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा पर थे। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व, प्रभावशाली वाणी और उच्च विचारों से अनेक लोग प्रभावित होते थे। एक दिन एक विदेशी महिला उनसे अत्यंत प्रभावित होकर उनके पास आई और बोली— “मैं आपसे विवाह करना… Continue reading स्वामी विवेकानंद की बुद्धिमत्ता और मर्यादा

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

स्वामी विवेकानंद : उत्तम सीख का महत्व

एक बार की बात है। स्वामी विवेकानंद खेतरी (राजस्थान) गए हुए थे। वहाँ के राजा ने उनके सम्मान में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में मैनाबाई नामक एक प्रसिद्ध नृत्यांगना ने नृत्य प्रस्तुत किया। जब नृत्य आरंभ हुआ, तो स्वामी विवेकानंद उस वातावरण को अपने संन्यासी आदर्शों के अनुकूल नहीं समझ पाए… Continue reading स्वामी विवेकानंद : उत्तम सीख का महत्व