1. ओज आवाज बुलंद थे हौसले सुषमा जी के। 2. मंगल दिन मृदुभाषी प्रवक्ता मौन हो गई। 3. प्रखर बुद्धि थी वाकपटुता वो नेता सुषमा। 4. सुषमा जी थी शब्दों की जादूगर श्रेष्ट थी वक्ता। 5. चारों दिशाएं दे रहे श्रद्धांजलि सुषमा जी को ।… Continue reading सुषमा जी को श्रद्धांजलि (हाइकु)
सुंदर विचार
जेल डायरी (तिहाड़ से काबुल कंधार तक) लेखक – शेर सिंह राणा
पुस्तक समीक्षा जेल डायरी (तिहाड़ से काबुल कंधार तक) लेखक - शेर सिंह राणा प्रकाशक- हार्पर कॉलिस पृष्ठ- 308 मूल्य 199 शेर सिंह राणा रुड़की के राजपूत जमींदार परिवार में जन्मा, बड़े प्यार से लालन-पालन और बहुत ही अच्छे स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के बाद देहरादून के एक कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त किया। बचपन… Continue reading जेल डायरी (तिहाड़ से काबुल कंधार तक) लेखक – शेर सिंह राणा
अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों? (लघु कथा)
सत्य और अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों होता है? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहाँ था? अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों होता है? यह सवाल कई लोगों के मन में आता होगा। मैंने तो किसी का बुरा नहीं किया है? फिर भी मेरे साथ ही… Continue reading अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों? (लघु कथा)
‘निशात बाग’ का सेव (लघु कथा)
वह हमारी जिंदगी का एक यादगार लम्हा था। कश्मीर के “निशात बाग का सेव”। ये कहानी सन् 1982 ई० की है। उस समय आज की तरह कश्मीर का माहौल खराब नहीं था। सब कुछ बहुत अच्छा था। हम सब बेखौफ हर जगह आ जा सकते थे। सच में हमने “धरती के स्वर्ग” कहा जाने वाले… Continue reading ‘निशात बाग’ का सेव (लघु कथा)
चंद्रयान-दो
तीन सखा मिल बने चंद्रयान-दो चले धरा से अंतरिक्ष में, अटल प्रतिज्ञा के साथ दक्षिणी ध्रुव पर, मामा से मिलने। यह खबर सुन खुश होके, मामा लगा इतराने दोनों मिल करेंगे चमत्कार अब भू को समृद्ध बनाएंगे।
नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)
भारत के महाकाव्य ‘महाभारत’ से जुड़ा हुआ यह कहानी है। युधिष्टिर जुए में अपना सब कुछ हार कर अपने भाइयों के साथ वनवास जा रहे थे। उसी वन में एक ऋषि ने उन्हें ‘नल’ और ‘दमयंती’ की कथा सुनाई थी। ‘नल’ निषध देश के राजा वीरसेन के पुत्र थे। नल बड़े ही वीर, साहसी, गुणवान… Continue reading नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)
पुरबी के जनक ‘महेद्र मिश्र’
भोजपुरी भाषा के लोकगायकी में जब भी किसी शख्सियत की बात होती है तो लोग बड़े ही गर्व से भिखारी ठाकुर का नाम लेते हैं, जबकि भोजपुरी के भारतेंदु कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र दोनों ही समकालीन थे। महेंद्र मिश्र बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोक गीतकरों में सर्वोपरि थे। वे लोकगीत… Continue reading पुरबी के जनक ‘महेद्र मिश्र’
उषा और अनिरुद्ध (अनोखी प्रेम कथा)
‘उषा’ बाणासुर की पुत्री थी और ‘अनिरुद्ध’ श्री कृष्ण भगवान के पौत्र। बाणासुर की पुत्री उषा परम सुंदरी थी। अनिरुद्ध भी कामदेव से सामान सुन्दर थे। उषा ने अनिरुद्ध के सुन्दरता और बल की चर्चा सुनी थी, लेकिन देखा नहीं था। एक दिन उषा गहरी नींद में सो रही थी। सपने में एक सुन्दर राजकुमार… Continue reading उषा और अनिरुद्ध (अनोखी प्रेम कथा)
रीतिकालीन कवि: घनानंद
रीतिकाल में प्रमुख तीन काव्य धाराएँ थी- रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त। कवि घनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के अग्रणी कवि थे। कवि के व्यक्तित्व और कृतित्व की रचना उनके कवित्व ने स्वयं ही की है- “लोग हैं लागि कवित्त बनावत, मोहे तौ मेरे कवित्त बनावत” अनुमान से इनका जन्म का समय संवत् 1730 के आसपास माना जाता… Continue reading रीतिकालीन कवि: घनानंद
मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)
मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। जिस पग में बाँधा जाता हूँ उस पग की शोभा बढ़ाता हूँ । जिस पग में बाँधा जाता हूँ नाम वही पा जाता हूँ, मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। मंदिरों में बजाया जाता हूँ, महफिलों में बजाया जाता हूँ। कभी औरों… Continue reading मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)