रावण अपने पूर्वजन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे। एक श्राप के चलते उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार- सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ‘सनकादिक’ ऋषि कहलाते थे और देवताओं के पूर्वज माने जाते थे। एक बार ये चारों ऋषि सम्पूर्ण लोकों से दूर… Continue reading श्रापित रावण
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नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)
भारत के महाकाव्य ‘महाभारत’ से जुड़ा हुआ यह कहानी है। युधिष्टिर जुए में अपना सब कुछ हार कर अपने भाइयों के साथ वनवास जा रहे थे। उसी वन में एक ऋषि ने उन्हें ‘नल’ और ‘दमयंती’ की कथा सुनाई थी। ‘नल’ निषध देश के राजा वीरसेन के पुत्र थे। नल बड़े ही वीर, साहसी, गुणवान… Continue reading नल और दमयंती (पौराणिक प्रेम कथा)
