मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)

मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। जिस पग में बाँधा जाता हूँ उस पग की शोभा बढ़ाता हूँ । जिस पग में बाँधा जाता हूँ नाम वही पा जाता हूँ, मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। मंदिरों में बजाया जाता हूँ,   महफिलों में बजाया जाता हूँ। कभी औरों… Continue reading मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)

हम हंसना भूल गए (कविता)

अपने आप में इतना उलझ गए हैं, कि   हम हंसना भूल गए हैं। दूसरों को सुखी देखकर, अपने सुख को भूल गए हैं। इसलिए हम हंसना भूल गए हैं। दूसरे की बुराई देखने में, अपनी बुराई भूल गए हैं । इसलिए हम हँसना भूल गए हैं । मोबाईल में समय गवांकर, अपनों से दूर हो… Continue reading हम हंसना भूल गए (कविता)

हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

सरस भाषा हिन्दी है, सरल भाषा हिन्दी है सरस, सरल  और रुचिर  भाषा  हिन्दी है। मृदुल भाषा हिन्दी है, मधुर भाषा हिन्दी है मृदुल, मधुर  और  कोमल भाषा हिन्दी है। कर्म भाषा हिन्दी है, धर्म भाषा हिन्दी है कर्म, धर्म और  काव्य  भाषा  हिन्दी है। संस्कार भाषा हिन्दी है, संस्कृति भाषा हिन्दी है संस्कार, संस्कृति… Continue reading हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

हाइकु (1 से 100)

1.    हे! माँ शारदे काव्य कला के ज्ञान का विवेक दे। 2.    हे! वागेश्वरी भर शब्दों में शक्ति लेखनी पर। 3.    हे! वीणा पाणी सितार में झंकार  सुरीली लय। 4.    हंसवाहिनी सुर में यति गति झंकार भर। 5.    हे! स्वर दात्री     तानसेन वैजू को लौटा दे धरा। 6.    वर्तमान के मकड़जाल में उलझे हम। 7.   … Continue reading हाइकु (1 से 100)

वर्दी (कविता)

वर्दी के है अनेक प्रकार, वर्दी की है अपनी शान। अनेक रंगों की है ये वर्दी । जो पहने उसकी बढ़ती मान। कुछ वर्दी पहन इतराते हैं   कुछ वर्दी पहन लोगों को डराते हैं। कुछ लोग वर्दी की रखते लाज, कुछ लोग वर्दी की लाज गंवाते हैं। कुछ लोग वर्दी को इजज्त दिलवाते हैं… Continue reading वर्दी (कविता)

चिरैया (कविता)

दिल में अरमां आँखों में सपने, बिटिया रानी कुछ सोच रही थी। मैं पूछी, क्या सोच रही हो? फिर वो मुझसे लिपट कर बोली, माँ! क्या मैं उड़ सकती हूँ? चिड़िया जैसी? माँ बोली, हाँ क्यों नहीं? बिटिया रानी कुछ सोच कर बोली, कैसे माँ? माँ बोली! तुम अपने सपनों से प्यार करो। सपनों को… Continue reading चिरैया (कविता)

परछाईं (कविता)

जबसे हमने होश सम्भाला, तब से मैं उसे देख रही हूँ कभी देखकर दुखी हो जाती, कभी देख खुश हो जाती हूँ पता नही वो कौन है? जो साथ-साथ रहती है मेरे कभी तो उससे डर जाती हूँ, कभी सोंच में पड़ जाती हूँ हिम्मत करके पूछ ही बैठी, बताओं कौन हो तुम ? क्या… Continue reading परछाईं (कविता)

पुलवामा के शहीद

14 फरवरी का दिन देश में एक कलंक के रूप में याद किया जायेगा। 1947 में देश के बटवारे के बाद कबाईलियो ने कश्मीर को कुचलने के लिए कश्मीर पर हमला कर दिया था। चारों तरफ से मुसीबत से घीरे कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने भारत सरकार से आत्म रक्षा की गुहार लगाई और… Continue reading पुलवामा के शहीद

‘हाइकु’

‘हाइकु’ मूल रूप से जापानी कविता की एक विधा है। इसका प्रचलन 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था। हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा और जापानी लोगों के सौंदर्य चेतना में हुआ था। हाइकु में अनेक विचार धाराएँ मिलती है जैसे- बौद्ध-धर्म, चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति आदि। यह भी कहा जा सकता है कि हाइकु में इन सभी विचार धाराओं की झाँकी मिल जाती है या हाइकु इन सबका दर्पण है।