‘हिन्दी’ का जख्म’ (कविता)

मैं ‘हिन्द’ की ‘हिन्दी रानी’ अपनों से ही जख्मी हूँ । मैं क्या कहूँ ऐ हिन्द वासियों समझो मेरी जख्मों को मैं हिन्दी हूँ अपनों से ही जख्मी हूँ । भूल गए मुझे अपने लोग अंग्रेजी को ही समझते अपनी शान । मुझसे होकर दूर अंग्रेजी की बढ़ाते हैं मान वाह रे कुदरत! तेरी कैसी… Continue reading ‘हिन्दी’ का जख्म’ (कविता)

हम हंसना भूल गए हैं (कविता)

अपने आप में इतना उलझ गए हैं कि  हम हंसना भूल गए हैं। दूसरों की खुशी देखकर, हम अपने सुख को भूल गए हैं। इसलिए.... दुसरों की बुराई देखने में, हम अपनी बुराई भल गए हैं। इसलिए.... मोबाईल में समय गवांकर, हम अपनों से दूर ही गए हैं। इसलिए.... सुख कि खोज में गाँवों को… Continue reading हम हंसना भूल गए हैं (कविता)

चंद्रयान-दो (हाइकु)

1. बड़ी शान से   चला चंद्रयान-दो  दक्षिण ध्रुव।    2. चला भूमि से        चंद्रयान-दो चाँद        से मिलने को।    3. दक्षिणी ध्रुव        करेगा चमत्कार        चंद्रयान-दो।    4. पहियेदार        ‘रोवर’ चाँद पर        करेगा खोज।    5. वैज्ञानिकों ने        फहराया तिरंगा        अन्तरिक्ष में ।   6. चाँद सितारे         करें… Continue reading चंद्रयान-दो (हाइकु)

सुषमा जी को श्रद्धांजलि (हाइकु)

1. ओज आवाज     बुलंद थे हौसले     सुषमा जी के। 2. मंगल दिन     मृदुभाषी प्रवक्ता     मौन हो गई। 3. प्रखर बुद्धि      थी वाकपटुता वो     नेता सुषमा। 4. सुषमा जी थी     शब्दों की जादूगर     श्रेष्ट थी वक्ता। 5. चारों दिशाएं     दे रहे श्रद्धांजलि     सुषमा जी को ।… Continue reading सुषमा जी को श्रद्धांजलि (हाइकु)

चंद्रयान-दो

तीन सखा मिल बने चंद्रयान-दो चले धरा से अंतरिक्ष में, अटल प्रतिज्ञा के साथ दक्षिणी ध्रुव पर, मामा से मिलने। यह खबर सुन खुश होके, मामा लगा इतराने दोनों मिल करेंगे चमत्कार अब भू को समृद्ध बनाएंगे।

मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)

मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। जिस पग में बाँधा जाता हूँ उस पग की शोभा बढ़ाता हूँ । जिस पग में बाँधा जाता हूँ नाम वही पा जाता हूँ, मैं घूंघरू हूँ ! मेरा जिंदगी भी अजीब है। मंदिरों में बजाया जाता हूँ,   महफिलों में बजाया जाता हूँ। कभी औरों… Continue reading मैं घूंघरू हूँ ! (कविता)

हम हंसना भूल गए (कविता)

अपने आप में इतना उलझ गए हैं, कि   हम हंसना भूल गए हैं। दूसरों को सुखी देखकर, अपने सुख को भूल गए हैं। इसलिए हम हंसना भूल गए हैं। दूसरे की बुराई देखने में, अपनी बुराई भूल गए हैं । इसलिए हम हँसना भूल गए हैं । मोबाईल में समय गवांकर, अपनों से दूर हो… Continue reading हम हंसना भूल गए (कविता)

हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

सरस भाषा हिन्दी है, सरल भाषा हिन्दी है सरस, सरल  और रुचिर  भाषा  हिन्दी है। मृदुल भाषा हिन्दी है, मधुर भाषा हिन्दी है मृदुल, मधुर  और  कोमल भाषा हिन्दी है। कर्म भाषा हिन्दी है, धर्म भाषा हिन्दी है कर्म, धर्म और  काव्य  भाषा  हिन्दी है। संस्कार भाषा हिन्दी है, संस्कृति भाषा हिन्दी है संस्कार, संस्कृति… Continue reading हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

हाइकु (1 से 100)

1.    हे! माँ शारदे काव्य कला के ज्ञान का विवेक दे। 2.    हे! वागेश्वरी भर शब्दों में शक्ति लेखनी पर। 3.    हे! वीणा पाणी सितार में झंकार  सुरीली लय। 4.    हंसवाहिनी सुर में यति गति झंकार भर। 5.    हे! स्वर दात्री     तानसेन वैजू को लौटा दे धरा। 6.    वर्तमान के मकड़जाल में उलझे हम। 7.   … Continue reading हाइकु (1 से 100)