हरिशंकर परसाई: इंस्पेक्टर मातदीन चाँद परव्यंग्य: कहानी

वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब) कहते हैं- वैज्ञानिक झूठ बोलते हैं, वहाँ हमारे जैसे ही मनुष्य की आबादी है। विज्ञान ने हमेशा इंस्पेक्टर मातादीन से मात खाई है। फ़िंगर प्रिंट विशेषज्ञ कहता रहता है- छुरे पर पाए गए निशान मुलजिम की अँगुलियों के… Continue reading हरिशंकर परसाई: इंस्पेक्टर मातदीन चाँद परव्यंग्य: कहानी

जायसी और पद्मावत नागमती वियोग खंड-प्रश्नोत्तरी

1. “पद्मावत का सबसे बड़ा सौंदर्य पात्रों के मनोवैज्ञानिक चित्रण में है।” यह मान्यता किस विद्वान् की है? A. आचार्य रामचंद्र शुक्ल    B. गंपतिचंद्र गुप्त C. हजारी प्रसाद द्विवेदी    D. रामकुमार वर्मा 2. ‘पद्मावत’ को हिंदी में अपने ढंग की अकेली ट्रैजिक कृति किसने कहा है? A. डॉ. बच्चन सिंह ने B. विजयदेव… Continue reading जायसी और पद्मावत नागमती वियोग खंड-प्रश्नोत्तरी

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में पद्मावत  और जायसी (नागमती वियोग खंड)

जायसी के अक्षय कीर्ति का आधार है ‘पद्मावत’ जिसके पढ़ने से यह प्रकट हो जाता है कि जायसी का हृदय कैसा कोमल और ‘प्रेम की पीर’ से भरा हुआ था। क्या लोकपक्ष में, क्या अध्यात्म पक्ष में, दोनों ओर उसकी गूढत, गंभीरता और सरसता विलक्षण दिखाई देती है।  पद्मावत में प्रेमगाथा की परंपरा पूर्ण प्रौढ़ता… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में पद्मावत  और जायसी (नागमती वियोग खंड)

महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-1 Mahadevi Verma : Thakuri Baba

भक्तिन को जब मैंने अपने कल्पवास संबंधी निश्चय की सूचना दी तब उसे विश्वास ही न हो सका। प्रतिदिन किस तरह पढ़ाने आऊँगी, कैसे लौटूंगी, ताँगेवाला क्या लेगा, मल्लाह कितना माँगेगा, आदि-आदि प्रश्नों की झड़ी लगाकर उसने मेरी अदूरदर्शिता प्रमाणित करने का प्रयत्न किया। मेरे संकल्प के विरुद्ध बोलना उसे और अधिक दृढ़ कर देना… Continue reading महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-1 Mahadevi Verma : Thakuri Baba

कृष्ण चंदर-जामुन का पेड़ (Jamun Ka Ped)

रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्‍लर्क के पास गया, क्‍लर्क दौड़ा-दौड़ा सुपरिन्‍टेंडेंट के पास गया। सुपरिन्‍टेंडेंट दौड़ा-दौड़ा… Continue reading कृष्ण चंदर-जामुन का पेड़ (Jamun Ka Ped)

हरिशंकर परसाई-भोलाराम का जीव

ऐसा कभी नहीं हुआ था... धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफ़ारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवास-स्थान 'अलॉट' करते आ रहे थे। पर ऐसा कभी नहीं हुआ था। सामने बैठे चित्रगुप्त बार-बार चश्मा पोंछ, बार-बार थूक से पन्ने पलट, रजिस्टर पर रजिस्टर देख रहे थे। ग़लती पकड़ में ही… Continue reading हरिशंकर परसाई-भोलाराम का जीव

महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-2 Mahadevi Verma : Thakuri Baba

कुछ वर्षों में पत्नी ने उन्हें एक कन्या का उपहार दिया; पर इसके उपरांत वह विश्राम और पथ्य के अभाव में प्रसूति ज्वर से पीड़ित हुई तथा उचित चिकित्सा के अभाव में डेढ़ वर्ष की बालिका छोड़कर अपने कठोर जीवन से मुक्ति पा गई । ठकुरी उसी रात आल्हा सुनाकर लौटे थे। माता की मृत्यु… Continue reading महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-2 Mahadevi Verma : Thakuri Baba

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-2

ओ माँ! सावन-भादों की उमड़ी हुई नदी, भयावनी रात, बिजली कड़कती है, मैं बारी-क्वारी नन्ही बच्ची, मेरा कलेजा धड़कता है। अकेली कैसे जाऊं घाट पर? सो भी परदेसी राही-बटोही के पैर में तेल लगाने के लिए! सत-माँ ने अपनी बज्जर-किवाड़ी बंद कर ली। आसमान में मेघ हड़बड़ा उठे और हरहरा कर बरसा होने लगी, महुआ… Continue reading फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-2

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-1

उनकी (‘रेणु’) की रचनाओं में कटिहार रेलवे स्टेशन का उल्लेख मिलता है। ‘रेणु’ की पहली कहानी ‘नटबावा’ 1936 ई. के साप्ताहिक पत्रिका ‘विश्वामित्र’ में छपी थी। ‘मैला आँचल’ का प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। उसी की भूमिका में ‘रणु’ ने ‘अंचल’ और ‘आँचलिक’ शब्द का प्रयोग किया था। तब से आंचलिक को एक कथा-प्रकार… Continue reading फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-1

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-2

“वात्सल्य और शृंगार के क्षेत्रों का जितना अधिक उद्घाटन सूर ने अपनी बंद आँखों से किया उतना किसी और कवि ने नहीं। मानो इन क्षेत्रों के वे कोना-कोना झाँक आए है।” “सूरदास किसी आती हुई गीति परंपरा का चाहे वह मौखिक ही क्यों नहीं रही हो पूर्ण विकास का प्रतीक होता है।” “शृंगार और वात्सल्य… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-2