सुंदर विचार

हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

सरस भाषा हिन्दी है, सरल भाषा हिन्दी है सरस, सरल  और रुचिर  भाषा  हिन्दी है। मृदुल भाषा हिन्दी है, मधुर भाषा हिन्दी है मृदुल, मधुर  और  कोमल भाषा हिन्दी है। कर्म भाषा हिन्दी है, धर्म भाषा हिन्दी है कर्म, धर्म और  काव्य  भाषा  हिन्दी है। संस्कार भाषा हिन्दी है, संस्कृति भाषा हिन्दी है संस्कार, संस्कृति… Continue reading हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)

सारण भारत के बिहार प्रान्त में स्थित एक प्रमंडल एवं जिला है। यहाँ का प्रशासनिक मुख्यालय छपरा में है। सारण जिला तीन ओर से गंगा, गंडक एवं घाघरा नदियों से घिरा हुआ त्रिकोणीय भू-क्षेत्र है। सम्पूर्ण जिला समतल एवं उपजाऊ प्रदेश है। कहते हैं कि प्राचीन समय में यहाँ वनों का भरमार था। इन वनों… Continue reading छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)

हाइकु (1 से 100)

1.    हे! माँ शारदे काव्य कला के ज्ञान का विवेक दे। 2.    हे! वागेश्वरी भर शब्दों में शक्ति लेखनी पर। 3.    हे! वीणा पाणी सितार में झंकार  सुरीली लय। 4.    हंसवाहिनी सुर में यति गति झंकार भर। 5.    हे! स्वर दात्री     तानसेन वैजू को लौटा दे धरा। 6.    वर्तमान के मकड़जाल में उलझे हम। 7.   … Continue reading हाइकु (1 से 100)

हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)

प्रार्थना मनुष्य के मन की समस्त विश्रृंखलित एवं चारों तरफ भटकने वाली प्रवृतियों को एक केन्द्र पर एकाग्रचित करने वाला मानसिक व्यायाम है। प्रार्थना एक ऐसा कवच है जो डर या भय से हमारी रक्षा करते हुए हमें सत्य, ज्योति, और अमृत को प्राप्त करने के लिए समर्थवान बनता है। रामनरेश त्रिपाठी ‘पूर्व छायावाद युग’… Continue reading हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)

‘डोरिस लेसिगं’ (घर से नोबल तक)

मिटा दो अपनी हस्ती को, अगर कुछ मर्तबा-चाहो।कि दाना खाक में मिलकर गुल-ए-गुलजार होता है।। ‘डोरिस लेसिगं’ का जन्म पर्सिया (अब ईरान) में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ब्रिटिश थे। पिता पर्सिया के इम्पीरियल बैंक में कलर्क और माँ एक नर्स थी। लेसिंग का बचपन सुख और दुःख दोनों की छाया में बीता था,जिसमें सुख… Continue reading ‘डोरिस लेसिगं’ (घर से नोबल तक)

हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य

लोक साहित्य दो शब्दों के साथ मिलकर बना है ‘लोक’ और ‘साहित्य’ जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘लोक का साहित्य’। लोक साहित्य मूलतः लोक की मौलिक अभिव्यक्ति है जो लोगों के सम्पूर्ण जीवन का नेतृत्व करती है। लोक साहित्य की परम्परा उतना ही प्राचीन है, जितना की मनुष्य। इसीलिए इसमे लोक जीवन की प्रत्येक अवस्था,… Continue reading हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य

शबरी के राम

शबरी एक भील कुल की कन्या थी। उनका वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। ‘श्रमणा’ ‘भील समुदाय’ के ‘शबरी’ जाती की थी। शबरी प्रभु ‘राम’ की भक्त थी। परिवार के लोगों को शबरी का इस तरह से पूजा-पाठ करना अच्छा नहीं लगता था। कुछ समय के बाद उनके पिता शबरी का विवाह निश्चित कर दिये। आदिवासियों के… Continue reading शबरी के राम