सुंदर विचार

रघुकुल का त्याग एवं समर्पण

रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई।। रामायण ‘रघुकुल’ की त्याग एवं समर्पण की कथा है। बात उस समय की है, जब दशरथ पुत्र भरत नंदीग्राम में रहते थे। तब शत्रुघ्न जी भरत के आदेशानुसार राज्य का संचालन कर रहे थे। एक दिन माता कौशल्या अपने महल में सो रही थी,… Continue reading रघुकुल का त्याग एवं समर्पण

उर्मिला का त्याग

जब भगवान ‘राम जी’ को चौदह वर्ष का वनवास हुआ तब उनकी पत्नी ‘सीता जी’ ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया और बचपन से ही राम की सेवा में रहने वाले लक्ष्मण भाई अपने राम भैया से कैसे दूर रह सकते थे? इसलिए उन्होंने ने भी राम के साथ वन जाने के लिए माता… Continue reading उर्मिला का त्याग

निःशब्द ‘युवा’ (कविता)

बेरोजगार हैं युवा, किंतु निःशब्द नहीं प्रशिक्षित है किंतु बोलते नहीं। किसे कहे अपनी पीड़ा, यह प्रशिक्षित वर्ग उसकी आवाज कोई सुनता नहीं।   बीमार नहीं ये, आरक्षण के मारे हैं स्वार्थ का सितम, ढाया है सरकार ने तीस प्रतिशत वाले, हो गए अब आगे नब्बे प्रतिशत वाले, हो गए अब पीछे। चंद वोटों के… Continue reading निःशब्द ‘युवा’ (कविता)

गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’

“गुरु वही श्रेष्ठ है जिसकी प्रेरणा से शिष्य का चरित्र बदल जाए” गुरुभक्त आरुणि- पुराने समय में गुरु धौम्य के आश्रम में कई छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आश्रम में रहते थे। कुलीन राजघरानों और ब्राहमणों के पुत्र भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल और आश्रमों में एक साथ रहा करते थे। गुरु… Continue reading गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’

माँ की भूमिका

‘माँ’ शब्द की कोई परिभाषा नहीं होती है यह शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। असहनीय शारीरिक पीड़ा के पश्चात् बच्चे को जन्म देने वाली माँ को भागवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि ‘माँ’ जननी है। भागवान ने माँ के द्वारा ही सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है।   माता-पिता बनना मनुष्य के जीवन… Continue reading माँ की भूमिका

करोना (कविता)

प्रातःकाल का दृश्य देख आज आखों ने मन को समझाया। देख मानव ! दशा तू अपनी पशु-पंछी उन्मुक्त है जानवर पर तू फँसा है, जाल में अपनी तेरी कैसी यह है लाचारी अजब यह मनहूस घड़ी । प्रकृति ने छेड़ी है जंग चारों ओर हाहाकार मची है। घर के बाहर डर ही डर है घर… Continue reading करोना (कविता)

शब्दों का वर्गीकरण

1. शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया गया है- स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण-स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों के चार भेद होते हैं। तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज और संकर (क) तत्सम- ‘तत्सम’ का अर्थ होता है उसके समान यानि ज्यों का त्यों। हिन्दी भाषा में शब्दों का मूल… Continue reading शब्दों का वर्गीकरण

संत रविदास जी की पोथी

आज संत रविदास जी की इस पोथी’ को पढ़ने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे हमारे भारत के संत और महात्मा भविष्य में होने वाली हर घटनाओं से परिचित थे। आज जो हो रहा है उसका वर्णन संत रविदास जी ने अपने इस कविता में पहले ही लिख चुके थे। धन्य थे… Continue reading संत रविदास जी की पोथी

खिलाड़ी अवुमनिया

(महिला खिलाड़ी) "न तो हारना जरुरी है, न तो जितना जरुरी है,जीवन एक खेल है, सिर्फ खेलना जरुरी है।" किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और मजबूत इक्षा शक्ति का होना आवश्यक है। नाम, प्रसिद्धि, धन आदि आसानी से प्राप्त नहीं होता है। सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य,… Continue reading खिलाड़ी अवुमनिया

‘शब्द’ और ‘पद’

शब्द की परिभाषा- एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बने सार्थक समूह को ‘शब्द’ कहते हैं। या वर्णों का ऐसा सार्थक समूह जिसका कोई अर्थ हो उसे ‘शब्द’ कहते है। शब्द के दो प्रकार होते है- 1. सार्थक शब्द और 2. निरर्थक शब्द सार्थक शब्द- वे शब्द जिनसे किसी अर्थ का बोध… Continue reading ‘शब्द’ और ‘पद’