खिलाड़ी अवुमनिया

(महिला खिलाड़ी)

“न तो हारना जरुरी है, न तो जितना जरुरी है,
जीवन एक खेल है, सिर्फ खेलना जरुरी है।”

किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और मजबूत इक्षा शक्ति का होना आवश्यक है। नाम, प्रसिद्धि, धन आदि आसानी से प्राप्त नहीं होता है। सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य, लगन, प्रयास, कड़ी मेहनत और नियमितता के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण है शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना। शारीरिक गतिविधियों में खेल सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जो मनुष्य को तनाव और चिंता से मुक्त रखता है। खेल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से खेलते रहने से व्यक्ति को बहुत सारी बिमारियों और तकलीफों से मुक्ति मिलती है। विशेषकर मोटापा और ह्रदय रोगों से छुटकारा मिलता है। चाहे लड़का हो या लड़की सभी को खेलने के लिए प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। खेल खेलते रहने से व्यक्ति में अनेक प्रकार से विकास होता है। जैसे-
1. शारीरिक और मानसिक विकास।

  1. टीम बनाने की भावना और समय की पाबंदी का विकास।
  2. बच्चों में खेलों के द्वारा ही सही उर्जा मिलती है जिससे धैर्य और अनुशासन की भावना का विकास होता है।
  3. खेलते रहने से जीतने की भावना में ललक बढ़ती है।
  4. खेलते रहने से टीवी और मोबाइल से भी दूरियां बनी रहती है।

मनुष्य का सारा जीवन वैसे तो खेल के साथ ही जुड़ा हुआ है। खेल के मुख्य दो प्रकार है-

  1. इनडोर ( घर के अंदर का ) खेल – जैसे- चेस, कैरम बोर्ड, बैडमिन्टन आदि। इन खेलों को खेलने से मनोरंजन के साथ-साथ हमारा बौद्धिक विकास भी होता है।
  2. आउटडोर ( घर से बाहर का) खेल – जैसे – क्रिकेट, टेनिस, फूटबॉल, कबड्डी आदि। इन खेलों को खेलने से हमारे शारीरिक स्वास्थ्य का विकास होता है और साथ-साथ हमारे अंग भी मजबूत होते हैं।

हमारे देश में पुरुष वर्ग तो हमेशा से सभी खेलों को खेलते आ रहे हैं लेकिन महिलाओं को सभी खेलों को खेलने का मौका नहीं मिलता था। आज समय बदल चुका है। आज के समय में महिलाओं को भी हर तरह के खेलों में भागीदारी निभाने का मौका मिल रहा है जिससे महिलाएं भी अब सभी खेलों में अपनी भगीदारी निभाते हुए आगे बढ़ रही हैं, और अपने देश का नाम ऊंचा कर रही हैं।

आज महिलाएं राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष एवं अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ खेलों की दुनिया में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। खेल जगत में महिलाएं पुरुषों की तरह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सभी प्रतियोगिताओं में भाग ले रही है। ये हमारे देश के लिए गर्व की बात है। यहाँ मैं अपने ही देश की ‘उड़न परी’ पी.टी. उषा का उदाहरण देना चाहूंगी। जिनके पास संसाधनों का अभाव था फिर भी उन्होंने अपना और अपने देश का नाम ऐथलेटिक्स में ऊंचा किया। एथलेटिक्स प्रतियोगिता में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त किया। एशियन खेल, कॉमन वेल्थ एवं अन्य कई शिखर स्तरीय प्रतियोगिताओं में उनकी उपलब्धियां रही है। लम्बी कूद में ‘अंजू बॉबी जार्ज’ एशियन खेल में स्वर्ण पदक विजेता रही है। ओलम्पिक में भी उसने छठा स्थान प्राप्त कर भारत को गौरवान्वित किया। आज भारतीय महिलायें क्रिकेट और हॉकी में भी अपना बेहतर प्रर्दशन कर रही हैं। ये सभी महिला खिलाड़ी भारत को विश्व स्तर पर आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं ।
बैडमिंटन में ‘अपर्णा पोपट’, तैराकी में ‘बुला चौधरी’, पर्वता रोहण में ‘बिछेंद्री पाल’, टेनिस में ‘शानिया मिर्जा’, ‌मुक्केबाजी में ‘मैरी कॉम’, महिला पहलवान में ‘साक्षी मलिक आदि भारत की विश्व स्तरीय महिला खिलाड़ी हैं। आज भारत की महिलाओं ने खेल के हर क्षेत्र में अपने आप को साबित कर दिया है कि हम भी किसी से कम नहीं हैं।

खेल किसी भी देश और देश के खिलाड़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य की नींव है। बच्चे तो खलेते हैं और खलते ही रहेंगे जैसे नदियाँ बहती हैं और वे बहती ही रहेंगी। जो इन नदियों के बहती धारा को सही दिशा में परिवर्तित कर दे, वही बंजर भूमि को भी हरियाली में बदल देती है।

उसी प्रकार हमें महिला खिलाडियों को सिर्फ दिशा दिखाना है। वे अपनी राह खुद बना सकती हैं।

जयहिंद

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