संत रविदास जी की पोथी

आज संत रविदास जी की इस पोथी’ को पढ़ने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे हमारे भारत के संत और महात्मा भविष्य में होने वाली हर घटनाओं से परिचित थे। आज जो हो रहा है उसका वर्णन संत रविदास जी ने अपने इस कविता में पहले ही लिख चुके थे। धन्य थे वे महापुरुष।

एक बार रविदास ज्ञानी,
कहन लगे सुनो अटल कहानी।
कलयुग बात साँच अस होई,
बीते सहस्र पाँच दस होई।

भरमावे सब स्वार्थ के काजा,
बेटी बेंच तजे कुल लाजा।
नशा दिखावे घर में पूरा,
माता-बहन का पकड़ें जूड़ा।

अण्डा मांस मछलियाँ खावें,
भिक्षा कर अति पाप कमावें।
जबरी करिहैं भोग बिलासा,
सज्जन मन अति होय निराशा।

पर नारी को गले लगइहैं,
नारी भी अति आतंक मचहइहैं।
अपने पति को मार भगइहैं,
पर प्यारे को गले लगइहैं।

कर्म देख पृथ्वी फट जहइहैं,
अम्बर भी दरारें खइहैं।
अति भीषण क्रांति की ज्वाला,
तामें कूद पड़े मत्तवाला।

जब देश आजाद होइ जइहैं,
वो शक्ति जाकर छुप जइहैं।
धरे वेश साधु का न्यारा,
गुरु नाम का करै प्रचारा।

बल्कल का वस्त्र पहिनइहैं,
साधन भजन सबसे करवइहैं।
ऐसा मन्दिर एक बनवइहैं,
जो भूमण्डल पर कहीं न दिखइहैं।

पंचम कलश अनोखी मूरत,
झण्डा श्वेत सुरीली सूरत।
गुरु नाम से सब जग जाने,
उनको परम पूज्य अति मानै।

सत्य पंथ का करि प्रचारा,
देश धर्म का करि विस्तारा।
करैं संगठन बनि ब्रह्मचारी,
उन समान कोई न उपकारी।
अस कहि मौन भए रविदासा,
विनयपूर्ण मुनि प्रेम प्रकाशा।
………………

भारत में अवतारी होगा
जो अति विस्मयकारी होगा
ज्ञानी और विज्ञानी होगा
वो अदभुत सेनानी होगा

जीते जी कई बार मरेगा
छदम वेश में जो विचरेगा
देश बचाने के लिए होगा आह्वान
युग परिवर्तन के लिए चले प्रबल तूफ़ान

तीनों ओर से होगा हमला
देश के अंदर द्रोही घपला
सभी तरफ़ कोहराम मचेगा
कैसे हिंदुस्तान बचेगा

नेता मंत्री और अधिकारी
जान बचाना होगा भारी
छोड़ मैदान सब भागेंगे
सब अपने अपने घर दुबकेंगे

जिन जिन भारत मात सताई
जिसने उसकी करी लुटाई
ढूंढ-ढूंढ कर बदला लेगा
सब हिसाब चुकता कर देगा

चीन अरब की धुरी बनेगी
विध्वंसक ताकत उभरेगी
घाटे में होंगे ईसाई
इटली में कोहराम मचेगा
लंदन सागर में डूबेगा

युद्ध तीसरा प्रलयंकारी
जो होगा भारी संहारी
भारत होगा विश्व का नेता
दुनिया का कार्यालय होगा
भारत में न्यायालय होगा

तब सतयुग दर्शन आएगा
संत राज सुख बरसाएगा
सहस्र वर्ष तक सतयुग लागे
विश्व गुरु भारत बन जागे।’

पिछले कुछ सप्ताहों से इस रचना को पढ़ने के बाद मेरे मन में एक प्रश्न उठा कि हमारे संत महात्मा कितने ज्ञानी थे। जो भविष्य में आने वाली घटनाओं को जानते थे। जिसे आज की नई पीढ़ी महत्व नही देती।

5 thoughts on “संत रविदास जी की पोथी”

  1. क्या यह दोनों कविताएं संत रविदास जी की ही लिखी हुई है, किसी और की नहीं? कृपया प्रमाणित करने के लिए निवेदन है।

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