सुंदर विचार

क्रिया और उसके भेद

क्रिया की परिभाषा- जिस शब्द से किसी कार्य का करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका  रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों… Continue reading क्रिया और उसके भेद

वचन

वचन- ‘वचन’ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘संख्या’। वचन का अर्थ ‘कहना’ भी होता है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते है। जैसे- शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही है। माली पौधों को सींच रहा है। तालाब में बच्चे स्नान कर रहे हैं। टोकरी में… Continue reading वचन

करोना (कहानी)

‘करोना’ यह एक ‘वायरस’ का नाम है, जो चीन के ‘वुहान’ शहर ‘हुबेई’ में दिसंबर के महिने में जन्म लिया था। सबसे पहले इस वायरस की पुष्टि एक व्यक्ति के अन्दर हुई थी। पाँच दिन बाद उस बीमार व्यक्ति के 53 वर्षीय पत्नी को निमोनिया हो गया। निमोनिया इस करोना बीमारी का आम लक्षण था।… Continue reading करोना (कहानी)

दसानन

वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण (दसानन) ‘पुलस्य’ मुनि का पौत्र और ‘विश्रवा’ का पुत्र था। विश्रवा की ‘वरवर्णिनी’ और ‘कैकसी’ नाम की दो पत्नियाँ थी। रावण कैकसी का पुत्र था। रामायण में जब रावण सिंहासन पर बैठा रहता था, तब रावण के पैर के नीचे एक नीला रंग का व्यक्ति पेट के बल पर लेटा… Continue reading दसानन

श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम  ततुल्यं, रामनाम वरानने।।  इस मंत्र को ‘श्री रामतारक मंत्र’ भी कहा जाता है। इस मंत्र का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के एक हजार नामों के जाप के सामान है। इस मंत्र से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। एक समय भगवान भूतनाथ जी ने अपनी… Continue reading श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

नचिकेता

वैदिक युग में नचिकेता नाम का एक तेजस्वी ऋषिबालक था। उस बालक की कथा ‘तैत्रीय ब्राह्मण’, ‘कठोपनिषद्’ तथा ‘महाभारत’ में भी उपलब्ध है। नचिकेता ने बाल्यकाल में ही भौतिक वस्तुओं का परित्याग कर यम से ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। नचिकेता के पिता महर्षि वाजश्रवा ने "विश्वजित्" यज्ञ किया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया था कि इस यज्ञ… Continue reading नचिकेता

वक्त (कविता)

वक्त वक्त की बात है भईया वक्त बड़ा ही है बलवान ।   वक्त के आगे सब कोई हारा दुर्बल हो या हो पहलवान। वक्त बदलता रहता सबका गरीब हो या हो धनवान । वक्त वक्त पर भारी है अब वक्त बड़ा ही है बलवान।।   बदला वक्त जब हरिश्चन्द्र का पहुँचा दिया उनको श्मशान।… Continue reading वक्त (कविता)

लिंग (Gender)

लिंग- संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु के नर या मादा जाती का बोध होता हैं उसे लिंग कहते हैं। जैसे- दादा, दादी, माता, पिता, शेर, शेरनी, लड़का, लड़की आदि।  लिंग के तीन प्रकार होते हैं- पुल्लिंग- जिन शब्दों से ‘पुरुष’ या ‘नर’ जाती का बोध होता है उसे पुल्लिंग कहते हैं।… Continue reading लिंग (Gender)

तृण धरि ओट

बात उस समय कि है, जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया था। लंका में माता सीता जी वट वृक्ष के नीचे बैठ गई और चिंतित रहने लगी। रावण वही पर आकर सीता माता को रोज धमकाता और चला जाता था लेकिन सीता माता उसे कुछ भी नहीं बोलती थी। कई बार… Continue reading तृण धरि ओट

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

वाक्य की परिभाषा- शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला शब्द अथार्त शब्दों का ऐसा समूह जिससे सार्थक अर्थ निकलता हो, उसे वाक्य कहते हैं। जैसे- तुम जाओ, सीता पढ़ रही है। वाक्य एक पद का भी हो सकता है और अनेक पद का भी हो… Continue reading रचना के आधार पर वाक्य के भेद