ओ माँ! सावन-भादों की उमड़ी हुई नदी, भयावनी रात, बिजली कड़कती है, मैं बारी-क्वारी नन्ही बच्ची, मेरा कलेजा धड़कता है। अकेली कैसे जाऊं घाट पर? सो भी परदेसी राही-बटोही के पैर में तेल लगाने के लिए! सत-माँ ने अपनी बज्जर-किवाड़ी बंद कर ली। आसमान में मेघ हड़बड़ा उठे और हरहरा कर बरसा होने लगी, महुआ… Continue reading फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-2
सुंदर विचार
फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-1
उनकी (‘रेणु’) की रचनाओं में कटिहार रेलवे स्टेशन का उल्लेख मिलता है। ‘रेणु’ की पहली कहानी ‘नटबावा’ 1936 ई. के साप्ताहिक पत्रिका ‘विश्वामित्र’ में छपी थी। ‘मैला आँचल’ का प्रकाशन 1954 ई. में हुआ था। उसी की भूमिका में ‘रणु’ ने ‘अंचल’ और ‘आँचलिक’ शब्द का प्रयोग किया था। तब से आंचलिक को एक कथा-प्रकार… Continue reading फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफाम (कहानी) भाग-1
आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-2
“वात्सल्य और शृंगार के क्षेत्रों का जितना अधिक उद्घाटन सूर ने अपनी बंद आँखों से किया उतना किसी और कवि ने नहीं। मानो इन क्षेत्रों के वे कोना-कोना झाँक आए है।” “सूरदास किसी आती हुई गीति परंपरा का चाहे वह मौखिक ही क्यों नहीं रही हो पूर्ण विकास का प्रतीक होता है।” “शृंगार और वात्सल्य… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-2
आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-1
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ग्रंथ का आरंभ सिद्धों की वाणियों से हुआ है। आचार्य शुक्ल जी को इतिहास ग्रंथ लेखन में केदारनाथ पाठक से बहुत सहयोग मिला है। ''विलक्षण बात यह है कि आधुनिक गद्य साहित्य की परंपरा का प्रवर्तन नाटक से हुआ।'' (आचार्य रामचन्द्र शुक्ल) "इस वेदना को लेकर उन्होंने ह्रदय की ऐसी अनुभूतियाँ सामने रखीं, जो… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी के महत्वपूर्ण कथन भाग-1
रामवृक्ष बेनीपुरी रज़िया – रेखचित्र
कानों में चाँदी की बालियाँ, गले में चाँदी का हैकल, हाथों में चाँदी के कंगन और पैरों में चाँदी की गोड़ाई—भरबाँह की बूटेदार क़मीज़ पहने, काली साड़ी के छोर को गले में लपेटे, गोरे चेहरे पर लटकते हुए कुछ बालों को सँभालने में परेशान वह छोटी सी लड़की जो उस दिन मेरे सामने आकर खड़ी… Continue reading रामवृक्ष बेनीपुरी रज़िया – रेखचित्र
डॉ. नामवर के महत्वपूर्ण कथन
डॉ. नामवर सिंह का जन्म- 28 जुलाई 1927 को बनारस से तीस मिल दूर एक छोटे से गाँव जीवनपुर में हुआ था। इनका परिवार गहरवार राजपूत परिवार था। ‘छायावाद’ 1954 ई. में सरस्वती प्रेस से छपी थी। यह नामवर सिंह की पहली समीक्षात्मक पुस्तक है। इसमें बारह अध्याय है। नामवर सिंह ने इसकी भूमिका में… Continue reading डॉ. नामवर के महत्वपूर्ण कथन
रीतिकाल के महत्वपूर्ण रचनाएँ और रचनाकार
संस्कृत की वे रचनाएँ जो रीतिकाल का आधार बनी रचना और रचनाकार 1. कामसूत्र - वात्स्यायन 2. काव्य प्रकाश - मम्मट 3. चंद्रलोक एवं रतिमंजरी - जयदेव 4. साहित्य दर्पण - विश्वनाथ 5. वृत्त रत्नाकर - भट्ट केदार 6. छंदों मंजरी - गंगादास 7. शृंगार मंजरी - अकबर साह 8. शृंगार तिलक - रूद्र भट्ट… Continue reading रीतिकाल के महत्वपूर्ण रचनाएँ और रचनाकार
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’गैंग्रीन/रोज (कहानी)
गैंग्रीन/रोज - यह वास्तविक घटना पर आधारित कहानी है। रचनाकार- स. ही. वा. अज्ञेय रचनाकाल- मई, 1934 ई. (डलहौजी नामक स्थान पर रचित) पहले यह कहानी ‘रोज’ के नाम से प्रकाशित हुआ था। मार्च 1982 ई में रचनाकार द्वारा नाम परिवर्तित कर गैंग्रीन कर दिया गया। विपथगाह- 1937 ई. प्रथम संस्करण ‘रोज’ नाम से था।… Continue reading सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’गैंग्रीन/रोज (कहानी)
फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
‘लालपान की बेगम’ 1957 में भावात्मक शैली में लिखी गई एक आँचलिक कहानी है। ठुमरी संग्रह में संकलित लालपान की बेगम 1956 की कहानी है। यह इलाहाबाद से प्रकाशित ‘कहानी’ पत्रिका के जनवरी 1957 के अंक में प्रकाशित हुई थी। पुंज प्रकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपान्तरण भी किया है, जिसे सन् 1907 में… Continue reading फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
काव्य आन्दोलन और उसके प्रवर्तक
काव्य आन्दोलन – प्रवर्तक 1. नयी कविता (1951) स. ही. वा. अज्ञेय 2. नयी कविता आंदोलन (1954) - डॉ. जगदीश गुप्त 3. अकविता आंदोलन (1954) - डॉ. जगदीश चतुर्वेदी 4. प्रतिबद्ध कविता आंदोलन (1957) परमानंद श्रीवास्तव . 5. ताज़ी कविता आंदोलन (1958) - लक्ष्मीकांत वर्मा 6. नवगीत आंदोलन (1958) - राजेंद्रप्रसाद सिंह 7. सनातन सुर्योदयी… Continue reading काव्य आन्दोलन और उसके प्रवर्तक