आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ़ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फ़ुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्ख़ी और पाउडर को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फ़ेहरिस्त हाथ में थामे, एक कमरे… Continue reading भीष्म साहनी चीफ़ की दावत (कहानी)
सुंदर विचार
भीष्म साहनी ‘अमृतसर आ गया है’ (कहानी)
गाड़ी के डिब्बे में बहुत मुसाफिर नहीं थे। मेरे सामनेवाली सीट पर बैठे सरदार जी देर से मुझे लाम के किस्से सुनाते रहे थे। वह लाम के दिनों में बर्मा की लड़ाई में भाग ले चुके थे और बात-बात पर खी-खी करके हँसते और गोरे फौजियों की खिल्ली उड़ाते रहे थे। डिब्बे में तीन पठान… Continue reading भीष्म साहनी ‘अमृतसर आ गया है’ (कहानी)
शेखर जोशी : कोसी का घटवार (कहानी)
अभी खप्पर में एक-चौथाई से भी अधिक गेहूँ शेष था। खप्पर में हाथ डालकर उसने व्यर्थ ही उलटा-पलटा और चक्की के पाटों के वृत्त में फैले हुए आटे को झाड़कर एक ढेर बना दिया। बाहर आते-आते उसने फिर एक बार और खप्पर में झाँककर देखा, जैसे यह जानने के लिए कि इतनी देर में कितनी… Continue reading शेखर जोशी : कोसी का घटवार (कहानी)
हरिशंकर परसाई: इंस्पेक्टर मातदीन चाँद परव्यंग्य: कहानी
वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब) कहते हैं- वैज्ञानिक झूठ बोलते हैं, वहाँ हमारे जैसे ही मनुष्य की आबादी है। विज्ञान ने हमेशा इंस्पेक्टर मातादीन से मात खाई है। फ़िंगर प्रिंट विशेषज्ञ कहता रहता है- छुरे पर पाए गए निशान मुलजिम की अँगुलियों के… Continue reading हरिशंकर परसाई: इंस्पेक्टर मातदीन चाँद परव्यंग्य: कहानी
जायसी और पद्मावत नागमती वियोग खंड-प्रश्नोत्तरी
1. “पद्मावत का सबसे बड़ा सौंदर्य पात्रों के मनोवैज्ञानिक चित्रण में है।” यह मान्यता किस विद्वान् की है? A. आचार्य रामचंद्र शुक्ल B. गंपतिचंद्र गुप्त C. हजारी प्रसाद द्विवेदी D. रामकुमार वर्मा 2. ‘पद्मावत’ को हिंदी में अपने ढंग की अकेली ट्रैजिक कृति किसने कहा है? A. डॉ. बच्चन सिंह ने B. विजयदेव… Continue reading जायसी और पद्मावत नागमती वियोग खंड-प्रश्नोत्तरी
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में पद्मावत और जायसी (नागमती वियोग खंड)
जायसी के अक्षय कीर्ति का आधार है ‘पद्मावत’ जिसके पढ़ने से यह प्रकट हो जाता है कि जायसी का हृदय कैसा कोमल और ‘प्रेम की पीर’ से भरा हुआ था। क्या लोकपक्ष में, क्या अध्यात्म पक्ष में, दोनों ओर उसकी गूढत, गंभीरता और सरसता विलक्षण दिखाई देती है। पद्मावत में प्रेमगाथा की परंपरा पूर्ण प्रौढ़ता… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में पद्मावत और जायसी (नागमती वियोग खंड)
महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-1 Mahadevi Verma : Thakuri Baba
भक्तिन को जब मैंने अपने कल्पवास संबंधी निश्चय की सूचना दी तब उसे विश्वास ही न हो सका। प्रतिदिन किस तरह पढ़ाने आऊँगी, कैसे लौटूंगी, ताँगेवाला क्या लेगा, मल्लाह कितना माँगेगा, आदि-आदि प्रश्नों की झड़ी लगाकर उसने मेरी अदूरदर्शिता प्रमाणित करने का प्रयत्न किया। मेरे संकल्प के विरुद्ध बोलना उसे और अधिक दृढ़ कर देना… Continue reading महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-1 Mahadevi Verma : Thakuri Baba
कृष्ण चंदर-जामुन का पेड़ (Jamun Ka Ped)
रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्लर्क के पास गया, क्लर्क दौड़ा-दौड़ा सुपरिन्टेंडेंट के पास गया। सुपरिन्टेंडेंट दौड़ा-दौड़ा… Continue reading कृष्ण चंदर-जामुन का पेड़ (Jamun Ka Ped)
हरिशंकर परसाई-भोलाराम का जीव
ऐसा कभी नहीं हुआ था... धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफ़ारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवास-स्थान 'अलॉट' करते आ रहे थे। पर ऐसा कभी नहीं हुआ था। सामने बैठे चित्रगुप्त बार-बार चश्मा पोंछ, बार-बार थूक से पन्ने पलट, रजिस्टर पर रजिस्टर देख रहे थे। ग़लती पकड़ में ही… Continue reading हरिशंकर परसाई-भोलाराम का जीव
महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-2 Mahadevi Verma : Thakuri Baba
कुछ वर्षों में पत्नी ने उन्हें एक कन्या का उपहार दिया; पर इसके उपरांत वह विश्राम और पथ्य के अभाव में प्रसूति ज्वर से पीड़ित हुई तथा उचित चिकित्सा के अभाव में डेढ़ वर्ष की बालिका छोड़कर अपने कठोर जीवन से मुक्ति पा गई । ठकुरी उसी रात आल्हा सुनाकर लौटे थे। माता की मृत्यु… Continue reading महादेवी वर्मा : ठकुरी बाबा (रेखाचित्र) भाग-2 Mahadevi Verma : Thakuri Baba