NET SET JRF Study Material
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : ‘परशुराम की प्रतीक्षा’
Parshuram Ki Pratiksha कविता संग्रह-महत्वपूर्ण तथ्य रचना- ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ कविता संग्रह (खंडकाव्य) रचनाकाल- 1962/63 ई. के आसपास लिखा गया था। इसमें कुल 18 कविताएँ हैं, जिसमें ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ प्रमुख हैं। इस संग्रह में 15 नयी कविताएँ और 3 ‘सामधेनी’ से ली गई है। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ कविता पाँच खंड में हैं। यह कविता…
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : कुरुक्षेत्र का साँतवा सर्ग महत्वपूर्ण तथ्य
रचना- ‘कुरुक्षेत्र’, कुल 7 सर्ग हैं। रचनकार- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ प्रकाशन वर्ष- 1946 ई. काव्यरूप- ‘कुरुक्षेत्र’ प्रबंधात्मक महाकाव्य है। इसे आधुनिक युग की गीता कहा गया है। यह द्वितीय युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित रचना है। इसका नायक ‘कुरुक्षेत्र’ हैं। इस युद्ध में शांति की समस्याओं का चित्रण किया गया है। यह ‘प्रतीकात्मक’ रचना है।…
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ : ‘बादल राग’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य
* सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘बादल राग’ कविता में बादलों को ‘क्रांति’ का प्रतीक माना गया है, जो शोषक वर्ग के लिए भय और शोषित वर्ग के लिए आशा का संचार करते हैं। * यह कविता आम आदमी (लघुमानव) के दुःख को दर्शाती है। बादलों के माध्यम से क्रांति लाकर नवनिर्माण की कामना करती है,…
Hindi Grammar
हिन्दी व्याकरण – संधि : (भाग-1) स्वर संधि
संधि शब्द का अर्थ है- ‘मेल’। ‘संधि’ संस्कृत का शब्द है। संधि का व्युत्पति- यह दो शब्दों के योग से बना है। सम् + धि = ‘सम्’ का अर्थ होता है, ‘पूर्णतया’ और ‘धि’ का अर्थ होता है, ‘मिलना’ अथार्त दो ध्वनियों या वर्णों का पूर्णतया मिलना ‘संधि’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में कहे…
वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान)
(Pronunciation effort and its Classification: Part-1) उच्चारण स्थान- किसी वर्ण का उच्चारण करते समय अन्दर से आने वाला श्वास वायु जिस स्थान पर आकर रूकती है या जहाँ पर बिना रोके उसके निकलने का मार्ग बनाया जाता है। वही उस वर्ण का उच्चरण स्थान कहलाता है। लक्षण- किसी भी वर्ण को बोलते समय वायु तथा जिह्वा मुख के…
अविकारी शब्द ‘अव्यय’
अविकारी शब्द या अव्यय: ऐसे शब्द जिनके स्वरुप में लिंग, वचन, काल, पुरुष एवं कारक आदि के प्रभाव से कोई विकार नहीं होता अथार्त परिवर्तन नहीं होता है। वे अविकारी शब्द कहलाते हैं। अविकारी को ही ‘अव्यय’ कहते हैं। ‘अव्यय’ दो शब्दों के मिलने से बना है- अ + व्यय = अव्यय। ‘अ’ का अर्थ…
Poems
औरत पैदा नहीं होती बनाई जाती है
औरत पैदा नहीं होती, बनाई जाती है।रीतियों की कठोर भट्ठी में,रिवाजों की आँच परधीरे-धीरे पकाई जाती है। बचपन से ही कहना शुरू कर दिया जाता“धीरे बोलो, कम बोलो,जोर से मत हँसो, सिर झुकाकर चलो,बड़े सपने मत देखो।” उसे सभी सिखाते हैघर-आँगन की जिम्मेदारी,और भाई के हाथों मेंसौंप दी जाती है दुनिया सारी। बचपन से ही…
एक ख़ामोशी ही काफ़ी है
जब तक हम साथ हैं,तब तक सब कुछ सही हैथोड़ी हँसी, थोड़ी नाराज़गी,कुछ शिकवे, कुछ शिकायतें,कुछ अनकही-सी बातें…इन सबके बीचरिश्ता अभी ज़िंदा है। जब तक हम लड़ते हैं,एक-दूसरे से उलझते हैं,अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं,तब तक समझोहम एक-दूसरे के लिएमहत्त्वपूर्ण हैं। जब तक गुस्सा है,तब तक परवाह है,जब तक शिकायत है,तब तक उम्मीद…
शब्दों में भरकर संवेदना
शब्दों में भर संवेदना मैं तुम्हारी पीड़ा तक पहुँची हूँ, संदर्भों, साक्ष्यों और स्मृतियों के सहारे,जहाँ इतिहास मौन था, और साहित्य ने बोलना सीखा। अन्याय की हर दीवार पर, तुम्हारे जीवन की दरारें हैं,जिनसे झाँकता है, सदियों का दबा हुआ सच। तुम्हारी जिजीविषा ने सिखाया, संघर्ष केवल प्रतिरोध नहीं,एक सतत रचना है, मनुष्य बने रहने…
Stories
स्मृतियों की छाँह में ‘एक और बचपन’
मनुष्य का जीवन एक वृत्त की भाँति है- जहाँ से यह आरंभ होता है, अंततः वहीं लौट आता है। बचपन से युवावस्था, फिर प्रौढ़ावस्था और उसके बाद जीवन जब ढलान की ओर बढ़ने लगता है, तब बुढ़ापा आता है, जिसे प्रायः लोग कहते हैं बच्चा और बूढ़ा एक जैसे होते हैं अथार्त दूसरा बचपन कहा…
ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार
हम जीवन की आपाधापी में जब उलझे हुए रहते हैं, तब अक्सर उन चमत्कारों को भूल जाते हैं जो हर क्षण हमारे साथ घटित हो रहे होते हैं। हम बड़ी-बड़ी उपलब्धियों के लिए तो ईश्वर को याद करते हैं, पर उन सहज, निरंतर और नि:शब्द उपहारों पर ध्यान नहीं देते जिनके सहारे हमारा जीवन चल…
स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा
स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें…