महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएँ : इकाई – 2

बंगाल गजट/ कलकाता जनरल एडवर्टाइजर/ हिक्की गजट 29 जनवरी, 1780 ई० (साप्ताहिक) संपादक- जेम्स आगस्टस हिक्की भारत का पहला समाचार पत्र ‘बंगाल गजट’ था। जो अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होता था। उदंत मार्तंड (प्रति मंगलवार, मूल्य 2 रु० )  यह भारत का प्रथम साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र था। प्रकाशन वर्ष - 30 मई (1826 ई०)… Continue reading महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएँ : इकाई – 2

भक्ति काव्यधारा के दर्शन पंथ और मत : इकाई-2

द्वैतवाद (ब्रह्म संप्रदाय) - मध्वाचार्यअद्वैतवाद (स्मार्त संप्रदाय) - शंकराचार्यद्वैताद्वैतवाद (सनकादिक, रसिकसंप्रदाय) - निंबार्काचार्यविशिष्टाद्वैतवाद (श्री संप्रदाय) - रामानुजाचार्यअंचित्यभेदाभेदवाद (गौडीय संप्रदाय) - चैतन्य महाप्रभुरूद्र संप्रदाय - विष्णु स्वामीसखी, हरिदासी, टट्टी संप्रदाय - स्वामी हरिदासविश्नोई संप्रदाय - जंभानाथ (जंभोजी)रामवत संप्रदाय – रामानंदसिक्ख संप्रदाय – गुरुनानकउदासी संप्रदाय - श्रीचंदसत्यनामी संप्रदाय – संत जगजीवनदासराधावल्लभ संप्रदाय – स्वामी हितहरिवंशनिरंजनी संप्रदाय –… Continue reading भक्ति काव्यधारा के दर्शन पंथ और मत : इकाई-2

बिहारी सतसई : इकाई–5

(सं० जगन्नाथ दास रत्नाकर दोहा 1 से 50) बिहारी का जन्म: 1595 ई० में बसवा, गोविंदपुर, ग्वालियर में हुआ था। इस दोहा से भी  प्रमाण मिलता है। “जन्म ग्वालियर जानिए, खंड बुंदेले बाल। आई तरुनाई सुखद, मथुरा बसे ससुराल।।” बिहारी का निधन: 1663 ई० में हुआ था। पिता का नाम- केशवराय था। गुरु का नाम-… Continue reading बिहारी सतसई : इकाई–5

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’- ‘ब्रह्मराक्षस’ (कविता)

जन्म: (13 नवंबर 1917 – 11 सितंबर 1964 ई०) ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता ‘फैंटसी’ शिल्प पर आधारित है। फैंटसी शिल्प का प्रयोग मुक्तिबोध की कविताओं की विशेषता रही है। इस कविता की रचना 1957ई० में हुई थी। ‘ब्रह्मराक्षस’ कविता ‘चाँद का मुँह टेढ़ा’ में संकलित है, जो सनˎ1964ई० में प्रकाशित हुआ था। प्रकाशन के पाँच वर्ष बाद… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’- ‘ब्रह्मराक्षस’ (कविता)

काव्यशास्त्र ‘छंद’

‘छंद’ शब्द की व्युत्पति छद् (धातु) + अशुन् (प्रत्यय) से हुआ है, जिसका अर्थ होता है, अच्छादित करना, या नियमों से बंधी हुई रचना। छंद का उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।छंदों की सबसे पहले व्यवस्थित विवेचना ‘पिंगलाचार्य’ के द्वारा की गई थी।पिंगलाचार्य की रचना ‘छंद सूत्र’ है।इसका समय लगभग 200 ई०पू० माना जाता… Continue reading काव्यशास्त्र ‘छंद’

हिन्दी साहित्य की गद्य विधा ‘निबंध’ (इकाई-2)

निबंध का शाब्दिक अर्थ- वह रचना जिसमे विचार तथ्य आदि पूर्णतया बंधा हुआ हो उसे निबंध कहते है। “किसी एक विषय पर विचारों को क्रमबद्ध कर सुंदर, सुगठित और सुबोध भाषा में लिखी रचना को निबंध कहते हैं।” रामचंद्र वर्मा ने ‘संक्षिप्त हिन्दी सागर में निबंध’ के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा है- “गद्य… Continue reading हिन्दी साहित्य की गद्य विधा ‘निबंध’ (इकाई-2)

काव्यशास्त्र ‘काव्य हेतु’ (इकाई-3)

काव्य हेतु शब्द का अर्थ होता है- ‘कारण’ जिन कारणों से काव्य की रचना या सर्जना की जाती है उसे काव्य हेतु कहते हैं। संस्कृत में ‘हेतुर्ना कारणं’ अथार्त ‘कारण’ को ‘हेतु’ कहते हैं। इसका अर्थ हुआ ‘काव्य के उत्पति के कारण। डॉ नगेन्द्र के अनुसार- “किसी व्यक्ति में काव्य रचना की सामर्थ्य उत्पन्न करने… Continue reading काव्यशास्त्र ‘काव्य हेतु’ (इकाई-3)

काव्यशास्त्र – ‘रस’ (इकाई-3)

‘रस’ शब्द की व्युत्पति: रसˎ(धातु) + अच् (प्रत्यय) के योग से बना है। ‘रस’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘आनंद’ या ‘निचोड़’। काव्य को पढ़ने या सुनने में जिस आनंद की अनुभूति होती है उसे ‘रस’ कहते हैं।  रस शब्द का उल्लेख सबसे पहले ‘ऋग्वेद’ में मनुष्य के भोजन के ‘स्वाद’ के रूप में… Continue reading काव्यशास्त्र – ‘रस’ (इकाई-3)

काव्य दोष (इकाई-3)

परिभाषा: काव्य के वे तत्व जो रस के अस्वादन में बाधा उत्पन्न करे अथवा रस का अपकर्ष करे उसे ‘काव्य दोष’ कहते हैं। काव्य दोषों का उल्लेख सबसे पहले भरतमुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ में मिलता है।काव्य दोषों की सबसे पहले ‘व्यवस्थित विवेचन’ मम्मट ने किया था। काव्य दोषों की परिभाषाएँ विभिन्न आचार्यों के अनुसार: वामन के… Continue reading काव्य दोष (इकाई-3)

काव्य गुण (इकाई-3)

काव्य गुण: काव्य के सौंदर्य एवं अभिव्यंजना शक्ति को बढ़ाने वाले तत्वों को काव्य गुण कहा जाता है। अर्थ: काव्य गुण का तात्पर्य है दोषों का अभाव, शोभाकारक या आकर्षक धर्म।काव्य के गुणों की विवेचना सबसे पहले भरतमुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ में किया था।काव्य गुणों का ‘प्रतिष्ठापक’ आचार्य वामन माने जाते है। काव्य गुणों की परिभाएँ:… Continue reading काव्य गुण (इकाई-3)