ज्ञानपीठ पुरस्कार

ज्ञानपीठ पुरस्कार- भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। भारत का कोई भी नागरिक जो आठवीं अनुसूची में बताई गई 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में लिखता हो, वह इस पुरस्कार के योग्य है। पुरस्कार में 11 लाख रुपये की धन राशि, प्रशस्ति पत्र और वाग्देवी… Continue reading ज्ञानपीठ पुरस्कार

कामायनी ‘लज्जा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

भाग-1 "कोमल किसलय के अंचल में नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी, गोधूली के धूमिल पट में दीपक के स्वर में दिपती-सी। मंजुल स्वप्नों की विस्मृति में मन का उन्माद निखरता ज्यों- सुरभित लहरों की छाया में बुल्ले का विभव बिखरता ज्यों- वैसी ही माया में लिपटी अधरों पर उँगली धरे हुए, माधव के सरस कुतूहल का… Continue reading कामायनी ‘लज्जा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

कामायनी ‘श्रद्धा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

भाग-1 कौन हो तुम? संसृति-जलनिधि तीर-तरंगों से फेंकी मणि एक, कर रहे निर्जन का चुपचाप प्रभा की धारा से अभिषेक? मधुर विश्रांत और एकांत-जगत का सुलझा हुआ रहस्य, एक करुणामय सुंदर मौन और चंचल मन का आलस्य" सुना यह मनु ने मधु गुंजार मधुकरी का-सा जब सानंद, किये मुख नीचा कमल समान प्रथम कवि का… Continue reading कामायनी ‘श्रद्धा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

कामायनी ‘इड़ा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

भाग-1 "किस गहन गुहा से अति अधीर झंझा-प्रवाह-सा निकला यह जीवन विक्षुब्ध महासमीर ले साथ विकल परमाणु-पुंज नभ, अनिल, अनल, भयभीत सभी को भय देता भय की उपासना में विलीन प्राणी कटुता को बाँट रहा जगती को करता अधिक दीन निर्माण और प्रतिपद-विनाश में दिखलाता अपनी क्षमता संघर्ष कर रहा-सा सब से, सब से विराग… Continue reading कामायनी ‘इड़ा’ सर्ग (जयशंकर प्रसाद)

कामायनी (जयशंकर प्रसाद)

‘कामायनी’ हिन्दी भाषा का एक ‘महाकाव्य’ और जयशंकर प्रसाद की अमर कृति है। यह आधुनिक छायावादी युग की सर्वोतम प्रतिनिधि काव्य है। इसे छायावाद का ‘उपनिषद’ भी कहा जाता है। यह प्रसाद जी की अंतिम काव्यकृति है। यह महाकाव्य 1936 में प्रकाशित हुई थी। इसकी भाषा साहित्यिक खड़ी बोली और छंद तोटक है। इसमें पंद्रह… Continue reading कामायनी (जयशंकर प्रसाद)

आत्मकथा (Autobiography)

‘आत्मकथा’ (ऑटोबायोग्राफी) शब्द का सबसे पहला प्रयोग 1796 ई० में जर्मनी के हर्डर ने किया था। उसके बाद यह ब्रिटेन पहुँचा, जहाँ सबसे पहले राबर्ट साउथे ने इसका इस्तेमाल किया। उस समय तक साहित्य के इस विधा का कोई खास अर्थ नहीं निकाला गया। क्योंकि इसमें लेखक के कुछ निजी अनुभव निहित थे। साहित्य में… Continue reading आत्मकथा (Autobiography)

जीवनी (Biography)

किसी व्यक्ति के जीवन-चरित्र का चित्रण अथार्त किसी व्यक्ति विशेष के सम्पूर्ण जीवन के वृतांत को ‘जीवनी’ कहते हैं। जीवनी को अंग्रेजी में ‘बायोग्राफी’ कहा जाता है। जीवनी इतिहास, साहित्य और नायक की ‘त्रिवेणी’ होती है। जीवनी में लेखक किसी व्यक्ति विशेष के सम्पूर्ण जीवन और यथेष्ठ जीवन में घटित घटनाओं का कलात्मक और सौंदर्यता… Continue reading जीवनी (Biography)

संस्मरण (Memories)

संस्मरण अंग्रेजी के शब्द ‘मेमायर्स’ का हिन्दी अनुवाद है, जिसका अर्थ है ‘स्मरण’ के आधार पर लिखा गया साहित्य रूप। संस्मरण शब्द की व्युत्पति सम्+स्मृ+ल्युट (अण्) से हुई है, जिसका अर्थ होता है- सम्यक तरीके से किया गया स्मरण। अतः इस विधा का मूल आधार ‘स्मरण’ या ‘स्मृति’ है।     संस्मरण साहित्य की एक विधा… Continue reading संस्मरण (Memories)

रेखाचित्र (Drawing, Sketch)

हिंदी साहित्य के गद्य में अनेक विधाएँ हैं। रेखाचित्र गद्य साहित्य की आधुनिक विधा है। इस विधा में लेखक रेखाचित्र के माध्यम से शब्दों का ढाँचा तैयार करता है। लेखक किसी सत्य घटना की वस्तु का या व्यक्ति का चित्रात्मक भाषा में वर्णन करता है। इसमें शब्द चित्रों का प्रयोग आवश्यक होता है। रेखाचित्रकारों में… Continue reading रेखाचित्र (Drawing, Sketch)

पत्र-साहित्य

लेखक पत्र-साहित्य समाचारों का आदान-प्रदान करना पत्र लेखन कहलाता है। प्राचीन समय में पत्र लेखन का बहुत अधिक प्रचलन था। पत्र चाहे औपचारिक हो या अनौपचारिक दोनों ही स्थिति में पत्रों का उपयोग किया जाता था। परन्तु आज समय के आधुनिकता के साथ-साथ सभी चीजों का आधुनिकरण हो रहा है। अनौपचारिक पत्रों के लिए मोबाईल,… Continue reading पत्र-साहित्य