मीरा पदावली (संपादक विश्वनाथ त्रिपाठी) पद : प्रारंभ से 20 तक, इकाई – 05

मीरा का जीवन परिचय: कृष्ण भक्ति शाखा की महान हिन्दी कवयित्री मीरा का जन्म और मृत्यु दोनों ही विवादास्पद है।डॉ नगेन्द्र के अनुसार- मीरा का जन्म 1498 ई० में हुआ था।मीरा का निधन - 1558-1563 ई० के बीच हुआ होगा ऐसा माना जाता है।आचार्य रामचंद्र शुक्ल - मीरा का जन्म 1573 ई० मानते है।मीरा का… Continue reading मीरा पदावली (संपादक विश्वनाथ त्रिपाठी) पद : प्रारंभ से 20 तक, इकाई – 05

विद्यापति की पदावली (संपादक- डॉ नरेन्द्र झा) पद सं 1-25 तक : इकाई – 5

  विद्यापति का जन्म मधुबनी (बिहार) के बिपसी गाँव में हुआ था।इनका जन्म 14वीं -15वीं शदी के मध्य माना जाता है।कुछ विद्वानों के अनुसार- जन्मकाल (1350-1450) माना जाता है।इनके पितामह जयदत्त संत थे। वे योगेश्वर नाम से विख्यात थे।  गुरु का नाम - पंडित हरि मिश्र था।पत्नी का नाम- चंदादेवी (चंपती) देवी था।   ये तिरहुत… Continue reading विद्यापति की पदावली (संपादक- डॉ नरेन्द्र झा) पद सं 1-25 तक : इकाई – 5

सूरदास भ्रमरगीतसार (सं रामचंद शुक्ल – इकाई 5) पद संख्या 21- 70 तक

‘भ्रमरगीत सार’ आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा सम्पादित महाकवि सूरदास के पदों का संग्रह है। उन्होंने सूरदास के भ्रमरगीत से लगभग 400 पदों को छांटकर भ्रमरगीतसार के रूप में प्रकाशित किया था। आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद दिवेदी और श्यामसुन्दरदास के अनुसार- सूरदास का जन्म: 1474 ई० ‘रुनकता’ नामक गाँव में हुआ था। डॉ नगेन्द्र, डॉ… Continue reading सूरदास भ्रमरगीतसार (सं रामचंद शुक्ल – इकाई 5) पद संख्या 21- 70 तक

रामचरितमानस – तुलसीदास (उत्तरकाण्ड – इकाई 5)

तुलसीदास भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हैं। भारतीय संस्कृति को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कवि तुलसीदास हैं। अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ ने तुलसीदास जी के संबंध में लिखा है- “कविता करके तुलसी न लसै। कविता पा लसी तुलसी की कला।। राम को भज अमर न हुए तुलसी। तुलसी को पा अमर है रामलला”।। तुलसीदास… Continue reading रामचरितमानस – तुलसीदास (उत्तरकाण्ड – इकाई 5)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – सरोज स्मृति (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्ति-पूजा' एक ही समय में लिखी गई हैं। ‘सरोज स्मृति’ कविता का रचनाकाल 1935 है और राम की शक्ति पूजा का  1936। ‘सरोज स्मृति’ हिन्दी का श्रेष्ठतम शोक गीत है। कवि निराला के द्वारा अपनी पुत्री की मृत्यु पर लिखी गई इस कविता में करुणा भाव… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – सरोज स्मृति (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – कुकुरमुत्ता (कविता)

‘कुकुरमुत्ता’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक लंबी और प्रसिद्ध कविता है। इस कविता में कवि ने पूंजीवादी सभ्यता पर कुकुरमुत्ता के बहाने करारा व्यंग्य किया है। यह कविता स्वतंत्रता पूर्व सनˎ 1941 में लिखी गई निराला जी की बहुचर्चित, सामाजिक, व्यंग्यात्मक कविता है। इस कविता का मूल स्वर प्रगतिवादी है। ‘कुकुरमुत्ता’ कविता की सही-सही… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – कुकुरमुत्ता (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जूही की कली (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने 1920 ई० के आस-पास लेखन कार्य आरम्भ किया था। उनकी पहली रचना ‘जन्म-भूमि’ पर लिखा गया एक गीत था। लम्बे समय तक निराला जी की प्रथम रचना के रूप में प्रसिद्ध ‘जूही की काली’ जिसका रचना काल निराला ने स्वयं 1916 ई० बतलाया था। वस्तुतः 1921 में लिखी गई थी… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जूही की कली (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- राम की शक्तिपूजा (काव्य)

‘राम की शक्तिपूजा’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की महानतम रचनाओं में से है। यह एक लघु पौराणिक आख्यान काव्य है। इसकी रचना 1936 में की गई थी। यह एक लम्बी कविता है। जो राम-रावण युद्ध की पौराणिक घटना पर आधारित है। इस कविता में आधुनिक युग का प्रतिबिम्ब है। वाल्मीकि से लेकर तुलसीदास आदि कवियों… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- राम की शक्तिपूजा (काव्य)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ – भूल-गलती (कविता)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ जी का आधुनिक युग में ‘प्रगतिवाद’ और ‘प्रयोगवादी’ कविताओं में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्हें प्रगतिवाद और नई कविता के बीच का ‘सेतु’ भी माना जाता है। गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ का संपूर्ण काव्य ‘फैंटसी’ शिल्प पर आधारित है। मुक्तिबोध अपने आप में एक अनूठे कवि थे। उनके जैसा उनके पहले कोई कवि नहीं… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ – भूल-गलती (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)

‘बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु!’ कविता निराला जी के ‘अर्चना’ कविता संग्रह में संकलित है। ‘अर्चना’ का प्रकाशन 1950 में हुआ था। ‘बाँधो न नाव इस ठाँव बंधु!’ कविता में कवि ‘डलमऊ’ के पक्के घाट पर गुंबद के नीचे बैठकर अपनी पत्नी को याद करके यह कविता लिखते हैं। कवि नाविक को अपनी नाव… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)