‘वृद्धाश्रम’ इस नाम को सुनकर अब ना तो बुरा लगता है, और ना ही कोई आश्चर्य होता है, अब तो आदत सी पड़ गई है। फौजी महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी भगवान ने उनकी दोनों मनोकामना पूरी कर दी थी। दोनों बहुत खुश थे। जहाँ-जहाँ… Continue reading दादी
Category: stories
कहानी
फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
‘लालपान की बेगम’ 1957 में भावात्मक शैली में लिखी गई एक आँचलिक कहानी है। ठुमरी संग्रह में संकलित लालपान की बेगम 1956 की कहानी है। यह इलाहाबाद से प्रकाशित ‘कहानी’ पत्रिका के जनवरी 1957 के अंक में प्रकाशित हुई थी। पुंज प्रकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपान्तरण भी किया है, जिसे सन् 1907 में… Continue reading फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
पिता
‘माँ’ विश्व की अद्भूत और अनोखी देन है क्योंकि वह अपने बच्चों को नौ महीनों तक कोख में रखकर पालती-पोषती है और उसे इस नयी दुनिया से परिचित करवाती है। यानी उसे जन्म देती है, उसे अपना दूध पिलाकर उस पौधा रूपी बालक को सींचती और संवारती हैं। उसी प्रकार पिता का भी स्थान हमारे… Continue reading पिता
दादी
वृद्धाश्रम इस नाम को सुनकर ना तो किसी को बुरा लगता है, और ना ही कोई आश्चर्य होता है, अब तो आदत सी पड़ गई है। फौजी महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी भगवान ने उनकी दोनों मनोकामना पूरी कर दी थी। दोनों बहुत खुश थे।… Continue reading दादी
‘पल्लू’ की गरिमा (लघु कथा)
‘पर्दा’ अरबी भाषा से आया हुआ शब्द है। जिसका अर्थ होता है, ‘ढकना’। ‘बुर्का’ भी एक तरह से घूँघट ही है, जिसे मुस्लिम समुदाय की महिलाएँ और लडकियाँ पुरुषों के गलत निगाह से बचने के लिए पहनती हैं। भारत में घूँघट प्रथा भी इस्लामों की देन है। इस्लामी आक्रमणकारियों और लुच्चे-लफंगों से अपनी बचाव के… Continue reading ‘पल्लू’ की गरिमा (लघु कथा)
दिलचस्प कहानी (लघु कथा)
सन् 1994 की बात है, उस समय हमारे देश के राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा जी थे। अधिकारिक यात्रा पर वे मस्कट गए थे। उस समय एयर इण्डिया में तीन दुर्लभ बातें हुई थी। पहली बात यह हुई कि ओमान के राजा ‘कबूस बिन सईद अल सईद’ किसी भी देश के गणमान्य व्यक्ति को हवाई… Continue reading दिलचस्प कहानी (लघु कथा)
अच्छे कर्मो का फल (लघु कथा)
कहा गया है कि माता-पिता के कर्मो का फल बच्चे को मिलता है। यह कहानी ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में रहनेवाले फ्लेमिंग नामक एक गरीब किसान की है। फ्लेमिंग एक दिन अपने खेत में काम कर रहे थे। अचानक उसी समय उन्हें किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी। वे काम छोड़कर उस आवाज की ओर… Continue reading अच्छे कर्मो का फल (लघु कथा)
बरगद को वरदान
प्रभु श्री राम के वन जाने से अयोध्या के सभी निवासी दु:खी थे। राजा दशरथ, अपने दोनों बेटे और बहु के वियोग को बर्दाश्त नहीं कर सके। वे स्वर्ग सिधार गए। पिता की मृत्यु की खबर से राम, लक्ष्मण और सीता बहुत दु:खी हुए। उन्होंने जंगल में ही पिंडदान करने का निश्चय किया। पिंडदान के… Continue reading बरगद को वरदान
घाघ और भड्डरी (कहानी) GHAGH AUR BHADDARI (Story)
घाघ और भड्डरी दोनों एक ही व्यक्ति थे या दो। इस विषय पर लोगों में मतभेद है। अनुमान यही लगाया जाता है कि ये दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं। कहावतों में बहुत जगह ऐसा भी है- ‘कहै घाघ सुनु भड्डरी’ या ‘कहै घाघ सुनु घाघिनी’ आदि। कहीं-कहीं घाघिनी, घाघ की पत्नी को कहा… Continue reading घाघ और भड्डरी (कहानी) GHAGH AUR BHADDARI (Story)
भोलेनाथ का प्रसाद (कहानी)
सावन का महीन था। एक पति-पत्नी करीब दस बारह वर्षों से बाबा धाम सावन के महीने में शंकर भगवान जी को जल चढ़ाने जाया करते थे। किसी ने उन्हें कहा था कि बाबा भोले सबकी मनोकामना पूरी करते हैं। आपकी मनोकामना भी भगवान जरुर पूरी करेंगे। शादी के कई वर्षों बाद भी उन दोनों को… Continue reading भोलेनाथ का प्रसाद (कहानी)
