नेताजी सुभाष चन्द्रबोस : ‘सेवा ही सच्चा राष्ट्र धर्म है’

सुभाषचंद्र बोस के घर के सामने एक बुढ़िया भिखारिन रहती थी। वे देखते थे कि वह हमेशा भीख मांगती थी। उसका दर्द साफ दिखाई देता था। उसकी ऐसी अवस्था देखकर उनका दिल दहल जाता था। भिखारिन से मेरी हालत कितनी अच्छी है यह सोचकर वे स्वयं शर्म महसूस करते थे। उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट होता… Continue reading नेताजी सुभाष चन्द्रबोस : ‘सेवा ही सच्चा राष्ट्र धर्म है’

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : “निष्काम सेवा”

ओडिशा के कटक शहर स्थित उड़िया बाजार में एक बार प्लेग फैल गया। केवल बापू पाड़ा मोहल्ला इससे बचा हुआ था क्योंकि वहां पढ़े-लिखे लोग रहते थे और वे आसपास की सफाई पर ध्यान देते थे। वहां के कुछ लड़कों ने सफाई अभियान चलाने के लिए एक दल बनाया जिसमें 10 साल के बच्चे से… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : “निष्काम सेवा”

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’

भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’

सुभाषचंद्र बोस ‘हिंदी भाषा का महत्व’

नेताजी सुभाषचंद्र बोस उन दिनों बर्मा में थे। वे अंग्रेजों के विरुद्ध आजाद हिन्द फ़ौज के सिपाहियों को युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे। बर्मा में व्यवसाय करने वाले भारतीयों ने नेताजी से संपर्क किया। नेताजी के इस काम के लिए उन व्यापारियों ने काफी धन जमा किया ताकि इस राष्ट्रीय कार्य में किसी… Continue reading सुभाषचंद्र बोस ‘हिंदी भाषा का महत्व’

अंजान परी एलिशा

मलेशिया का लंकावी समुद्र तट, सांझ की सुनहरी धूप लहरों पर नाच रही थी। हम दोनों कुछ देर सागर में तैरने के बाद तट के किनारे चादर बिछाकर बैठे हुए थे। हवा में सनसनाहट थी और समुद्र के किनारे पेड़ों की सरसराहट मिलकर एक अद्भुत संगीत सुना रही थी। समुद्र की लहरें जैसे अपने ही… Continue reading अंजान परी एलिशा

बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)

बचपन से ही नरेंद्र मेधावी थे। वे जो कुछ भी कहते, उनके साथी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे। एक दिन कक्षा में वे कुछ मित्रों को कहानी सूना रहे थे। उनके सभी साथी सुनने में मुग्ध थे। उन्हें पता ही नहीं चला कि शिक्षक कक्षा में आ गए और पढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी… Continue reading बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)

कौवा और कछुआ (बाल कथा)

एक समय की बात है। एक गाँव में एक बरगद के पेड़ पर एक चतुर कौवा रहता था। पेड़ के पास ही एक तालाब में एक कछुआ भी रहता था। कछुआ बहुत ही आलसी था। कुछ दिनों के बाद कछुआ भी पेड़ के कोटर में आकर रहने लगा। कौवा रोज मेहनत करके अपने लिए खाना… Continue reading कौवा और कछुआ (बाल कथा)

मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)

एक छोटी सी मछली नदी में रहती थी। उसके मन में डर लगा रहता था कि कहीं उसे कोई बड़ी मछली खा न जाए। नदी एक दिन मछली से पूछी, तुम इतना डरती क्यों हो? मछली बोली मैं बहुत छोटी हूँ, इसलिए मैं बहुत डरती हूँ। नदी मछली से बोली, तुम डरो नहीं तेज तैरना… Continue reading मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)

शहीदी दिवस

सवा लाख से एक लडाऊं, चिड़ियन से मैं बाज तुडाऊं  तबै गुरुगोविंद सिंह नाम कहाऊं सिक्खों के दसवें गुरु, गुरुगोविंद सिंहजी के परिवार की शहादत को शत-शत नमन। गुरुगोविंद सिंह ऐसे वीर संत थे, जिनकी मिसाल दुनिया के इतिहास में कम ही मिलती है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। नानकशाही कैलेंडर… Continue reading शहीदी दिवस

शापित ‘वधू’

बात बहुत पुरानी और सत्य है। हमारे नानी के यहाँ की एक पड़ोसी की कहानी है। वैसे तो नानी के यहाँ सभी बुजुर्ग औरतें मर्द नाना-नानी और सभी नौजवान लड़का-लड़की मामा-मौसी कहलाते हैं। हमारे नानी के पड़ोसी रामशरण सिंह और उनकी पत्नी कौशल्या बहुत ही अच्छे और संस्कारी थे। उनके पाँच बच्चे थे। तीन बेटियाँ… Continue reading शापित ‘वधू’