वो बीते हुए दिन (कहानी)

‘प्रेम’- इस ढाई अक्षर के प्रेम शब्द को परिभाषित करना अत्यंत ही कठिन है। ‘प्रेम’ शब्द का कोई रंग, रूप या आकर नहीं होता है। इसे हम सब भावना के द्वरा ही महसूस करते हैं। प्रेम को ‘रूप’ और ‘आकर’ हम मनुष्य ही दे सकते हैं जैसे माँ-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, प्रेमी-प्रेमिका के प्रेम सम्बन्ध… Continue reading वो बीते हुए दिन (कहानी)

गुजरी महल (कहानी)

भारत के इतिहास में कई सफल और असफल प्रेमी-प्रेमिकाओं की प्रेम कहानियाँ है जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। ये प्रेम कहानियाँ सुनने में परिलोक की कथा जैसी लगती हैं। जिसमे सिर्फ सुख ही सुख होता हो दुख तो कभी आता ही नहीं है। ये प्रेम कहानियाँ इतनी आसान और इतनी सरल नहीं… Continue reading गुजरी महल (कहानी)