जिन सपनों में जीना चाही वे सपने बिखर गए दिल के अरमान अब, आंसू बन बह गए। राह कौन सी जाऊं? यह सोचकर थक गई। दुनिया की भीड़ देख, जीने की राह मिल गई।
Author: इंदु सिंह
आत्मसम्मान (कविता)
चाहे जो भी हो जाए, आत्मसम्मान न खोने देना। भावना से यह जुड़ा शब्द है, स्वयं को यह सम्मान दिलाता। जागृत जब होता सम्मान, तब आत्मनिर्भरता आ जाता है। बिना आत्मसम्मान के, मानव नहीं बढ़ पाता है। कष्टमयी हो जाता जीना, जब आत्मसम्मान गिर जाता है। हो जब प्राणी कर्त्तव्यपरायण, वह आत्मनिर्भर बन जाता है।… Continue reading आत्मसम्मान (कविता)
जाड़े की भोर
हुई भोर जाड़े की, ओढ़ कोहरे की चादर। रवि ने खोली देर से आंखें, सोई चिरैया देख रवि को, करली अपनी आंखें बंद। ऊषा ने जब ली अंगड़ाई, तब रवि की लाली आई। मंद-मंद सुमन मुस्काई, नभ में खग ने दौड़ लगाई। धरा प्रसन्न होकर नहाई, गीत सभी ने मिलकर गाई।
रात पूनम की
आई पूनम की रात सुहानी, हुआ प्रफुल्लित सम्पूर्ण गगन। चांद से होगा चांदनी का मिलन, हर्षित हुई रात की रानी। स्नेह रस बरखा वसुंधरा पर, गोपियों का इंतजार हुआ खत्म, रास रचाने आए वसुदेव पुत्र, गोपियों का होगा कान्हा से मिलन।
फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट (अनुरोध सखा) कविता
तुमसे है अनुरोध सखा, आया है एक संदेशा सखा। देख अनुरोध आई मुस्कान, मालूम न था हम दोनों मिलेंगे। मिलकर दोनों जुदा हुए थे, पर पता नही था कैसे मिलेंगे? मन में थी आशा फिर भी सखा, पर था यह बहुत कठिन सखा। हो! धन्यवाद आनन ग्रंथ (फेसबुक) का, बिछड़ों को मिला दिया इसने सखा।
आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता
मिडिया पर आई एक नई किताब, कहते हैं जिसे आनन ग्रंथ (फेसबुक)। यह आनन ग्रंथ निराला है, लगता है सबको प्यारा है। लॉग इन करके मित्र बनाते, और बढ़ाते अपनी पहचान। औरों की बात हम सुनते हैं, अपनी बात सुनाते है। सबकी होती सबसे पहचान, साझा करते सब अपनी बात। मित्र बनाते हैं सब मिलजुल,… Continue reading आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता
हे! पुरुष (कविता)
हमारे समाज में ज्यादातर कवि, लेखक और गीतकारों ने सिर्फ नारियों के ही गुणों का बखान अपने कविताओं, गीतों और कहानियों में किया है, जबकि पुरुष के बिना समाज की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है। पुरुष के बिना घर परिवार सुना-सुना रहता है। पुरुष घर, परिवार और समाज के शान और सरताज होते… Continue reading हे! पुरुष (कविता)
लौट जायेंगे हम (कविता)
मन को उदास न कीजिए, जी भर के जीना सीखिए। छोड़िये उलाहना देना औरों को, बस धन्यवाद दीजिए। गुजरिए जिन राहों से होकर, प्यारा सा संदेश दीजिए। देख कर हर जन को, जरा सा मुस्करा दीजिए। उम्र का हर दौड़ बेहतरीन है, हर उम्र से कुछ सीखिए। लौट जायेंगे हम सब एक दिन, जहाँ से… Continue reading लौट जायेंगे हम (कविता)
श्रापित रावण
रावण अपने पूर्वजन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे। एक श्राप के चलते उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार- सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ‘सनकादिक’ ऋषि कहलाते थे और देवताओं के पूर्वज माने जाते थे। एक बार ये चारों ऋषि सम्पूर्ण लोकों से दूर… Continue reading श्रापित रावण
स्मृति (कविता)
निकली थी घर से अकेले, जीने को जिंदगी लेकिन आपकी यादें, और याद आने लगी । मन से आपकी स्मृति, कभी निकलती नहीं सुगंध आपके एहसास की, कभी कम होती नहीं । बरसों बीत गए आपके साथ रहकर, एक ही घर में उन यादों की प्रतिबिम्ब, नयनों से ओझल होती नहीं । हुलस कर लिखती… Continue reading स्मृति (कविता)
