आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता

मिडिया पर आई एक नई किताब,

कहते हैं जिसे आनन ग्रंथ (फेसबुक)।

यह आनन ग्रंथ निराला है,

लगता है सबको प्यारा है।

लॉग इन करके मित्र बनाते,

और बढ़ाते अपनी पहचान।

औरों की बात हम सुनते हैं,

अपनी बात सुनाते है।

सबकी होती सबसे पहचान,

साझा करते सब अपनी बात।

मित्र बनाते हैं सब मिलजुल,

आनन ग्रंथ की अपनी पहचान।

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