वैशाली-वधू

आम्रपाली बौद्ध काल के इतिहास की एक ऐसी स्त्री पात्र थी। जिसे सबसे खूबसूरत महिला होने का सौभाग्य प्राप्त था। अपनी जिस खूबसूरती के कारण आम्रपाली प्रसिद्ध थी, उसी खूबसूरती के कारण आम्रपाली को बहुत अपमान भी सहना पड़ा था। लेकिन अन्त में यही खूबसूरती उसे अध्यात्म के मार्ग पर ले गया। एक समय की… Continue reading वैशाली-वधू

लिविंग रिलेशनशिप

यह मेरी अपनी सोच है। मेरे ख्याल से जिन दो व्यक्तियों को जीवन भर साथ रहना हैं। उसके साथ पहले ही रहकर देख लेने में क्या हर्ज है। कम से कम यह तो पता चल जाएगा कि वे दोनों जीवन भर साथ निभा सकते है या नहीं। बाद में परिवार और समाज आता है। आज… Continue reading लिविंग रिलेशनशिप

हीर रांझा प्रेम (कहानी)

आज के समय में 'लव मैरिज' का बोलबाला है। लव के बाद मैरिज हो रहा है या मैरिज के बाद लव।यह कहना बड़ा मुश्किल है। 'लव' तो उन लोगों ने किया था। जिसका उदाहरण हम आज भी देते हैं। 'लैला ने मजनू' के साथ, 'श्री ने फरहाद' के साथ 'सोनी ने महीवाल' के साथ और… Continue reading हीर रांझा प्रेम (कहानी)

आत्मसम्मान (कविता)

चाहे जो भी हो जाए, आत्मसम्मान न खोने देना। भावना से यह जुड़ा शब्द है, स्वयं को यह सम्मान दिलाता। जागृत जब होता सम्मान, तब आत्मनिर्भरता आ जाता है। बिना आत्मसम्मान के, मानव नहीं बढ़ पाता है। कष्टमयी हो जाता जीना, जब आत्मसम्मान गिर जाता है। हो जब प्राणी कर्त्तव्यपरायण, वह आत्मनिर्भर बन जाता है।… Continue reading आत्मसम्मान (कविता)

जाड़े की भोर

हुई भोर जाड़े की, ओढ़ कोहरे की चादर। रवि ने खोली देर से आंखें, सोई चिरैया देख रवि को, करली अपनी आंखें बंद। ऊषा ने जब ली अंगड़ाई, तब रवि की लाली आई। मंद-मंद सुमन मुस्काई, नभ में खग ने दौड़ लगाई। धरा प्रसन्न होकर नहाई, गीत सभी ने मिलकर गाई।

रात पूनम की

आई पूनम की रात सुहानी, हुआ प्रफुल्लित सम्पूर्ण गगन। चांद से होगा चांदनी का मिलन, हर्षित हुई रात की रानी। स्नेह रस बरखा वसुंधरा पर, गोपियों का इंतजार हुआ खत्म, रास रचाने आए वसुदेव पुत्र, गोपियों का होगा कान्हा से मिलन।

लौट जायेंगे हम (कविता)

मन को उदास न कीजिए, जी भर के जीना सीखिए। छोड़िये उलाहना देना औरों को, बस धन्यवाद दीजिए। गुजरिए जिन राहों से होकर, प्यारा सा संदेश दीजिए। देख कर हर जन को, जरा सा मुस्करा दीजिए। उम्र का हर दौड़ बेहतरीन है, हर उम्र से कुछ सीखिए। लौट जायेंगे हम सब एक दिन, जहाँ से… Continue reading लौट जायेंगे हम (कविता)

श्रापित रावण

रावण अपने पूर्वजन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे। एक श्राप के चलते उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार- सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ‘सनकादिक’ ऋषि कहलाते थे और देवताओं के पूर्वज माने जाते थे। एक बार ये चारों ऋषि सम्पूर्ण लोकों से दूर… Continue reading श्रापित रावण

राजा ‘भर्तृहरि’

राजा भर्तृहरि प्राचीन उज्जैन के महाप्रतापी राजा और संस्कृत के महान कवि थे। संस्कृत साहित्य के इतिहास में भर्तृहरि नीतिकार के रूप में प्रसिद्ध थे। इनके शतकत्रय (नीतिशतक, शृंगारशतक, वैराग्यशतक) की उपदेशात्मक कहानियाँ भारतीय जन मानस को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। इनके प्रत्येक शतक में सौ-सौ श्लोक हैं। बाद में इन्होंने गुरु गोरखनाथ… Continue reading राजा ‘भर्तृहरि’