जिन सपनों में जीना चाही वे सपने बिखर गए दिल के अरमान अब, आंसू बन बह गए। राह कौन सी जाऊं? यह सोचकर थक गई। दुनिया की भीड़ देख, जीने की राह मिल गई।
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आत्मसम्मान (कविता)
चाहे जो भी हो जाए, आत्मसम्मान न खोने देना। भावना से यह जुड़ा शब्द है, स्वयं को यह सम्मान दिलाता। जागृत जब होता सम्मान, तब आत्मनिर्भरता आ जाता है। बिना आत्मसम्मान के, मानव नहीं बढ़ पाता है। कष्टमयी हो जाता जीना, जब आत्मसम्मान गिर जाता है। हो जब प्राणी कर्त्तव्यपरायण, वह आत्मनिर्भर बन जाता है।… Continue reading आत्मसम्मान (कविता)
जाड़े की भोर
हुई भोर जाड़े की, ओढ़ कोहरे की चादर। रवि ने खोली देर से आंखें, सोई चिरैया देख रवि को, करली अपनी आंखें बंद। ऊषा ने जब ली अंगड़ाई, तब रवि की लाली आई। मंद-मंद सुमन मुस्काई, नभ में खग ने दौड़ लगाई। धरा प्रसन्न होकर नहाई, गीत सभी ने मिलकर गाई।
रात पूनम की
आई पूनम की रात सुहानी, हुआ प्रफुल्लित सम्पूर्ण गगन। चांद से होगा चांदनी का मिलन, हर्षित हुई रात की रानी। स्नेह रस बरखा वसुंधरा पर, गोपियों का इंतजार हुआ खत्म, रास रचाने आए वसुदेव पुत्र, गोपियों का होगा कान्हा से मिलन।
लौट जायेंगे हम (कविता)
मन को उदास न कीजिए, जी भर के जीना सीखिए। छोड़िये उलाहना देना औरों को, बस धन्यवाद दीजिए। गुजरिए जिन राहों से होकर, प्यारा सा संदेश दीजिए। देख कर हर जन को, जरा सा मुस्करा दीजिए। उम्र का हर दौड़ बेहतरीन है, हर उम्र से कुछ सीखिए। लौट जायेंगे हम सब एक दिन, जहाँ से… Continue reading लौट जायेंगे हम (कविता)
श्रापित रावण
रावण अपने पूर्वजन्म में भगवान विष्णु के द्वारपाल थे। एक श्राप के चलते उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार- सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ‘सनकादिक’ ऋषि कहलाते थे और देवताओं के पूर्वज माने जाते थे। एक बार ये चारों ऋषि सम्पूर्ण लोकों से दूर… Continue reading श्रापित रावण
राजा ‘भर्तृहरि’
राजा भर्तृहरि प्राचीन उज्जैन के महाप्रतापी राजा और संस्कृत के महान कवि थे। संस्कृत साहित्य के इतिहास में भर्तृहरि नीतिकार के रूप में प्रसिद्ध थे। इनके शतकत्रय (नीतिशतक, शृंगारशतक, वैराग्यशतक) की उपदेशात्मक कहानियाँ भारतीय जन मानस को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। इनके प्रत्येक शतक में सौ-सौ श्लोक हैं। बाद में इन्होंने गुरु गोरखनाथ… Continue reading राजा ‘भर्तृहरि’
लक्ष्मी पुत्र ‘गणेश’
गणेश चतुर्दशी का त्योहार भारत के सभी राज्यों में अपने-अपने विधि अनुसार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पुरानों के अनुसार यह त्योहार गणपति बाप्पा के जन्मदिन के शुभ अवसर पर मनाया जाता है। महाराष्ट्र में ‘गणेश पूजा’ जगत प्रसिद्ध है। यह उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से लेकर अनन्त चतुर्दशी तक मनाया जाता है।… Continue reading लक्ष्मी पुत्र ‘गणेश’
जम्मू-कश्मीर : कुछ यादें
आज सत्तर वर्षो के बाद भारत पूर्णरूप से स्वतंत्र हुआ है। इस दिन का इंतजार हर भारतवासी को था और मुझे भी। मैं तो इस दिन का इंतजार तक़रीबन सैंतीस वर्षों से कर रही थी। आशा तो नहीं था कि कभी जम्मू-कश्मीर से 370 और 35A हटाया जा सकेगा लेकिन हमारे प्रधान मंत्री, गृह मंत्री… Continue reading जम्मू-कश्मीर : कुछ यादें
गुड़िया (संस्मरण)
सबसे पहले भगवान से यह प्रार्थना करती हूं कि हे! प्रभु, हे! भगवान किसी के जीवन में ऐसा दुःख नहीं देना जिससे वह उबर नहीं सके। यह भी कहा जाता है कि भगवान जब दुःख देता है तब उस दुःख से उबरने के लिए रास्ते भी वही बनाता है, या कहें कि हिम्मत भी वही… Continue reading गुड़िया (संस्मरण)
