प्रेम ना बारी उपजै प्रेम ना हाट बिकाय, राजा प्रजा जेहि रुचै, शीश देयी ले जाए। कबीरदास जी कहते है कि प्रेम ना तो खेत में पैदा होता है और ना ही बाजार में बिकता है। राजा हो या प्रजा जो भी चाहे इसे (प्रेम को) अपना सिर झुका कर अथार्त घमंड को छोड़कर प्राप्त… Continue reading दुष्यंत और शकुंतला (कहानी)
Author: इंदु सिंह
सात समन्दर पार (कहानी)
ऐसा लोग कहते हैं कि जोड़ी भगवान के घर से ही बनकर आता है। कहाँ तक सच है? हम सब को पता नहीं। एक मास्टर जी अपने परिवार के साथ शहर में रहने के लिए गए। मास्टर जी की पत्नी एक सुशील और धार्मिक विचार की महिला थी। उनके दो बेटे थे। बड़े का नाम… Continue reading सात समन्दर पार (कहानी)
वो बीते हुए दिन (कहानी)
‘प्रेम’- इस ढाई अक्षर के प्रेम शब्द को परिभाषित करना अत्यंत ही कठिन है। ‘प्रेम’ शब्द का कोई रंग, रूप या आकर नहीं होता है। इसे हम सब भावना के द्वरा ही महसूस करते हैं। प्रेम को ‘रूप’ और ‘आकर’ हम मनुष्य ही दे सकते हैं जैसे माँ-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, प्रेमी-प्रेमिका के प्रेम सम्बन्ध… Continue reading वो बीते हुए दिन (कहानी)
गुजरी महल (कहानी)
भारत के इतिहास में कई सफल और असफल प्रेमी-प्रेमिकाओं की प्रेम कहानियाँ है जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। ये प्रेम कहानियाँ सुनने में परिलोक की कथा जैसी लगती हैं। जिसमे सिर्फ सुख ही सुख होता हो दुख तो कभी आता ही नहीं है। ये प्रेम कहानियाँ इतनी आसान और इतनी सरल नहीं… Continue reading गुजरी महल (कहानी)
भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा
भारत एक प्राचीन देश है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह विभिन्ताओं में एकता का देश है। भारत में विभिन्नता का रूप केवल भौगोलिक ही नहीं बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। देश और काल के अनुसार भाषा अनेक रूपों में बटी है। यही कारण है कि भारत में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। हर… Continue reading भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा
तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’
हम सभी जानते हैं कि भारत का महान मुग़ल शासक अकबर था। अकबर स्वयं तो अधिक पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वह बुद्धिजीवियों का बहुत प्रेमी था। कहा जाता है कि अकबर के दरबार में नौ गुणवान दरबारी थे। ये सभी नवरत्न अपने-अपने क्षेत्र में प्रवीण विद्वान थे। इन्हें नवरत्न के नाम से जाना जाता… Continue reading तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’
माँ (कविता)
स्वर्ग लोक से जब आई मैं भू पर, माँ ही एक सहारा थी। माँ की गोद मुझे अब तो, सारे ब्रह्माण्ड से प्यारा थी।। ममता की एक झलक पाकर, मैं बहुत खुश हो जाती थी। उसका दूध (अमृत) पीकर हमें, नया जीवन मील जाती थी।। हम चाहे कितना भी दुःख दें, वो मेरे सुख में… Continue reading माँ (कविता)
सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
हमारे जीवन में चाहे जो भी घटनाएं घटती है। हम बिना कुछ सोचे-समझे भगवान को दोषी बना देते है। आज मैं जिस घटना की चर्चा करने जा रही हूं वह आंखों देखी है। करीब चालीस साल पहले की बात है। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक बेटा और दो बेटियाँ… Continue reading सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
परछाईं (कविता)
जबसे हमने होश सम्भाला, तब से मैं उसे देख रही हूँ कभी देखकर दुखी हो जाती, कभी देख खुश हो जाती हूँ पता नही वो कौन है? जो साथ-साथ रहती है मेरे कभी तो उससे डर जाती हूँ, कभी सोंच में पड़ जाती हूँ हिम्मत करके पूछ ही बैठी, बताओं कौन हो तुम ? क्या… Continue reading परछाईं (कविता)
ऋषि अष्टावक्र
हम हमेशा से यह सुनते आ रहे हैं कि जिस पेड़ में फल-फूल पूर्ण रूप से आता है वह पेड़ झुका हुआ रहता है अर्थात पूर्णता ही ज्ञान है। यहाँ मैं जिस कथा की चर्चा करने जा रही हूं वह त्रेता युग की घटना है और महर्षि ‘अष्टावक्र’ की कहानी है। ऋषि ‘उद्दालक’ की पुत्री… Continue reading ऋषि अष्टावक्र
