मोनालिसा (कविता)

लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर… Continue reading मोनालिसा (कविता)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

कवि जाने कविता की रीति (कविता)

कवि जाने कविता की रीति शब्दों के मन की भावों की प्रीति छंदों में उसकी गहरी रस धार अंतर्मन एहसास की पार । वर्णों की मेला, अर्थों की क्रीड़ा छुपी हुई हैं हर पंक्ति में वेदना, स्नेह, पीड़ा, और दर्द दिखाती अपनी जीवन लीला । बिंब, प्रतीक का सुंदर सुयोजन कभी व्यंग्य, कभी मधुर प्रयोजन… Continue reading कवि जाने कविता की रीति (कविता)

मिलन का दर्द (कविता)

जब तक मिली न थी उनसे, तबतक बिछड़ने का डर था साथ होने के बाद भी, दिल में गहराई का असर था। उनकी आँखों में छीपे सवाल का मौन मेरा जवाब था दोनों के बीच का सन्नाटा, ही जैसे संवाद था। थी मैं उनकी धडकन मगर मुझे उनका इंतजार था उनकी बाहों में राहत थी… Continue reading मिलन का दर्द (कविता)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. साजन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

बहुत जी ली, औरों की जिंदगी (कविता)

बहुत जी ली, औरों की जिंदगी अब अपनी जिंदगी जीती हूँ मेरा जो मन कहता है, मैं वही करती हूँ दिखावें की जिंदगी न तब जीति थी और न अब जीति हूँ बीती हुई जिंदगी को भूल नई जिंदगी जीने की कोशिश करती हूँ। कभी किसी की जीवनी, संस्मरण पढ़ने लगती हूँ, कभी-कभी कुछ लिखने… Continue reading बहुत जी ली, औरों की जिंदगी (कविता)

गजल – 1

दिल के पन्नों में यादों की कहानी लिखी, उन यादों को दिल में सहेजकर रखी। विधू ने कहा, तुमसे शिकायत कर दूं, तेरी स्मृति को हमने छिपाकर रखी। दिल की बगिया ने देखते रहे सपने तेरे, हर पल सूरत तेरी अनुरागी रखी। वेदना जो दिल में थे हमने छुपाकर रखे, पर होठों पर तेरी हँसी… Continue reading गजल – 1

गम न कर जिंदगी (कविता)

अब और न गम कर जी ले जिंदगी हर पल को अपना सनम (प्रिय) कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी कल किसने देखा है यूँ ना सिसक तू   आज की ख़ुशी को   मरहम कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी छिपा है सबक हर आँसू में डर मत जाना टूटे… Continue reading गम न कर जिंदगी (कविता)