भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्रों में से एक है। किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के विचारों, संस्कारों और कर्मों पर निर्भर करता है। आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, तब युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
समाज में अक्सर कुछ ऐसे समूह या प्रवृत्तियाँ दिखाई देती हैं जो केवल धन, भोग-विलास और तात्कालिक सुख को ही जीवन का लक्ष्य मान लेते हैं। वे शिक्षा, ज्ञान, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को महत्व नहीं देते। यदि कोई युवा वर्ग केवल धन अर्जित करने और व्यक्तिगत ऐश्वर्य में ही अपनी सफलता देखता है, तो यह प्रवृत्ति दीर्घकाल में समाज और राष्ट्र दोनों के लिए चिंताजनक हो सकती है।
धन जीवन की आवश्यकता है, परंतु धन ही जीवन का अंतिम उद्देश्य है ऐसा नहीं है। शिक्षा मनुष्य को विवेक देती है, संस्कार प्रदान करती है और उसे समाज के प्रति उत्तरदायी बनाती है। जो युवा अध्ययन, अनुसंधान, साहित्य, विज्ञान, तकनीक, कला और उद्यमिता के माध्यम से अपने कौशल को विकसित कर रहे हैं, वे वास्तव में भारत के भविष्य के निर्माता हैं। वे अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर न केवल स्वयं आगे बढ़ते हैं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान देते हैं।
आज का शिक्षित युवा स्टार्टअप स्थापित कर रहा है, नई तकनीकों का विकास कर रहा है, शोध कर रहा है, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध कर रहा है तथा विश्व मंच पर भारत का गौरव भी बढ़ा रहा है। उसके पास निरर्थक विवादों और दिखावे के लिए समय नहीं है, क्योंकि वह जानता है कि सफलता का मार्ग परिश्रम, अनुशासन और निरंतर सीखने से होकर गुजरता है।
विकसित भारत का स्वप्न केवल आर्थिक समृद्धि से पूरा नहीं होगा। इसके लिए नैतिकता, शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रीय चेतना की भी आवश्यकता है। युवा यदि अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाएँ, तो भारत विश्व का नेतृत्व कर सकता है। किंतु यदि वही ऊर्जा केवल उपभोग, प्रदर्शन और स्वार्थ में खर्च हो जाए, तो यह राष्ट्र की उन्नति में बाधा बन सकती है।
अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा धन के साथ-साथ ज्ञान को भी महत्व दें, अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझें और व्यक्तिगत सफलता के साथ राष्ट्रीय विकास को भी अपना लक्ष्य बनाएं। यही वह मार्ग है जो भारत को सशक्त, समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगा।
“युवा केवल देश का भविष्य नहीं होते, वे वर्तमान के निर्माता हैं। उनके हाथों में कल का भारत विकसित राष्ट्र होगा।”
जय हिन्द