पहले हम राही कहानी के कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को देखते है: राही कहानी इन्हीं की कहानी संग्रह ‘सीधे-साधे चित्र’ (1947) में संगृहीत है⃓ राही कहानी में सुभद्रा जी ने गरीबों के पीड़ा का वर्णन किया है। इस कहानी में उन्होंने भूख के लिए चोरी करने की मज़बूरी पर प्रकाश डाला है। इस कहानी में उन्होंने… Continue reading सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी ‘राही’
सुंदर विचार
माधवराव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’
किसी श्रीमान ज़मीदार के महल के पास एक गरीब अनाथ विधवा की झोंपड़ी थी। ज़मीदार साहब को अपने महल का हाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। विधवा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई जमाने से वहीं बसी थी। उसका प्रिय पति और एकलौता पुत्र भी उसी झोपड़ी… Continue reading माधवराव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’
राजेंद्रबाला घोष की कहानी ‘दुलाईवाली’
‘दुलाईवाली’ का अर्थ है- कपड़े का मोटा चादर जिसे नवविवाहिता औरतें घूँघट लेती है। काशी जी के दशाश्वमेध घाट पर स्नान करके एक मनुष्य बड़ी व्यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती और दूसरे में सुरती की गोलियों की कई डिबियाँ और… Continue reading राजेंद्रबाला घोष की कहानी ‘दुलाईवाली’
राजेंद्रबाला घोष की कहानी चंद्रदेव से मेरी बातें
भगवान चंद्रदेव! आपके कमलवत कोमल चरणों में इस दासी का अनेक बार प्रणाम। आज मैं आपसे दो चार बातें करने की इच्छा रखती हूँ। देखो, सुनी अनसुनी सी मत कर जाना। अपने बड़प्पन की ओर ध्यान देना। अच्छा! कहती हूँ, सुनों। मैं सुनती हूँ कि आप इस आकाश मंडल में चिरकाल से वास करते हैं।… Continue reading राजेंद्रबाला घोष की कहानी चंद्रदेव से मेरी बातें
श्री कुप्पल्ली वेंकटप्पा पुट्टप्पा ‘कुवेम्पू’व्यक्त्तित्व और एवं कृतित्व
परिचय: कुपल्ली वेंकटप्पा पुट्टप्पा ‘कुवेम्पू’, कन्नड़ साहित्य के क्षेत्र में ‘कुवेम्पू’ के नाम से विख्यात हैं। वे भारतीय कवि नाटककार, उपन्यासकार और आलोचक तथा जीवनी लेखक थे। मुख्य तौर पर उन्हें 20वीं सदी के सबसे महान कन्नड़ कवियों में से एक माना जाता है। कुवेम्पू का जन्म 20 दिसंबर 1904 ई. को चिकमगलूर के कोप्पा… Continue reading श्री कुप्पल्ली वेंकटप्पा पुट्टप्पा ‘कुवेम्पू’व्यक्त्तित्व और एवं कृतित्व
आत्मकथा की संस्कृति और दलित आत्मकथाएँ
मुझे यहाँ अदम गोंडवी की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही है- मैंने अदम गोंडवी के इन पंक्तियों में कुछ शब्द निकालकर अपनी तरफ से जोड़ी है- “आइए महसूस कीजिए जिंदगी के ताप को, मैं दलितों की बस्तियों तक ले चलूँगा आपको।” साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ समाज का सुधारक और प्रेरक भी है।… Continue reading आत्मकथा की संस्कृति और दलित आत्मकथाएँ
‘गोदान’ उपन्यास पर आधारित प्रश्नोत्तरी
1. गोदान उपन्यास का प्रकाशन वर्ष क्या है? (अ) 1935 ई. (ब) 1936 ई. (स) 1937 ई. (द) 1938 ई. 2. गोदान उपन्यास में कुल कितने प्रकरण हैं” (अ) 36 प्रकरण (ब) 37 प्रकरण (स) 38 प्रकरण (द) 39 प्रकरण 3. ‘गोदान’ उपन्यास का नायक का नाम है? (अ) मेहता (ब) राय साहब (स) गोबर… Continue reading ‘गोदान’ उपन्यास पर आधारित प्रश्नोत्तरी


