सुंदर विचार

झारखंड का साहित्य और भाषा TGT/PGT

झारखण्ड का साहित्य और भाषा: झारखंड राज्य की भाषा और वहाँ की बोली का क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। भाषा के आधार पर झारखण्ड की भाषाओं और साहित्य को तीन भागों में बाँटा गया है: 1. मुंडारी भाषा (ऑस्ट्रो एशियाटिक) परिवार 2. द्रविड़ भाषा – (द्रविडियन) परिवार 3. इंडो-आर्यन - भाषा परिवार 1. मुंडारी भाषा… Continue reading झारखंड का साहित्य और भाषा TGT/PGT

आलोचना का अर्थ, परिभाषा, स्वरुप तथा साहित्य और आलोचना के अंतःसंबंध

'आलोचना' शब्द 'लोच्' धातु से बना है, लोच् का अर्थ है देखना। अतः आलोचना का अर्थ है 'देखना'। किसी वस्तु या कृति की सम्यक् व्याख्या, उसका मूल्याङ्कन आदि करना आलोचना ही आलोचना है।         साहित्य के विश्व प्रसिद्ध आलोचक 'रोमन याकोब्सन' ने कहा था- "अगर मनुष्य ना होता, तब भी यह दुनिया होती। इसी… Continue reading आलोचना का अर्थ, परिभाषा, स्वरुप तथा साहित्य और आलोचना के अंतःसंबंध

सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास

  ईश्वर की 'सगुण' और 'साकार' रूप में विश्वास करने वाले भक्त कवियों को 'सगुण' भक्ति का नाम दिया गया है। वैष्णव भक्ति के उद्भव के साथ ही सगुण भक्तिधारा विकसित हो गई थी। भक्ति प्राचीनकालीन भारतीय वैदिक भक्ति का हि विकसित रूप है। 'सगुण' का अर्थ होता है परमसत्ता के सभी गुणों से संपन्न।… Continue reading सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास