कारक (case) के प्रकार और विभक्ति चिन्ह ‘कारक’ का अर्थ होता है- ‘करनेवाला’ जब किसी संज्ञा, सर्वनाम पद का संबंध वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों व क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते है। कारक की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध का बोध… Continue reading कारक (Case)
सुंदर विचार
‘भक्तिकाल’ – प्रश्नोत्तरी
1. ‘भक्ति' शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत की 'भज्' धातु में 'कतिन' प्रत्यय के योग से बना है, जिसका अर्थ होता है- अपने उपास्य भगवान् के ऐश्वर्य में भाग लेना।" यह मान्यता किस विद्वान की है? (अ) ग्रियर्सन (ब) मैक्समूलर (स) मोनियर विलियम्स✔ (द) गिलक्रिस्ट 2. भक्तिकाल को 'कलात्मक उत्कर्ष' का काल किस विद्वान् ने कहा… Continue reading ‘भक्तिकाल’ – प्रश्नोत्तरी
वर्णमाला और भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. भाषा की सबसे महत्वपूर्ण इकाई ध्वनि है। 2. ध्वनि के लिखित रूप को ‘वर्ण’ कहते है। 3. ‘वर्ण’ भाषिक ध्वनियों के लिखित रूप है। 4. वर्ण वह छोटी से छोटी ध्वनि है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं। जैसे- क, म, ल। 5. वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं, शब्दों के मेल… Continue reading वर्णमाला और भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
हिंदी व्याकरण ‘क्रिया’ (Verb)
क्रिया की परिभाषा- जिस शब्द से किसी कार्य को करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ… Continue reading हिंदी व्याकरण ‘क्रिया’ (Verb)
हिंदी व्याकरण ‘विशेषण’ (Adjectives)
विशेषण शब्द की व्युत्पत्ति- 'वि' (उपसर्ग) 'शाष' (धातु) और 'अन' (प्रत्यय) के मिलने से बना है। जिसका अर्थ है, 'किसी की विशेषता बताने वाला।' कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- "वे शब्द जो किसी संज्ञा के अर्थ को सीमित मर्यादित (संकुचित/संकीर्ण/सीमित/अव्याप्त) करते हैं, उन्हें विशेषण कहते है।" जैसे- 'गाय' कहने से सभी तरह के गायों का… Continue reading हिंदी व्याकरण ‘विशेषण’ (Adjectives)
हिंदी व्याकरण ‘विशेषण’ (Adjectives)
विशेषण शब्द की व्युत्पत्ति- 'वि' (उपसर्ग) 'शाष' (धातु) और 'अन' (प्रत्यय) के मिलने से बना है। जिसका अर्थ है, 'किसी की विशेषता बताने वाला।' कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- "वे शब्द जो किसी संज्ञा के अर्थ को सीमित मर्यादित (संकुचित/संकीर्ण/सीमित/अव्याप्त) करते हैं, उन्हें विशेषण कहते है।" जैसे- 'गाय' कहने से सभी तरह के गायों का… Continue reading हिंदी व्याकरण ‘विशेषण’ (Adjectives)
हिंदी व्याकरण ‘संज्ञा’ (Noun)
संज्ञा शब्द की व्युपति- ‘संज्ञा’ शब्द दो शब्दों के मेल/योग से बना है। सम् + ज्ञा ‘सम्’ का अर्थ ‘सम्यक’ (पूर्ण) और ‘ज्ञ’ का अर्थ ‘ज्ञान’ अथार्त ‘पूर्णज्ञान’ होता है। ‘संज्ञा’ शब्द का मतलब है- ‘नाम’ परिभाषा- किसी वस्तु, प्राणी, स्थान, भाव आदि के ‘नाम’ को संज्ञा कहते है। वस्तु के नाम – किताब, कलम,… Continue reading हिंदी व्याकरण ‘संज्ञा’ (Noun)
शहीदी दिवस
सवा लाख से एक लडाऊं, चिड़ियन से मैं बाज तुडाऊं तबै गुरुगोविंद सिंह नाम कहाऊं सिक्खों के दसवें गुरु, गुरुगोविंद सिंहजी के परिवार की शहादत को शत-शत नमन। गुरुगोविंद सिंह ऐसे वीर संत थे, जिनकी मिसाल दुनिया के इतिहास में कम ही मिलती है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। नानकशाही कैलेंडर… Continue reading शहीदी दिवस
शापित ‘वधू’
बात बहुत पुरानी और सत्य है। हमारे नानी के यहाँ की एक पड़ोसी की कहानी है। वैसे तो नानी के यहाँ सभी बुजुर्ग औरतें मर्द नाना-नानी और सभी नौजवान लड़का-लड़की मामा-मौसी कहलाते हैं। हमारे नानी के पड़ोसी रामशरण सिंह और उनकी पत्नी कौशल्या बहुत ही अच्छे और संस्कारी थे। उनके पाँच बच्चे थे। तीन बेटियाँ… Continue reading शापित ‘वधू’
हिन्दी व्याकरण – वर्ण विचार
वर्ण की परिभाषा: कामताप्रसाद गुरु के शब्दों में- “वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके खण्ड नहीं किए जा सकते हैं।” (क, अ, ट इसे खण्ड नहीं किया जा सकता है) आचार्य किशोरीदास वाजपेयी के अनुसार- “वर्ण वह छोटी से छोटी ध्वनि है जो कान का विषय है और जिसके टुकड़े नहीं किए जा… Continue reading हिन्दी व्याकरण – वर्ण विचार