वर्णमाला और भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. भाषा की सबसे महत्वपूर्ण इकाई ध्वनि है।

2. ध्वनि के लिखित रूप को ‘वर्ण’ कहते है।

3. ‘वर्ण’ भाषिक ध्वनियों के लिखित रूप है।

4. वर्ण वह छोटी से छोटी ध्वनि है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं। जैसे- क, म, ल। 

5. वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं, शब्दों के मेल से वाक्य तथा वाक्यों के मेल से भाषा बनती है।

6. वर्ण के दो भेद हैं- 1.स्वर वर्ण 2 व्यंजन वर्ण

7. वर्णों का प्रयोग ध्वनि चिह्नों एवं लिपि चिह्नों दोनों रूप में होता है।

8. वर्णों की व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं।

9. जिन ध्वनियों के उच्चारण करने में श्वास वायु बिना किसी रुकावट के मुख से निकलती है उन्हें ‘स्वर’ कहते है।

10. हिंदी वर्णमाला में कुल 11 (ग्यारह) स्वर हैं, जो स्वतंत्र ध्वनियाँ कहलाती हैं।

11. उच्चारण में लगनेवाले समय के आधार पर स्वर के दो भेद हैं- 1. ह्रस्व 2. दीर्ध

12. होंठों की आकृति के आधार पर स्वरों को दो वर्णों में बाँटा गया है- 1. वृत्ताकार  2. अवृत्ताकार

13. सभी स्वरों का उच्चारण दो प्रकार से होता है- पहला केवल मुख से और दूसरा मुख और नासिक दोनों से। पहले प्रकार के स्वरों को ‘निरनुनासिक’ कहते हैं और दूसरे प्रकार के स्वरों को ‘अनुनासिक’ कहते है।

14. अं को अनुस्वार कहते है और अ: को विसर्ग कहते है। ये दोनों ध्वनियाँ न तो स्वर है और न ही व्यंजन है। ये दोनों ध्वनियाँ अयोगवाह कहलाती हैं।

15. मात्राएँ स्वरों के चिह्न है, इन चिह्नों को व्यंजन के साथ लिखा जाता हैं। ‘अ’ स्वर को छोड़कर सभी के लिए मात्राएँ हैं। अतः कुल मात्राएँ- 10 (दस) हैं।

16. अनुस्वार को नासिक्य व्यंजन भी कहते है। इसका प्रयोग स्पर्श व्यंजन वर्ग के पंचमाक्षर के रूप में किया जाता है।

17. विसर्ग (:) का उच्चारण हिंदी में प्रचलित केवल संस्कृत के शब्दों में होता है। जैसे- प्रातः, अतः, दुःख, अंतःस्थ आदि।

18. अनुनासिक ध्वनि का उच्चारण नासिका एवं मुँह दोनों से होता है। इसका चिह्न चंद्रबिंदु हैं।

19. विसर्ग का उच्चारण ‘ह’ के समान होता है।

20. व्यंजन वर्णों को तीन भागों में बाँटा गया है-

    1. स्पर्श व्यंजन 2. अन्तःस्थ व्यंजन 3. उष्ण व्यंजन

21. उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन वर्णों का दो भागों में विभाजित किया जाता है-

  1. स्थान के आधार पर और 2. प्रयत्न के आधार पर।

22. प्रयत्न के आधार पर, व्यंजन वर्णों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

  1. स्वरतंत्री में श्वास के कंपन के रूप में
  2. श्वास (प्राण) की मात्रा के रूप में
  3. मुख-अवयवों द्वारा श्वास रोकने के रूप में।

23. स्वरतंत्री में श्वास के कंपन के आधार पर व्यंजन वर्णों के दो भेद हैं- 1. अघोष    2. सघोष

24. श्वास की मात्रा के आधार पर व्यंजनों के दो भेद हैं-

        1. अल्पप्राण       2. महाप्राण

25. मुख-अवयवों द्वारा श्वास के अवरोध के आधार पर व्यंजन के आठ प्रकार हैं-

1. स्पर्शी         2. संघर्षी

3. स्पर्श-संघर्षी    4. नासिक्य

5. पार्श्विक       6. प्रकंपी

6. उत्क्षिप्त       8. अर्ध-स्वर

26. एक या अधिक ध्वनियों का उच्चारण यदि एक झटके में होता हैं, तो उसे अक्षर कहते है।

27. किसी शब्द के उच्चारण में किसी अक्षर पर जो बल दिया जाता है, उसे बलाघात कहते हैं।

28. हिंदी वर्णमाला में कुल वर्ण 44 हैं। 11 स्वर है और 33 व्यंजन हैं।

29. संयुक्त व्यंजन सहित कुल मूल वर्ण 48 हैं, जिसमें 44 मूल व्यंजन और 4 संयुक्त व्यंजन हैं। अयोगवाह, द्विगुण सहित हिंदी में कुल 52 वर्ण हैं। (44 मूलवर्ण + 4 संयुक्त वर्ण + 2 द्विगुण + 2 अयोगवाह) माने गए हैं।

30. एक विशिष्ट वर्ण ‘ळ’ है, इसके जुड़ने पर अब वर्ण 53 हो गए हैं।

31. अनुस्वार (अं) का उच्चारण स्थान नासिका है।

32. विसर्ग (अः) का उच्चारण स्थान कंठ्य है।

33. ड़ ढ़ द्विगुण व्यंजन हैं। ( वर्ग में ड ढ के नीचे बिंदु नहीं लगता है।)    

34. स्वरों को स्वतंत्र ध्वनि भी कहते हैं। क्योंकि इनका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण के सहयोग से होता है।

35. व्यंजन वर्णों की संख्या 33 हैं।

36. स्पर्श व्यंजन = 25, अंतःस्थ व्यंजन = 4 तथा ऊष्ण व्यंजन भी = 4 हैं।

37. भाषा की सबसे छोटी लिखित इकाई वर्ण है।

38. भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई शब्द है।

39. शब्द-कोश की दृष्टि से संयुक्त व्यंजनों में ‘क्ष’ का स्थान ‘क’ वर्ग में ‘त्र’ का स्थान ‘त’ वर्ग में ‘ज्ञ’ का स्थान ‘च’ वर्ग में तथा ‘श्र’ का स्थान ‘श’ के बाद आएगा।      

40. अर्ध चंद्र (ऑ) स्वर का प्रयोग अंग्रेजी के शब्दों में होता है। जैसे- डॉक्टर, कॉलेज, कॉफ़ी, टॉकीज, टॉफ़ी, आदि।

जय हिंद

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