हिंदी व्याकरण ‘विशेषण’ (Adjectives)

विशेषण शब्द की व्युत्पत्ति-

‘वि’ (उपसर्ग) ‘शाष’ (धातु) और ‘अन’ (प्रत्यय) के मिलने से बना है। जिसका अर्थ है, ‘किसी की विशेषता बताने वाला।’

कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “वे शब्द जो किसी संज्ञा के अर्थ को सीमित मर्यादित (संकुचित/संकीर्ण/सीमित/अव्याप्त) करते हैं, उन्हें विशेषण कहते है।”

जैसे- ‘गाय’ कहने से सभी तरह के गायों का बोध होता है, किन्तु ‘लाल गाय’ कहने से सिर्फ लाल रंग की गाय का बोध होता है।

परिभाषा- वे शब्द को ‘संज्ञा’ या ‘सर्वनाम’ की विशेषता बताते हैं, उसे ‘विशेषण’ कहते है।

जैसे- श्याम ‘ईमानदार’ है। यहाँ श्याम की विशेषता बताया गया है। श्याम संज्ञा है और ईमानदारउसकी विशेषता है।

जैसे- वह ईमानदार है। यहाँ सर्वनाम की विशेषता बताया गया है। ‘वह’ सर्वनाम है और ‘ईमानदार’ उसकी विशेषता है।

विशेषण के भेद: विशेषण के मुख्य पाँच भेद हैं-

1. गुणवाचक विशेषण,

2. संख्यावाचक विशेषण,

3. परिमाणवाचक विशेषण,

4. संकेतवाचक/ सार्वनामिक विशेषण,

5. व्यक्तिवाचक विशेषण 

1. गुणवाचक – गुणवाचक के निम्नलिखित भेद है:

गुणबोधक, दोषबोधक, स्पर्शबोधक, स्वादबोधक, गंधबोधक कालबोधक,दिशाबोधक, दशाबोधक, आकरबोधक, अनुकृतिबोधक, अवस्थाबोधक।

गुणवाचक विशेषण परिभाषा – जिस शब्द से किसी वस्तु अथवा प्राणी के गुण, दोष, दशा, दिशा, अवस्था, आकार, आकृति, स्पर्श, स्वाद आदि का बोध कराते हैं, उसे गुणवाचक विशेषण कहते है।

गुणवाचक विशेषण के भेद निम्नलिखित हैं-

रंगबोधक विशेषण- जिस शब्द से किसी रंग का बोध हो उसे उन्हें रंगबोधक विशेषण कहते है।

जैसे- लाल कपड़ा, नीलाआकाश, पीला आम आदि।

गुणबोधक विशेषण- गुण का बोध कराने वाले शब्द को ‘गुणबोधक’ विशेषण कहलाता है।

जैसे- राम अच्छा लड़का है, वह भला आदमी है, सीमा सुन्दर है, श्याम दयालु है, कमल परिश्रमी है अदि।

दोषबोधक विशेषण- दोष का बोध करानेवाले शब्द को दोषबोधक विशेषण कहते है। जैसे- आलसी, बेईमान, झगडालू, कंजूस आदि।  

स्पर्शबोधक विशेषण- स्पर्श का बोध करानेवाले शब्द को स्पर्शबोधक विशेषण कहते है। जैसे- कोमल, कठोर, मुलायम, चिकना, गर्म, ठंडा आदि।

गंधबोधक विशेषण- गंध का बोध कराने वाले शब्द को गंधबोधक विशेषण कहते है। जैसे- बदबूदार, खुशबू, दुर्गन्ध, सुगंध आदि। 

कालबोधक विशेषण- जिस शब्द से काल / समय का बोध हो उसे ‘कालबोधक’ शब्द कहते है।

जैसे- प्राचीन मंदिर, नूतन, नवीन, नया, पुराना, अर्वाचीन आदि 

दिशाबोधक विशेषण- दिशा की बोध कराने वाले शब्द को दिशाबोधक विशेषण कहते है।

जैसे- पूर्वी भारत, पश्चिमी राजस्थान, उत्तरी भारत, दक्षिणी भारत आदि। 

स्वादबोधक विशेषण- जिस शब्द से स्वाद संबंधी विशेषता प्रकट होती है, उसे स्वादबोधक विशेषण कहते है।

जैसे-  मीठा आम, खट्टी इमली, कड़वा करेला, तीखी मिर्ची, खारा पानी आदि।

आकारबोधक विशेषण-  आकार का बोध कराने वाले शब्द को आकारबोधक विशेषण कहलाता है।

जैसे- मोटा मानुष्य, छड़ी पतला है, ताड़ का पेड़ लम्बा है, मेज चौड़ा है। आदि

आकृतिबोधक विशेषण- जिन शब्दों से किसी की आकृति का बोध हो रहा हो उसे आकृतिबोधक विशेषण कहते है।

जैसे- खेत आयताकार है, वह कमरा गोलाकार है, लकड़ी बेलनाकार है, मैदान चौकोर है आदि। 

अवस्थाबोधक विशेषण- ठोस, तरल, गैसीय (वृद्ध, बालक, किशोर प्रौढ़ ये चारों शब्द अकेले होने पर जातिवाचक संज्ञा होगा) तथा संज्ञा सर्वनाम की विशेषता बताने पर अवस्थावाचक विशेषण होगा। 

दशाबोधक विशेषण- जिस शब्द से दशा का बोध हो उसे दशाबोधक विशेषण कहते है। जैसे- राम अमीर है, सोहन गरीब है, वह निरोग है, लड़की स्वस्थ्य है आदि।

2. संख्यावाचक विशेषण – वे शब्द जो गणनीय संज्ञाओं की संख्या का बोध कराते हो, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- चार व्यक्ति, दस लोग, अनेकों व्यक्ति आदि।   

संख्यावाचक विशेषण के दो भेद है:

(i) निश्चित संख्यावाचक विशेषण

(ii) अनिश्चिय संख्यावाचक विशेषण

(i) निश्चित संख्यावाचक विशेषण- वे शब्द जो किसी गणनीय संज्ञा की निश्चित संख्या का बोध कराते हैं, उसे निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- पचास जानवर, बीस आदमी, दस लड़के आदि।

(ii) अनिश्चिय संख्यावाचक विशेषण- वे शब्द जो किसी गणनीय संज्ञा की अनिश्चित संख्या का बोध कराता है, उसे उसे अनिश्चिय संख्यावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- कुछ व्यक्ति. अनेक पशु-पंक्षी, लगभग पंद्रह लोग आदि। लगभग हजारों गायें आदि।

निश्चित संख्यावाचक विशेषण के मुख्य दो भेद है

(i) पूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (पूर्णांक)  

(ii) अपूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (अपूर्णांक)

(i) पूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (पूर्णांक)- वह निश्चित संख्यावाचक विशेषण जो बिना दशमलव या भिन्न में आये वे गणनीय संज्ञा की विशेषण कहलाती है।

जैसे- दस व्यक्ति, सौ आदमी आदि।

(ii) अपूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (अपूर्णांक)- वह निश्चित संख्या जो दशमलव या भिन्न में आकर किसी गणनीय संज्ञा कि विशेषता बताते है, उसे अपूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- ढ़ाई रुपया, सवा सौ लोग, पौने तीन रुपया, एक चौथाई, दो तिहाई आदि।

(i) पूर्णनिश्चित संख्यावाचक विशेषण के 7 भेद हैं:

क्रमवाचक विशेषण, गणनावाचक विशेषण, विप्सावाचक विशेषण, समुदायवाचक विशेषण, आवृत्तिवाचक विशेषण, संग्रहवाचक विशेषण, प्रत्येकबोधक/भिन्नतावाचक विशेषण।

(क) क्रमवाचक विशेषण- वे निश्चित संख्यावाची शब्द जो किसी स्थान के क्रम का बोध कराते हैं, उसे क्रमवाचक विशेषण कहते है। जैसे- प्रथम, पहला, द्वितीय, दूसरा, तृतीय, तीसरा, चतुर्थ, चौथा आदि।

(ख) गणनावाचक विशेषण- वे निश्चित संख्यावाची शब्द जो किसी गणनीय संज्ञा की गिनती या संख्या का बोध कराते है, उसे गणनावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- दो सौ रूपये, एक हजार लोग, बीस हजार व्यक्ति आदि।

(ग) विप्सावाचक विशेषण- यदि एक ही निश्चित संख्या किसी गणनीय संज्ञा से दो बार आकर उसकी विशेषता बताए तो उसे विप्सावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- दो-दो व्यक्ति, तीन-तीन व्यक्ति, पाँच-पाँच पुस्तकें, सौ-सौ रुपये आदि।

(घ) समुदायवाचक/समुच्चयवाचक विशेषण- वे शब्द जिनसे निश्चित संख्याओं के समूह का बोध हो उसे समुदाय या समुच्चय वाचक विशेषण कहते है।

जैसे- सतसई, एक दर्जन पुस्तक (12), आधा दर्जन पेंसिल (6), एक गुरस अभ्यास पुस्तिका  आदि।

(ङ) आवृत्तिवाचक विशेषण- जिनसे संख्याओं कि आवृति का बोध हो या यदि किसी निश्चित संख्या में गुना, गुने, गुनी शब्द आ जाए तथा वह किसी गणनीय संज्ञा से पहले आये उसे उसे  आवृतिवाचक विशेषण कहते है।

जैसे- दो गुना रुपये, चौगुना कमरे आदि।

(च) संग्रहवाचक विशेषण- वे निश्चित संख्यावाची शब्द जिनसे गणनीय संज्ञाओं के संपूर्ण संग्रह का बोध हो, उसे संग्रहवाचक विशेषण कहते है। 

जैसे- जितने भी थे वे सारे चले गए, वे तीनों उतीर्ण हो गए, वे चारों चले गए आदि 

(छ) प्रत्येकबोधक/ भिन्नतावाचक विशेषण- वे संख्यावाची शब्द जो विशेष्य की प्रति एक संख्या/विशेषता का बोध कराते हैं, उन्हें प्रत्येक बोधक/भिन्नतावाचक विशेषण कहते है।

जैसे- हर दिन, प्रत्येक व्यक्ति आदि।

3. परिमाणवाचक विशेषण – वे शब्द जिनसे अगणनीय संज्ञाओं के परिमाण का अथार्त मात्रा का बोध होता हैं, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।

कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- अगणनीय संज्ञाओं के माप/नाप/तौल को बताने वाले शब्द को परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है।”  

परिमाणवाचक विशेषण परिभासा – जिस शब्द से वस्तुओं के नाप-तोल का बोध होता है उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते है।

जैसे- एक तोला सोना, पाँच किलो चावल, दो किलो दूध, दस लीटर पानी आदि।

परिमाणवाचक विशेषण के मुख्य दो भेद है:

(i) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण

(ii) अनिश्चित निश्चित विशेषण

(i) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण- वे शब्द जो अगणनीय संज्ञाओं के निश्चित परिणाम का बोध कराते हैं, उसे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते है। बीस किलो चावल, दस लीटर दूध, दो गज जमीन, पाँच मीटर कपड़ा आदि। निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते है।

(ii) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण- वे शब्द जो अगणनीय संज्ञाओं के अनिश्चित परिणाम अथार्त मात्र का बोध कराते हैं, उन्हें अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते है। जैसे- तीन-चार लीटर पानी, चार-पाँच मीटर कपड़ा, थोड़ा चाय, बहुत दूध, थोड़ा सा चावल  आदि।

4. संकेतवाचक/ सार्वनामिक विशेषण- जो शब्द सर्वनाम होते हुए भी किसी संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता को बताये या प्रकट करे, उसे संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-

वह नौकर नहीं आया।

यह हाथी बड़ा है। 

वह घोड़ा अच्छा है।

उपरोक्त वाक्य में ‘नौकर’, ‘हाथी’ और ‘घोड़ा’ संज्ञाओं के पहले विशेषण के रूप में आया है ‘वह’ ‘यह’ और ‘वह’ ये तीनों सर्वनाम हैं। अतः ये सार्वनामिक विशेषण हैं।

सार्वनामिक विशेषण के दो भेद हैं

(i) मौलिक सार्वनामिक विशेषण

(ii) यौगिक सार्वनामिक विशेषण

(i) मौलिक सार्वनामिक विशेषण- जो शब्द अपने मूल रूप में संज्ञा के आगे लगकर संज्ञा की विशेषता बताते हैं, उसे मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे- ‘यह’, घर, ‘वह’ लड़का,’ ‘कुछ’ काम आदि।

उपर्युक्त वाक्य में यह, वह और कुछ शब्द मूल या मौलिक सार्वनामिक विशेषण हैं।

(ii) यौगिक सार्वनामिक विशेषण- जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते हैं, उसे यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

जैसे- ऐसा आदमी कहाँ मिलेगा? कैसा घर तुम्हें चाहिए? मुझसे इतना बोझ उठाया नहीं जाता आदि।

उपर्युक्त वाक्यों में ऐसा, कितने और इतना यौगिक सार्वनामिक विशेषण हैं। यौगिक सार्वनामिक विशेषण निम्नलिखित सार्वनामिक विशेषण से बनते हैं। जैसे-

यह से- इतना इतने इतनी ऐसा ऐसी ऐसे।

वह से- उतना, उतने, उतनी, वैसा, वैसी वैसे।

जो से- जितना, जीतनी, जितने, जैसा, जैसी जैसे।

कौन से- कितना, कितनी कितने, कैसा किसी, कैसे।

संकेतवाचक विशेषण जो सर्वनाम संकेत द्वारा संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं वे संकेतवाचक विशेषण सर्वनाम की विशेषता कहलाते हैं।

विशेष- क्योंकि संकेतवाचक विशेषण सर्वनाम शब्दों से बनते हैं, अतः ये सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। इन्हें निर्देशक भी कहते हैं।

संज्ञा शब्दों से विशेषण शब्द की रचना-

संज्ञा    से  विशेषण

अर्थ             आर्थिक

अंक         अंकित

आदि        आदिम

इतिहास      ऐतिहासिक

उदासी       उदास

कलंक       कलंकित

काँटा        कँटीला

कुसुम       कुसुमित

गुलाब       गुलाबी

जटा         जटिल

ठण्ड         ठण्डा

तीन         तीसरा

दो          दूसरा

नीति        नैतिक

नास्ति       नास्तिक

धन         धनि, धनवान

पुराण        पौराणिक

प्रातःकाल     प्रातःकालीन

बनारस       बनारसी

मिठास       मीठा

मास         मासिक

मद         मादक

आलस्य      आलसी

अवलम्ब     अवलम्बित

पीड़ा         पीड़ित

पंजाब        पंजाबी

बल         बली, बलवान

यज्ञ         याज्ञिक

राष्ट्र         राष्ट्रीय

जय हिंद

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