संधि शब्द का अर्थ है- ‘मेल’। ‘संधि’ संस्कृत का शब्द है।
संधि का व्युत्पति- यह दो शब्दों के योग से बना है। सम् + धि = ‘सम्’ का अर्थ होता है, ‘पूर्णतया’ और ‘धि’ का अर्थ होता है, ‘मिलना’ अथार्त दो ध्वनियों या वर्णों का पूर्णतया मिलना ‘संधि’ कहलाता है।
दूसरे शब्दों में कहे तो, जब दो या दो से अधिक शब्दों अथवा शब्दांशों को मिलाकर नया शब्द बनाया जाता है, तब निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल के कारण कुछ परिवर्तन अथवा विकार उत्पन्न होता है। अतः निकटतम ध्वनियों के मध्य होने वाले मेल को ही ‘संधि’ कहते हैं। जैसे-
1. विद्या + आलय = विद्यालय
2. रमा + ईश = रमेश
3. जगत् + नाथ = जगन्नाथ
4. सु + आगत = स्वागत
5. दिक् + गज = दिग्गज
6. षट् + आनन = षडानन
7. निः + छल = निश्छल (विकार उत्पन्न होना ही संधि है।)
1. पं. कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “दो निर्दिष्ट अक्षरों में आस-पास आने के कारण उनके मेल से जो विकार होता है, उसे संधि कहते हैं।”
संधि विच्छेद- संधि के नियमानुसार मिले हुए वर्णों को अलग-अलग करके संधि से पहले की स्थिति में पहुँचा दिया जाए तो उसे संधि विच्छेद कहते है। जैसे-
1. विद्यालय = विद्या + आलय (आ + आ = आ)
2. सदैव = सदा + एव (आ + ए = ऐ)
3. नरेश = नर + ईश (अ + ई = ए)
संधि और संयोग में अंतर:
संयोग में वर्णों का मेल होता है, पर उसमें परिवर्तन नहीं होता है। पर संधि के कारण वर्णों में परिवर्तन हो जाता है, जैसे-
संयोग:
1. सज्जन + ता = सज्जनता
2. मनुष्य + ता = मनुष्यता
3. पशु + त्व = पशुत्व
5. मधुर + ता = मधुरता
संधि:
1. शिव + आलय = शिवालय
2. दु: + गम = दुर्गम
3. जगत + नाथ = जगन्नाथ
संधि के तीन भेद होते है-
1. स्वर संधि 2. व्यंजन संधि 3. विसर्ग संधि।
1. स्वर संधि: दो स्वरों का परस्पर मेल होने से किसी एक स्वर या दोनों स्वरों में जो परिवर्तन होता है, वह स्वर संधि कहलाता है। जैसे- कपि + ईश = कपिश, महा + आत्मा = महात्मा, भानु + उदय = भानूदय आदि।
‘स्वर संधियों’ में किस-किस प्रकार के स्वर परस्पर निकट आकर किस-किस प्रकार से परिवर्तित होते हैं इस आधार पर इसके निम्नलिखित भेद है-
स्वर संधि के भेद: स्वर संधि के निम्न पाँच भेद है:
1. दीर्घ स्वर संधि, 2. गुण स्वर संधि, 3. वृद्धि स्वर संधि, 4. यण् स्वर संधि,
5. अयादि स्वर संधि
1. दीर्घ स्वर संधि:
जब‘ह्रस्व’ या ‘दीर्घ’ अ, इ तथा उ उसी प्रकार के ह्रस्व या दीर्घ से मिलते हैं तो सवर्ण (उसी वर्ण का) दीर्घ स्वर हो जाता है।
दीर्घ संधि के नियम:
ह्रस्व या दीर्घ + उसी वर्ण का ह्रस्व या दीर्घ स्वर = उसी वर्ग का दीर्घ स्वर
उदाहरण:
अ + अ = आ
अस्त + अचल = अस्ताचल
अंध + अनुकरण = अँधानुकरण
अद्य + अवधी = अद्यवधि
अधिक + अंश = अधिकांश
अपर + अह्न = अपराह्न
अभय + अरण्य = अभ्यारण्य
आप + अंग = अपंग
अक्ष + अंश = अक्षांश
अर + अवली अरावली
अधिक + अधिक = अधिकधिक
अंत्या + अक्षरी अंत्याक्षरी
उप + अध्याय = उपाध्याय
उप + अर्जन = उपार्जन
उत्तर + अर्ध = उत्तरार्ध
ऊर्ध्व + अधर = उर्ध्वाधर
उदय + अचल = उदयाचल
उत्तम + अंग = उत्तमांग
ऊह + अपोह = ऊहापोह
एक + अंत = एकांत
कल्याण + अर्थ = कल्याणार्थ
क्रम + अंक = क्रमांक
क्वथन + अंक = क्वथ्नांक
केशव + अरि = केश्वारि (कृष्ण)
काम + यानी = कामायनी
कोमल + अंगी = कोमलांगी
काम + अरि = कामारि (शंकर)
कास (खाँसी) + अमृत = कासमृत
कीट + अणु = कीटाणु
गमन + आगमन = गमनागमन
ग्राम + अंचल = ग्रामांचल
गीत + अवली = गीतावली
गीत + अंजलि = गीतांजलि (1987)
चरण + अमृत = चरणामृत
छिद्र + अंवेषी = छिद्रान्वेषी
जन्म + अंतर = जन्मांतर
जीव + अश्म (पत्थर) = जीवाश्म
जठर + अग्नि = जठराग्नि
जन + अर्दन = जनार्दन
ज्ञान + अर्थ = ज्ञानार्थ
त्रिपुर + अरि = त्रिपुरारि
तीर्थ + अटन = तीर्थाटन
तील + अंजलि = तिलांजलि
त्रिगुण + अतीत = त्रिगुणातीत
दंडक + अरण्य = दंडकारण्य
दर्शन + अर्थी = दर्शनार्थी
दाव + अनल = दावानल (2013)
विंध्य + अचल = विंध्याचल
श्वेत + अंबर = श्वेतांबर
नील + अंचल = नीलांचल
नील + अंबुज = नीलांबुज
चर + आचार = चराचर
मृग + अंग = मृगांक (चंद्रमा)
हिमाद्रि + अद्रि = हिमाद्रि (हिमालय)
दीप + अवली = दीपावली
शह + अनुभूति = सहानुभूति
वीर + अंगना = वीरांगना (वीर की पत्नी)
राम + अयन = रामायण
नार + अयन = नारायण
राम + अवतार = रामावतार
रक्त + अंबुज = रक्तांबुज
रस + अयन = रसायन
पर + अधीन = पराधीन
मध्य + अवधि = मध्यावधि
पूर्ण + अंक = पूर्णांक
स्वर्ण + अक्षर = स्वर्णाक्षर
पुष्प + अवली = पुष्पावाली
सूर्य + अस्त = सूर्यास्त
राष्ट्र + अध्यक्ष = राष्ट्राध्यक्ष
स्व + अभिमान = स्वाभिमान
स्व + अध्याय = स्वाध्याय
परि + अटक = पर्यटक
रत्न + अवली = रत्नावाकी
परम + अणु = परमाणु
परम + अर्थ = परमार्थ (RAS- 1994)
देश + अंतर = देशांतर
चरण + अमृत = चरणामृत
सहस्त्र + अब्दी = सहस्त्राब्दी
हिम + अंशु = हिमांशु
जीव + अश्म = जीवाश्म
प्र + अर्थी = प्रार्थी
प्र + अंत = प्रांत
देह + अंत = देहांत
नियम: अ + आ = आ
उदाहरण:
अल्प + आयु = अल्पायु
आर्य + आवर्त =आर्यावर्त
आयुध + आगार = आतुधागार
उच्च +आशय = उच्चाशय
एक + आनन = एकानन
कार्य +आलय = कार्यालय
कुश + आसन = कुशासन
खग +आश्रय = खागाश्रय
गर्भ + आधान = गर्भाधान
गज + आनन = गजानन (बहुब्रीहि समास)
घन + आनन्द = घनानन्द
गुरुत्व + आकर्षण = गुरुत्वाकर्षण
चिर + आयु = चिराय
चरण + आयुध = चरणायुध
छात्र + आवास = छात्रावास
जन + आश्रय = जनाश्रय
जल + आशय = जलाशय
तमस + आच्छन्न = तमसाच्छन्न
तुषार + आवृत = तुषारावृत
दूत + आवास = दूतावास
देव + आगम = देवागम
द्रौण + आचार = द्रौणाचार्य
धर्म + आत्मा = धर्मात्मा
धूम + आच्छादित = धूमाच्छि
नख + आयुध = नखायुध
नित्य + आनंद = नित्यानंद
पत्र + आचार = पत्राचार
पद + आक्रांत = पदाक्रांत
प्राण + आयाम = प्राणायाम
प्र + आरंभ = प्रारंभ
फल + आहार = फलाहार
फल + आकांक्षा = फलाकांक्षा
बद्ध +अंजलि = बद्धांजलि (हाथ जोड़ना)
भय + आक्रांत = भयाक्रांत
भय + आनक = भयानक
भद्र + आसन = भद्रासन
मित + आहार = मिताहार
मेघ + आलय =मेघालय
यात + आयात = यातायात
योग + आचार = योगाचार
रस + आभास = रसाभास
रस + आत्मक = रसात्मक
विरह + आतुर = विरहातुर
वृत्त + आकर = वृत्ताकार
वृद्ध + आश्रम = वृद्धाश्रम
शत + आयु = शतायु
श्लोक + आबद्ध = श्लोकाबद्ध
शाक + आहारी = शाकाहारी
शस्त्र + आगार = शस्त्रागार
शुभ + आरंभ = शुभारंभ
सत्य + आग्रह = सत्याग्रह
संकट + आपन्न = संकटापन्न
संगीत + आत्मक = संगीतात्मक
सिह + आसन = सिंहासन
हिम + आलय = हिमालय
हिम + आगम = हिमागम
हिम + अंचल + हिमांचल
हास्य + आस्पद = हास्यास्पद
नियम: आ + अ = आ
उदाहरण:
आज्ञा + अनुपालन = आज्ञानुपालन
कविता + अवली = कवितावली
कक्षा + अध्यापक = कक्षाध्यापक
क्रिया + अन्वयन = क्रियान्वयन
जिह्वा + अग्र = जिह्वाग्र
तथा + अपि = तथापि
दंत + अवली = दंतावली
द्राक्षा + अवलेह = द्राक्षावलेह
द्राक्षा + अरिष्ट = द्राक्षारिष्ट
धारा + अधीश = धाराधीश
परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
पुरा + अवशेष = पुरावशेष
पुरा + अवतंश = पुरावतंश
माया + अधीन = मायाधीन
महा + अर्क = महार्क
महा + अमात्य = महामात्य
युवा + अवस्था = युवास्था
रेखा + अंकित = रेखांकित
विद्या + अर्थी = विद्दार्थी
विद्या + अर्जन = विद्यार्जन
श्रद्धा + अंजली = श्रद्धांजलि
शिक्षा + अर्थी = शिक्षार्थी
सभा + अध्यक्ष = सभाध्यक्ष
सीमा + अंत = सीमांत
सुधा + अंशु = सुधांशु
सत्ता + अतरंग = सत्तांतरण
नियम: आ + आ = आ
उदाहरण:
आत्मा + नन्द = आत्मानंद
क्रिया + आत्मक = क्रियात्मक
कारा + आगार = कारागार
कारा + आवास = कारावास
कृपा + आचार्य = क्रिपाचार्य
कृपा + आलु = कृपालु
कृपा + आकांक्षी = कृपाकांक्षी
महा + आशय = महाशय
गदा + आघात = अदाघात
चिंता + आतुर = चिंतातुर
चिकित्सा + आलय = चिकित्सालय
द्राक्षा + आसव = द्राक्षासव
निशा + आनन = निशानन
प्रेक्षा + आगार = प्रेक्षागार
प्रेरणा + आस्पद = प्रेरणास्पद
भाषा + आबद्ध = भाषाबद्ध
महा + आशय = महाशय
महा + आत्मा = महात्मा
रचना + आत्मक = रचनात्मक
विद्या + आश्रम = विद्याश्रम
वार्ता + आलय = वार्तालाप
विद्या + आलय = विद्यालय
श्रद्धा + आलु = श्रद्धालु
शंका + आलु = शंकालु
स्वेच्छा + आचारी = स्वेच्छाचारी
क्षुधा + आतुर = क्षुधातुर
नियम: इ + इ = ई
उदाहरण:
अति + इत = अतीत
अति + इंद्रिय = अतींद्रिय
अभि + इष्ट = अभीष्ट
मुनि + इंद्र = मुनींद्र
कवि + इंद्र = कवीन्द्र
गिरि + इंद्र = गिरींद्र
प्रति + इक = प्रतीक
प्रति + इति = प्रतीति
प्राप्ति + इच्छा = प्राप्तीच्छा
मुनि + इंद्र = मुनींद्र
मणि + इंद्र = मणीन्द्र
योगी + इंद्र = योगींद्र
रवि + इंद्र = रवीन्द्र
सुधि + इंद्र = सुधींद्र
हरि + इच्छा = हरीच्छा
नियम: इ + ई = ई
उदाहरण:
अभी + इप्सा = अभीप्सा (इच्छा) PSI, 1998
अधी + इक्षक = अधीक्षक
अधि + ईक्षण = अधीक्षण
अधि + ईश्वर = अधीश्वर
अभि + ईप्सा = अभीप्सा
कपि + ईश्वर = कपीश्वर
कवि + ईश = कवीश
कवि + ईश्वर = कवीश्वर
गिरि + ईश = गिरीश
परि + ईक्षक + परीक्षक
परि + ईक्षण + परीक्षण
प्रति + ईक्षा = प्रतीक्षा
मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर
वि + ईक्षक = वीक्षक
वि + ईप्सा = वीप्सा
वारि + ईश = वारीश
वि + ईक्षण = वीक्षण
हरि + ईश = हरीश
क्षिति + ईश = क्षितीज
नियन: ई + इ = ई
उदाहरण:
देवी + इच्छा = देविच्छा
नदी + इंद्र = नदींद्र
नारी + इच्छा = नारीच्छा
फणी + इंद्र = फणींद्र (शेषनाग)
मही + इंद्र = महींद्र
महत्ती + इच्छा = महत्तीच्छा
यती + इंद्र = यतींद्र
रथी + इंद्र = रथींद्र
लक्ष्मी + इच्छा = लक्ष्मीच्छा
हिंदी + इतर = हिंदीतर
शची + इंद्र = शचींद्र
सती + इंद्र = सतींद्र
सुधि + इंद्र = सुधींद्र
स्त्री + इतर (अन्य) = स्त्रीत्व
नियम: ई + ई = ई
उदाहरण:
गौरी + ईश = गौरीश
जानकी + ईश = जानकीश
नारी + ईश्वर = नारीश्वर
नदी + ईश्वर = नदीश्वर
नारी + ईप्सा = नारीप्सा
फणी + ईश्वर = फणीश्वर (शेषनाग)
पृथ्वी + ईश = पृथ्वीश
पृथ्वी + ईश्वर पृथ्वीश्वर
भारती + ईश्वर भारतीश्वर
मही + ईश = महीश
मही + ईश्वर महीश्वर
रजनी + ईश्वर = रजनीश्वर
लक्ष्मी + ईश लक्ष्मीश
श्री + ईश = श्रीश (विष्णु)
सती + ईश = सतीश (शिव)
(ग) उ / ऊ + उ / ऊ = ऊ
नियम: उ + उ + ऊ
उदाहरण:
अनु + उदित = अनूदित
अनु + उत्तर = अनूत्तर (बाद में दिया गया उत्तर, संधि )
अन् + उत्तर = अनुत्तर (उत्तर से रहित, संयोग)
कटु + उक्ति = कटूक्ति
गुरु + उपदेश = गुरूपदेश
बहु + उपयोगी = बहुपयोगी
बहु + उद्देश्यीय = बहूद्देश्यीय
भानु + उदय = भानूदय
मंजु + उषा = मंजूषा
मधु + उत्सव = मधूत्सव
मधु + उपयोग = मधूपयोग
मृत्यु + उपरांत = मृत्युपरांत
लघु + उत्तर = लघुत्तर
लघु + उत्तम = लघुत्तम
वस्तु + उत्प्रेक्षा = वस्तूत्प्रेक्षा
विष्णु + उपासना = विष्णूपासना
विधु + उदय = विधूदय
सु + उक्ति + सूक्ति
नियम: उ + ऊ = ऊ
उदाहरण:
धातु + ऊष्मा = धातूष्मा
बहु + ऊर्जा = बहूर्जा
बहु + उर्ध्व = बहूर्ध्व
मधु + ऊधर्मि = मधूर्मि
लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
सिंधु + ऊर्मि = सिंधूर्मि
विभु + ऊर्ध्व = विभूर्ध्व
नियम: ऊ + उ = ऊ
उदाहरण:
चमू + उत्तम = चमूत्तम
चमू + उत्साह = चमूत्साह
भू + उपरि = भूपरि
भू + उद्धार = भूद्धार
भू + उल्लंघन = भूल्लंघन
वधू + उत्सव = वधूत्सव
वधू + उक्ति = वधूक्ति
वधू + उल्लास = वधूल्लास
वधू + उपालंब = वधूपालंब
नियम: ऊ + ऊ = ऊ
उदहारण:
सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि
भू + ऊर्जा = भूर्जा
भू + ऊष्मा = भूष्मा
भू + ऊर्घ्व = भूर्ध्व
भू + ऊर्जित = भुर्जित
भू + ऊर्ध्व = भ्रूर्ध्व (‘भू’ का ऊँचा उठा हुआ भाग)
वधू + ऊर्मि वधूर्मि
चमू + ऊर्जा = चमूर्जा
2. गुण स्वर संधि: अ/आ स्वरों के बाद यदि ह्र्स्व या दीर्घ इ, उ या ऋ स्वर आते हैं तो दोनों के स्थान पर क्रमशः ए, ओ तथा ‘अर्’ हो जाता है। इसी को गुण संधि कहते हैं। जैसे-
(क) अ / आ + इ / ई = ए
(ख) अ / आ + उ / ऊ = ओ
(ग) अ / आ + ऋ = ‘अर्’
(क) अ / आ + इ / ई = ए
नियम: अ + इ = ए
उदाहरण:
अल्प + इच्छा = अल्पेक्षा
अंत्य + इष्टि = अंतेष्टि
इतर + इतर = इतरेतर
उप + इंद्र = उपेंद्र
कर्म + इंद्रिय = कर्मेंद्रिय
कृष्ण + इंद्र = कृष्णेंद्र
खग + इंद्र = खगेंद्र
गज + इंद्र = गजेंद्र
गोप + इंद्र = गोपेंद्र
घ्राण + इंद्रिय = घ्राणेद्रिंय
जित + इंद्रिय =जितेंद्रिय
दनुज + इंद्र = दनुजेंद्र
देव + इंद्र + देवेंद्र
न + इष्ट = नेष्ट
नर + इंद्र = नरेंद्र
नृप + इंद्र = नृपेंद्र
नग + इंद्र = नगेंद्र
पूर्ण + इंदु = पूर्णेंदु
पूर्ण + इंद्र = पूर्णेंद्र
बाल + इंदु = बालेंदु
भारत + इंदु = भारतेंदु
भारत + इंद्र = भारतेंद्र
भुजंग + इंद्र = भुजगेंदु
मतस्य + इंद्र = मत्स्येंद्र
मानव + इतर = मानवेतर
मृग + इंद्र = मृगेंद्र
योग + इंद्र = योगेंद्र
सत्य + इंद्र = सत्येंद्र
स्व + इच्छा = स्वेच्छा
हित + इच्छा = हितेच्छा
नियम: अ + ई = ए
उदाहरण:
अप + ईक्षा = अपेक्षा
अंक + ईक्षक = अंकेक्षण
अंकन + ईक्षण = अंकेक्षण
आनंद + ईश्वर = आनंदेश्वर
उप + ईक्षा = उपेक्षा
एक + ईश्वर = एकेश्वर
खग + ईश = खगेश
गज + ईश = गजेश
गोप + ईश = गोपेश (श्री कृष्ण)
गण + ईश = गणेश
जीव + ईश = जीवेश
ज्ञान + ईश = ज्ञानेश
थान + ईश्वर = थानेश्वर
तप + ईश्वर = तपेश्वर
तारक + ईश्वर = तारकेश्वर
देव + ईश = देवेश
दिन + ईश = दिनेश
नर + ईश = नरेश
धन + ईश = धनेश
परम + ईश्वर = परमेश्वर
परम + ईश = परमेश
प्र + ईक्षक = प्रेक्षक
प्र + ईक्षा = प्रेक्षा
प्राण + ईश्वरी = प्राणेश्वरी
प्राण + ईश = प्राणेश
ब्रज + ईश = ब्रजेश
भव + ईश = भवेश
भुवन + ईश्वर भुवनेश्वर
भूत + ईश्वर = भूतेश्वर
योग + ईश्वर = योगेश्वर
राज + ईश = राजेश
राम + ईश = रामेश्वर
विमल + ईश = विमलेश
सर्व + ईश = सर्वेश
सिद्ध + ईश्वरी = सिद्धेश्वरी
स्व + ईरिणी = स्वैरिणी (नदी)
नियम: आ + इ = ए
उदाहरण:
महा + इंद्र = महेंद्र
यथा + इष्ट = यथेष्ट
रमा + इंद्र = रमेंद्र
राका + इंदु = राकेंदु
राजा + इंद्र = राजेन्द्र
रसना + इंद्रिय = रसेंद्रिय
सुधा + इंदु = सुधेंदु
नियम: आ + ई = ए
उदाहरण:
अलका + ईश = अलकेश (इंद्रपुरी)
उमा + ईश = उमेश
कमला + ईश = कमलेश
गुडाका + ईश = गुडाकेश (शिव, अर्जुन)
ऋषिका + ईश = ऋषिकेश
महा + ईश्वर = महेश्वर
महा + ईश = महेश
लंका + ईश = लंकेश
रमा + ईश = रमेश
राका + ईश = राकेश
(ख) अ / आ + उ / ऊ = ओ
नियम: अ + उ = ओ
उदाहरण:
अतिशय + उक्ति = अतिशयोक्ति
अवसर + उचित = अवसरोचित
अछूत + उद्धार = अवछूतोद्धार
अनान्य + उपाय = अनान्योपाय
अंत्य + उदय = अंत्योदय
अन्य + उक्ति = अन्योक्ति
आनंद + उत्सव = आनंदोत्सव
आनंद + उत्कर्ष = आनंदोत्कर्ष
आद्य + उपांत = आद्योपांत
आद्य + उपरांत आद्योपरांत
ईश + उपनिषद् = ईशोपनिषद्
उत्तर + उत्तर = उत्तरोत्तर
कथ + उपकथन = कथोपकथन
कठ + उपनिषद् = कठोपनिषद
कर्ण + उचित = कर्णोचित
कर्म + उन्मुख = कर्मोन्मुख
क्रम + उन्नत = क्रमोन्नत
गर्व + उन्नत = गर्वोन्नत
गर्व + उन्मुक्त = गर्वोन्मुक्त
ज्ञान + उदय = ज्ञानोदय
ग्राम + उत्थान = ग्रामोत्थान
ग्राम + उदय = ग्रामोदय
चंद्र + उदय = चन्द्रोदय
चित्र + उपम = चित्रोपम
चरम + उत्कर्ष = चरमोत्कर्ष
चट्ट + उपाध्याय = चटोपाध्याय
छांदोग्य + उपनिषद = छान्दोग्योपनिषद्
जल + उत्थान = जलोत्थान
जन + उपयोगी = जनोपयोगी
जल + उदार = जलोदर
जन्म + उत्सव = जन्मोत्सव
जीर्ण + उद्धार = जीर्णोद्धार
दर्प + उक्ति = दर्पोक्ति
दलित + उत्थान = दलितोत्थान
दाम + उदर = दामोदर
दीप + उत्सव = दीपोत्सव
दुग्ध + उपजीवी = दिग्धोपजीवी
नर + उत्तम = नतोत्तम
नत + उतर = नतोदर
नव + उन्मेष = नवोन्मेष
नील + उत्पल = नीलोत्पल
पर + उपकार = परोपकार
पद + उन्नति = पदोन्नति
प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
पश्चिम + उत्तर = पश्चिमोत्तर
पूर्व + उत्तर = पूर्वोत्तर
पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
फल + उत्पत्ति = फलोत्पत्ति
फाग + उत्सव = फागोत्सव
बाल + उचित = बालोचित
भाव + उद्दीप्त = भावोद्दीप्त
भाग्य + उदय = भाग्योदय
भाव + उदय = भावोदय
मरण + उपरांत = मरणोपरांत
मन्त्र + उपचार = मंत्रोपचार
मानव + उचित = मानवोचित
मंद + उदारी = मंदोदरी
मुख + उपाध्याय = मुखोपाध्याय
यज्ञ + उपवित = यज्ञोपवीत
यथार्थ + उन्मुख = यथार्थोन्मुख
लोक + उक्ति = लोकोक्ति
लोक + उत्तर = लोकोत्तर
विकास + उन्मुख = विकासोन्मुख
वसंत + उत्सव = वसंतोत्सव
शंख + उदक = शंखोदक
शाक + उपजीवी = शाकोपजीवी
सह + उदर = सहोदर
सर्व + उपरि = सर्वोपरि
स + उदाहरण = सोदाहरण
सर्व + उत्तम = सर्वोत्तम
सांग + उपांग = सांगोपांग
सूर्य + उदय = सूर्योदय (RAS, 1987)
स्व + उपार्जित = स्वोपार्जित
हत + उत्साह = हतोत्साह
हर्ष + उल्लास = हर्षोल्लास
हित + उपदेश = हितोपदेश
हिम + उपल = हिमोपल
नियम: आ + उ = ओ
उदाहरण:
आत्मा + उत्सर्ग = आत्मोत्सर्ग
करुणा + उत्पादक = करुणोत्पादक
गंगा + उदक = गंगोदक
चिंता + उन्मुख = चिंतोन्मुक्त
झंडा + उत्तोलन = झंडोत्रोलन
महा + उदधि = महोदधि
महा + उदय = महोदय (RAS, 1987)
महा + उत्सव = महोत्सव (RAS, 88,94)
यथा + उचित = यथोचित
विद्या + उन्नति = विद्दोन्नति
सेवा + उपरांत = सेवोपरांत
होलिका + उत्सव = होलीकोत्सव
नियम: अ + ऊ = ओ
उदाहरण:
अक्ष + ऊहिनी = अक्षौहिणी (अपवाद)
जल + ऊर्मि = जलोर्मि
जल + ऊष्मा = जलोष्मा
जल + उर्जा = जलोर्जा
प्र + ऊढ़ = प्रौढ़ (अपवाद)
नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा
सूर्य + ऊष्मा = सुर्योष्मा
समुंद्र + ऊर्मि = समुद्रोर्मि
नियम: आ + ऊ = ओ
उदाहरण:
महा + उर्जस्वी = महोर्जस्वी
महा + ऊर्जा = महोर्जा
महा + ऊरू (जंघा) = महोरू
महा + ऊर्ध्व = महोर्ध्व
गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
यमुना + ऊष्मा = यमुनोष्मा
(ग) अ / आ + ऋ = अर्
नियम: अ + ऋ = अर्
उदाहरण:
अधम + ऋण = अधमर्ण (ऋण लेने वाला)
उत्तम + ऋण = उत्तमर्ण (ऋण देने वाला)
अल्प + ऋण = अल्पर्ण
देव + ऋषि = देवर्षि
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि
देव + ऋण = देवर्ण
शीत + ऋतु = शीतर्तु
नियम: आ + ऋ = अर्
उदाहरण:
1. महा + ऋण = महर्ण
2. राजा + ऋण = राजर्ण
3. वर्षा + ऋण = वर्षतु
4. महा + ऋषि = महर्षि
3. वृद्धि स्वर संधि- अ या आ के बाद यदि ए/ऐ या ओ/औ स्वर आते हैं तो दोनों के स्थान पर क्रमशः ‘ऐ’ और ‘औ’ हो जाते हैं। इसे वृद्धि संधि कहते है। जैसे-
(क) अ / आ / + ए / ऐ = ऐ
(ख) अ / आ / + ओ / औ = औ
(क) अ / आ / + ए / ऐ = ऐ
नियम: अ + ए = ऐ
उदाहरण:
मत + एक्य = मतैक्य
एक + एक = एकैक
लोक + एषणा = लोकैषणा
लोक + एषी = लोकैषी
वित्त + एषणा = वितैषणा
भाव + एक्य = भावैक्य
छात्र + एकता = छातैकता
शुभ + एषी = शुभैषी (इच्छुक)
धन + एषी = धनैषी
हित + एषी = हितैषी
नियम: आ + ए = ऐ
उदहारण:
1. सदा + एव = सदैव
2. तथा + एव = तथैव
3. वसुधा + एव = वसुधैव
4. महा + एषणा = महैष्णा
नियम: अ + ऐ = ऐ
उदाहरण:
जन + ऐश्वर्य = जनैश्वर्य
देव + ऐश्वर्य = दवैश्वर्य
धर्म + एक्य = धमैंक्य
धन + ऐश्वर्य = धनैश्वर्य
नव + ऐश्वर्य = नवैश्वर्य
परम + ऐन्द्रजालिक = परमैंद्रजालिक
मत + ऐक्य = मतैक्य
लोक + ऐश्वर्य = लोकैश्वर्य
विश्व + ऐक्य = विश्वैक्य
विचार + ऐक्यऐनक = विचारैक्य
स्व + ऐच्छिक = स्वैच्छिक
नियम: आ + ऐ = ऐ
उदाहरण:
गंगा + ऐश्वर्य = गंगैश्वर्य
टिका + ऐत = टिकैत (RPSC, 2010)
महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
महा + ऐन्द्रजालिक = महैंद्रजालिक (महान जादूगर)
(ख) अ / आ + ओ / औ = ओ
नियम: अ + ओ = औ
उदाहरण:
जल + ओक = जलौघ (जल की अंजलि)
जल + ओध = जलौध (जल का बहाव)
परम + ओस्वी = परमौजस्वी
बिंब + ओष्ठ = बिंबौष्ठ/बिंबोष्ठ (अपवाद)
अधर + ओष्ठ = अधरोष्ठ (अपवाद)
दंत + ओष्ठ्य = दंतोष्ठ्य (अपवाद)
वन + ओकस (निवासी) = वनौकस (अपवाद)
नियम: अ + औ = औ
उदाहरण:
अत्यंत + औदार्य = अत्यंतौदार्य
जल + औषधि = जलौषधि
देव + औदार्य = देवौदार्य
परम + औषध = परमौषध
पूर्व + औपनिवेशिक = पूरौंपनिवेशिक
परम + औत्सुक्य = परमौत्सुक्य
पूर्व + औपचारिक = पूरौंपचारिक
मंत्र + औषधि = मंत्रौषधि
मिलन + औचित्य = मिलनौचित्य
प्र + औधोगिकी = प्रौद्योगिकी
वन + औषध = वनौषध
नियम: आ + ओ = औ
उदहारण:
गंगा + ओक = गंगौक
महा + ओज = महौज
महा + ओजस्वी = माहौजस्वी
नियम: आ + औ =औ
उदाहरण:
महा + औषधि = महौषधि
महा + औदार्य = महौदार्य
मृदा + औषधि = मृदौषधि
4. यण् स्वर संधि- जब ह्रस्व या दीर्घ ‘इ’, ‘उ’ या ‘ऋ’ का मेल अन्य आसमान स्वर से होता है तो ‘इ’, ‘ई’ का ‘य्’, ‘उ’ ‘ऊ’ का ‘व्’ तथा ‘ऋ’ का ‘र्’ हो जाता है। इसे यण् संधि कहते हैं।
यण् संधि के नियम:
‘इ’ या ‘ई’ + ‘इ’ या ‘ई’ के अलावा अन्य कोई स्वर हो तो ‘इ’ ‘ई’ स्थान पर ‘य’ होता है।
‘उ’ य ‘ऊ’ + ‘उ’ या ‘ऊ’ के अलावा अन्य कोई स्वर हो तो ‘उ’ ‘ऊ’ के स्थान पर ‘व’ होता है।
‘ऋ’ + अन्य स्वर हो तो ‘ऋ’ के स्थान पर ‘र’ होता है।
पहचान- य व र से पहले स्वर रहित व्यंजन होता है
(क) इ / ई + असमान स्वर = य् (सामान स्वर नहीं आणि चाहिए)
(ख) उ / ऊ + असमान स्वर = व्
(ग) ऋ + असमान स्वर = र्
- प्रथम पद के अंतिम वर्ण को स्वर रहित कर देते हैं।
- य् / व् / र् पर मात्रा असमान स्वर की लगाते हैं।
नियम: (क) इ / ई + असमान स्वर = य्
(इ + अ = य)
उदहारण:
अति + अधिक = अत्यधिक
अति + अंत = अत्यंत
अति + अल्प = अत्यल्प
अधि (ऊपर) + अयन (गति) = अध्ययन
अभि + अंतर = अभ्यंतर
आदि + अन्त = आद्यंत
अधि + अक्षर = अध्यक्षर
अभि + अर्थी = अभ्यर्थी
अभि + अर्थना = अभ्यर्थना
अधि + अक्ष = अध्यक्ष
इति + आलम = इत्यलम् (अज्ञेय की रचना है)
गति + अवरोध = गत्यवरोध
गति + अनुसार = गत्यनुसार
जाति + अभिमान = जात्यभिमान
रीति + अनुसार = रीत्यनुसार
इति + आलम् = इत्लयम्
त्रि + अंबक (आँख) = त्र्यंबक (शिव)
ध्वनि + अर्थ = ध्वन्यर्थ
द्वि + अर्थी = द्व्यर्थी
नि + अस्त = न्यस्त
परि + अंत = पर्यंत
परि + अंक = अर्यंक
परि + अवसान = पर्यवसान
परि + अवेक्षक = पर्यवेक्षक
परि + अवेक्षण = पर्यवेक्षण
प्रति + अय = प्रत्यय
प्रति + अर्पण = प्रत्यर्पण
प्रति + उपकार = प्रत्यपकार
प्रति + अभिज्ञ = प्रत्यभिज्ञ
मति + अनुसार = मत्यनुसार
बुद्धि + अनुसार = बुद्ध्यनुसार
रीति + अनुसार = रीत्यनुसार
यदि + अपि = यद्दपि
राशि + अंतरण = राश्यंतरण
वि + अस्त = व्यस्त
वि + अवहार = व्यवहार
वि + अर्थ = व्यर्थ
वि + अंजन = व्यंजन
वि + अष्टि = व्यष्टि
वि + अभिचार = व्यभिचार
वि + असन = व्यसन
वि + अय = व्यय
वि + अग्र = व्यग्र
वि + अक्ती = व्यक्ति
वि + उत्पत्ति = व्युत्पत्ति
स्वस्ति + अयन = स्वस्त्ययन
वृद्धि + आदेश = वृद्ध्यादेश
हरि + अंक = हर्यंक (वंश)
नियम: इ + आ = या
उदाहरण:
अग्नि + आशय = अग्नाशय
अति + आचार = अत्याचार
अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
अधि + आदेश = अध्यादेश
अधि + आपक = अध्यापक
अधि + आय = अध्याय
अधि + आत्म = अध्यात्म
अभि + आगत = अभ्यागत
अभि + आस = अभ्यास
अति + आनन्द = अत्यानन्द
अति + आदि = इत्यादि
अधि + आहार = अध्याहार
ध्वनि + आलोक = ध्वन्यालोक
ध्वनि + आत्मक = ध्वन्यात्मक
नि + आय = न्याय
नि + आस = न्यास
प्रति + आशा = प्रत्याशा
प्रति + आभूती = प्रत्याभूति
प्रति + आख्यान = प्रत्याख्यान
प्रति + आवर्तन = प्रत्यावर्तन
प्रति + आरोपण = प्रत्यारोपण
प्रति + आवर्तन = प्रत्यावर्तन
प्रति + आरोपण = प्रत्यारोपण
प्रति + आशित = प्रत्याशित
प्रति + आशी = प्रत्याशी
परि + आप्त = पर्याप्त
परी + आय = पर्याय
परि + आवरण = पर्यावरण
प्राप्ति + आशा = प्राप्त्याशा
वि + आगत = व्यागत
वि + आपक = व्यापक
वि + आघात = व्याघात
वि + आस = व्यास
वि + आधि = व्याधि
वि + आयाम = व्यायाम
वि + आकुल = व्याकुल
वि + आप्त = व्याप्त
वि + आकरण = व्याकरण
वि + आवर्तन = व्यावर्तन
वि + आख्यान = अयाख्यान
शक्ति + आराधना = शक्त्याराधना
नियम: इ + उ = यु
उदाहरण:
अभि + उत्थान = अभ्युत्थान
अभि + उदय = अभ्युदय
अति + उत्तम अतियुत्तम
अति + उष्ण अत्युष्ण
अति + उक्ति = अत्युक्ति
आदि + उपांत आद्युपांत
उपरि + युक्त = उपर्युक्त
नि + उपकार = न्युपकार
प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
प्रति + उत् = प्रत्युत
प्रति + उत्पन्न = प्रत्युत्पन्न
परि + उषण = पर्युष्ण (रसहीन खाना)
वि + उत्पन्न = व्युत्पन्न
वि + उत्पत्ति = व्युत्पत्ति
नियम: इ + ऊ = यू
उदाहरण:
अति + ऊष्ण = अत्यूष्ण
अति + युष्मा = अत्यूष्मा
अति + ऊर्ध्व = अत्युर्ध्व
अधि + ऊढ़ा = अत्युढ़ा
नि + ऊन = न्यून
नि + ऊह = व्यूह
नियम: इ + ए = ये
उदाहरण: प्रति + एक = प्रत्येक
नियम: इ + ऐ = यै
उदाहरण: अति + ऐश्वर्य = अत्यैश्वर्य
नियम: इ + ओ = यो
उदाहरण:
अति + ओज = अत्योज
दधि + ओदन = दध्योधन
नियम: इ + औ = यौ
उदाहरण:
अति + औदार्य (उदारता) = अत्यौदार्य
अति + औचित = अत्यौचित
नियम: ई + अ = य (बड़ी ‘ई’)
उदाहरण:
देवी + अर्पण = देव्यर्पण
देवी + अर्पित = देव्यर्पित
नदी + अर्पण = नद्यर्पण
नदी + अंबु = नद्यंबु
नदी + अर्चना = नद्यर्चना
नियम: ई + आ = या
उदाहरण:
देवी + आगमन = देव्यागमन
नदी + आमुख = नद्यामुख
मही + आधार = मह्याधार
सखी + आगमन = सख्यागमन
स्त्री + उचित = स्त्र्युचित
स्त्री + अधिकार = स्त्र्यधिकार
नियम: ई + उ = यु
उदाहरण:
देवी + उक्ति = देव्युक्ति
देवी + उदय = देव्युदय
नदी + उद्गम = नद्युद्गम
नारी + उद्धार = नार्युद्धार
नारी + उत्थान = नार्युत्थान
नारी + उपकार = नार्युपकार
स्त्री + उचित = स्त्र्युचित
स्त्री + उपयोगी = स्त्र्युपयोगी
सुधी + उपास्य = सुध्युपास्य
नियम: ई + ए = ये
उदाहरण:
सखी + एकता = सख्येकता
नारी + एकता = नार्येकता
नियम: ई + ऐ = यै
उदाहरण:
देवी + ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्ये
सखी + ऐक्य = सख्यैक्य
नारी + ऐक्य = नार्यैक्य
नियम: ई + ऊ = यू
उदाहरण:
नदी + ऊर्जा = नद्यूर्जा
नदी + ऊर्मि = नद्यूर्मि
नियम: ई + ओ = यो
उदाहरण:
नदी + ओक = नद्योक / नद्दोक
नदी + ओघ = नद्योघ / नद्दोघ
नियम: ई + औ = यौ
उदाहरण:
वाणी + औचित्य = वाग्यौचित्य
नारी + औदार्य = नार्यौदार्य
नदी + औदार्य = अद्यौदार्य
(ख) उ / ऊ + असमान स्वर = व्
नियम: उ + अ = व
उदाहरण
अनु + अय = अन्वय
तनु + अंगी = तन्वंगी (RAS-2000)
परमाणु + अस्त्र = परमाण्वस्त्र
भानु + अस्त = भान्वस्त
मनु + अंतर = मन्वंतर
मधु + अरिष्ट = मध्वरिष्ट
शिशु + अंग = शिश्वंग
समनु + अय = समन्वय
सिंधु + अर्चना = सिंध्वर्चना
सु + अल्प = स्वल्प
सु + अच्छ = स्वच्छ
सु + अस्ति = स्वस्ति
नियम: उ + आ = वा
उदाहरण:
गुरु + आदेश = गुर्वादेश
गुरु + आज्ञा = गुर्वाज्ञा
प्रभु + आंगन = प्रभ्वांगन
प्रभु + आदेश = प्रभ्वादेश
प्रभु + अराधना = प्रभ्वाराधना
मधु + आचार्य = मध्वाचार्य
मधु + आलय = मध्वालय
मनु + आख्यान = मन्वाख्यान
लघु + आदि = लघ्वादि
विष्णु + अराधना = विष्णवाराधना
साधु + आचरण = साध्वाचरण
साधु + आचार + साध्वाचार
सु + आस्तिक = स्वास्तिक
सु + आगत = स्वागत
नियम: उ + इ = वि
उदाहरण:
अनु + इति = अन्विति
अनु + इष्ट = अन्विष्ट
अनु + इत = अन्वित
धातु + इक = धात्विक
गुरु + इच्छा = गुर्विच्छा
नियम: ऊ + इ = वि
उदाहरण: वधू + इच्छा = वध्विच्छा
नियम: ऊ + ई = वी
उदहारण:
अनु + ईक्षण = अन्वीक्षण
अनु + ईक्षा = अन्वीक्षा
अनु + ईक्षक = अन्वीक्षक
सु + ईकार = स्वीकार
साधु + ई = साध्वी
नियम: उ + ए = वे
उदाहरण:
अनु + एषण = अन्वेषण (RAS-91,97)
अनु + एषक = अन्वेषक
अनु + एषी = अन्वेषी
अनु + एकता = अन्वेकता
नियम: उ + ऐ = वै
उदाहरण:
प्रभु + ऐषणा = प्रभ्वैष्णा (प्रभु की खोज)
नियम उ + ओ = वो
उदाहरण:
लघु + ओष्ठ = लघ्वोष्ठ
नियम उ + औ = वौ
उदाहरण:
गुरु + औदार्य = गुर्वोदार्य
मनु + औदार्य = मन्वौदार्य
प्रभु + औदार्य = प्रभ्वौदार्य
साधु + औदार्य = साध्वौदार्य
मधु + औचित्य = मध्वौचित
सु + औदार्य = स्वौदार्य
नियम: ऊ + अ = व
उदाहरण:
चमू + अंग = चम्वंग
वधू + अर्थ = वध्वर्थ
नियम: ऊ + आ = वा
उदाहरण:
चमू + आक्रमण = चम्वाक्रमण
चमू + अगम = चम्वागम
वधू + आगमन = वध्वागमन
वधू + आचरण = वाध्वाचरण
भू + आदि = भ्वादि
भू + अर्थ = भ्वर्थ
नियम: ऊ + ऐ = वै
उदाहरण:
वधू + ऐश्वर्य = वध्वैर्श्य
नियम: ऊ + ई = वि
उदाहरण:
वधू + इच्छा = वध्विच्छा
नियम: ऊ + ई = वी
उदाहरण:
वधू + ईकार = वध्वीकार
नियम: ऊ + ए = वे
उदाहरण:
वधू + एकता = वध्वेकता
नियम: ऊ + ओ = वो
उदाहरण:
सरयू + ओदक = सरय्वोदक
सरयू + उदक = सरयूदक
संधि विच्छेद करना:
उ / ऊ
‘व’ को ‘अ’ में बदलना
‘वा’ को ‘आ’ में बदलना
‘वि’ को ‘इ’ में बदलना
‘वी’ को ‘ई’ में बदलना
‘वे’ को ‘ए’ में बदलना
‘वै’ को ‘ऐ’ में बदलना
‘वो’ को ‘ओ’ में बदलना
उदाहरण:
साध्वाचरण = साधू + आचरण
वध्वेकता = वध + एकता
भ्वोज = भू + ओज
(ग) ‘ऋ’ + अलग स्वर आ जाए तो = ‘र्’ में बदल जाएगा
नियम: ऋ + अ = र
उदाहरण:
मातृ + अंश = मात्रंश
पितृ + अनुमति = पित्रनुमति
मातृ + अनुमति = मात्रनुमति
मातृ + अर्पण = मात्रर्पण
नियम: ऋ + आ = रा
उदहारण:
पितृ + आदेश = पित्रादेश
मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
पितृ + आत्मज = पित्रात्माज
मातृ + आनंद = मात्रानंद
पितृ + आलय = पित्रालय
भ्रात्री + आगमन = भ्रात्रागमन
नियम: ऋ + इ = रि
उदाहरण:
मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा
पितृ + इच्छा = पित्रिइच्छा
स्वस्तृ + इच्छा = स्वास्त्रिच्छा
नियम: ऋ + ई = री
उदाहरण:
मातृ + ईक्षण = मात्रीक्षण
मातृ + ईश्वर = मात्रीश्वर
पितृ + ईश्वर = पित्रीश्वर
नियम: ऋ + उ = रु
उदाहरण:
दातृ + उदारता = दात्रुदारता
भ्रातृ + उत्कंठा = भ्रात्रुत्कंठा
श्रोतृ + उत्सुकता = श्रोत्रुत्सकता
मातृ + उपदेश = मात्रुपदेश
पितृ + उऋण = पित्रुऋण
पितृ + उपदेश = पित्रुपदेश
वक्तृ + उद्बोधन = वक्त्रुद्बोधन
नियम: ऋ + ऊ = रू
उदाहरण:
मातृ + उर्जा = मात्रूर्जा
पितृ + उर्जा = पित्रूर्जा
नियम: ऋ + ए = रे
उदहारण:
मातृ + एकता = मात्रेकता
पितृ + एकता = पित्रेकता
नियम: ऋ + ऐ = रै
उदाहरण:
मातृ + ऐक्य = मात्रैक्य
पितृ + ऐक्य = पित्रैक्य
5. अयादि स्वर संधि:
(क) ए + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘ए’ का ‘अय्’ हो जाएगा
(ख) ऐ + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘ऐ’ का ‘आय्’ हो जाएगा
(ग) ओ + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाएगा
(घ) औ + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘औ’ का ‘आव्’ हो जायेगा
नोट- य् / व् पर मात्रा आने वाले स्वर की लगते है।
(क) ए + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘ए’ का ‘अय्’ हो जाएगा
नियम: ए + अ = अय
उदहारण:
ने + अन = नयन
जे + अ = जय
चे + अन = चयन
प्रले + अ = प्रलय
ले + अ = लय
संचे + अ = संचय
विजे + अ = विजय
नियम: ए + इ = यि/अयि
उदाहरण: वीजे + इनी = विजयिनी
नियम: ए + ई = यी
उदाहरण: वीजे + ई = विजयी
कवे + इत्री = कवयित्री
रचे + इता = रचयिता
(ख) ऐ + के बाद कोई भी अलग स्वर आए तो ‘ऐ’ का ‘आय्’ हो जाएगा
उदाहरण: नियम: ऐ + अ = आय
गै + अक = गायक
दै + अक = दायक
नै + अक = नायक
विनै + अक = विनायक
विधै + अक = विधायक
सहै + अक = सहायक
नियम: ए + ई = आय
उदाहरण:
गै + इका = गायिका
दै + इनी + दायिनी
दै + इका दायिका
नै + इक = नायिका
विधै + इका = विधायिका
नियम: ओ + अ = अव
उदाहरण:
पो + अन = पवन
भो + अन = भवन
भो + अति = भवति
हो + अन = हवन
विभो + अ = विभव
श्रो + अन = श्रवण
नियम: ओ + इ + अवि
उदाहरण:
पो + इत्र = पवित्र
को + इ = कवि
भो + इष्य = भविष्य
को + इता = कविता
हो + इष्य = हविष्य (आहुति की सामग्री)
सो + इता = सविता
नियम: ओ + ई = अवी
उदाहरण: गों + ईश = गावीश
नियम: ओ + ए = अवे
उदहारण: गो + एषणा = गवेषणा
नियम: औ + अ = आव
उदाहरण:
पौ + अक = पावक
धौ + अक = धावक
श्रौ + अक = श्रावक
भौ + अक = भावक
शौ +आवक = शावक
नौ + अ = नाव
पौ + अन = पावन
नियम: औ + इ = आवि
उदाहरण:
नौ + इक = नाविक
नौ + इका = नाविका
धौ + इका = धाविका
प्रसौ + इक = प्रसाविका
सौ + इत्री = सावित्री
भौ + इति = भाविती
सौ + इक = साविक
नियम: औ + ई = आवी
उदाहरण: भौ + ई = भावी
नियम: औ + उ = आवु
उदाहरण:
भौ + उक = भौवुक
भौ + अना = भावना
प्रभौ + इत = प्रभावित
अ + आदि = अयादि (दीर्घ संधि)
नोट- परंपरागत रूप से अयादि संधि मान्य है। उपर्युक्त सभी उदाहरणों में संधि है, शब्दों में नहीं। अतः पवन गायक नयन आदि शब्द संधि युक्त शब्द न होकर मूल शब्द के रूप में स्वीकार किये जाते हैं। इसलिए अयादि संधि के नियमों का प्रयोग पवल मूल धातुओं से नए शब्द बनाने में होता है।
जय हिन्द