बिहारी होना कोई गुनाह नहीं है। किसी भी व्यक्ति की पहचान- चाहे वह बिहारी हो, पंजाबी हो, तमिल हो, बंगाली हो या किसी भी राज्य से हो- उसके खिलाफ हिंसा, भेदभाव या अन्याय का कारण कभी नहीं बन सकती है। अगर किसी को केवल उसकी क्षेत्रीय पहचान के कारण निशाना बनाया गया है, तो यह बेहद गंभीर, अमानवीय और निंदनीय है। भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। बिहार ने इस देश को ज्ञान, संस्कृति, राजनीति, श्रम, प्रशासन और प्रतिभा दी है। ऐसे में “बिहारी” शब्द अपमान नहीं, बल्कि परिश्रम, संघर्ष और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।
गीता में लिखा है, सरल व्यक्ति के साथ किया गया छल आपकी बर्बादी के सारे द्वार खोल देता है। चाहे आप कितने भी बड़ी शतरंज के खिलाड़ी क्यों ना हो लेकिन सरल व्यक्ति के साथ किए गए छल के परिणाम आपको भुगतने ही पड़ेंगे।
यदि कोई घटना वास्तव में हुई है, तो उसका निष्पक्ष जाँच होना चाहिए, सत्य सामने आना चाहिए, और दोषी पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। बिना जाँच के निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं, लेकिन यदि भेदभाव के कारण किसी की जान गई है, तो पूरे समाज के लिए शर्म की बात है।
याद रखिए- गुनाह बिहारी होना नहीं, गुनाह है किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण छोटा समझना और गोली मार देन।
जय हिन्द