ओडिशा के कटक शहर स्थित उड़िया बाजार में एक बार प्लेग फैल गया। केवल बापू पाड़ा मोहल्ला इससे बचा हुआ था क्योंकि वहां पढ़े-लिखे लोग रहते थे और वे आसपास की सफाई पर ध्यान देते थे। वहां के कुछ लड़कों ने सफाई अभियान चलाने के लिए एक दल बनाया जिसमें 10 साल के बच्चे से… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : “निष्काम सेवा”
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस : ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’
भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’
सुभाषचंद्र बोस ‘हिंदी भाषा का महत्व’
नेताजी सुभाषचंद्र बोस उन दिनों बर्मा में थे। वे अंग्रेजों के विरुद्ध आजाद हिन्द फ़ौज के सिपाहियों को युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे। बर्मा में व्यवसाय करने वाले भारतीयों ने नेताजी से संपर्क किया। नेताजी के इस काम के लिए उन व्यापारियों ने काफी धन जमा किया ताकि इस राष्ट्रीय कार्य में किसी… Continue reading सुभाषचंद्र बोस ‘हिंदी भाषा का महत्व’
अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान
जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्या’, ‘किसी’ और ‘किसको’ प्रश्नों के उत्तर मिले या यह प्रश्न बनता है, तब वहाँ क्रिया सकर्मक होती है। जैसे- 1. राम पुस्तक पढ़ता है। 2. राधा पत्र लिखती है 3. रामू जूते बना रहा है। 4. एक महिला आलू खरीद रही है। 4. राधा टीवी देख रही है।… Continue reading अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान
पोखरा ठकुराइन का (कविता)
एक दिन पोती ने दादी से पूछा-“दादी, ये बताओ न,सब कुछ ठकुराइन का ही क्यों है?” दादी मुस्कुराईं,झुर्रियों में छिपी कहानियों का पन्ना खोला-“क्यों बेटी, क्या पूछा तूने?” पोती बोली- पोखरा ठकुराइन का,कुआँ ठकुराइन का,तो फिर पानी किसका दादी?जिससे सबकी प्यास बुझे,उसपर भी उनका ही अधिकार है क्या? फुलवारी ठकुराइन की,आम-इमली ठकुराइन की,तो फिर फूलों… Continue reading पोखरा ठकुराइन का (कविता)
अंजान परी एलिशा
मलेशिया का लंकावी समुद्र तट, सांझ की सुनहरी धूप लहरों पर नाच रही थी। हम दोनों कुछ देर सागर में तैरने के बाद तट के किनारे चादर बिछाकर बैठे हुए थे। हवा में सनसनाहट थी और समुद्र के किनारे पेड़ों की सरसराहट मिलकर एक अद्भुत संगीत सुना रही थी। समुद्र की लहरें जैसे अपने ही… Continue reading अंजान परी एलिशा
पुकार गौरैया की (कविता)
प्रकृति की गोद में रहती,नन्ही-सी प्यारी गौरइया।सबेरे गीत सुनाती सबको,जगाती अपने नौनिहालों को। था पेड़ों पर उसका घरौंदा,फूलों से महका था आँगन।मानव ने जब कटवाए पेड़,लूट गया उसका मधुर जीवन। रोकर फिर, बोली गौरइया —“अब घर मैं कहाँ बनाऊँगी?कहाँ मिलेगा ठिकाना मुझको,अपने बच्चे कैसे पालूँगी?” बच्चों ने दी उसको हिम्मत —“मत रो, हम लाएँगे हरियाली।हम… Continue reading पुकार गौरैया की (कविता)
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बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)
बचपन से ही नरेंद्र मेधावी थे। वे जो कुछ भी कहते, उनके साथी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे। एक दिन कक्षा में वे कुछ मित्रों को कहानी सूना रहे थे। उनके सभी साथी सुनने में मुग्ध थे। उन्हें पता ही नहीं चला कि शिक्षक कक्षा में आ गए और पढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी… Continue reading बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)
कौवा और कछुआ (बाल कथा)
एक समय की बात है। एक गाँव में एक बरगद के पेड़ पर एक चतुर कौवा रहता था। पेड़ के पास ही एक तालाब में एक कछुआ भी रहता था। कछुआ बहुत ही आलसी था। कुछ दिनों के बाद कछुआ भी पेड़ के कोटर में आकर रहने लगा। कौवा रोज मेहनत करके अपने लिए खाना… Continue reading कौवा और कछुआ (बाल कथा)