1. ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’ का प्रकाशन कब हुआ था? A.1860 B. 1870 C. 1882 D. 1890 2. ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’ की विधा क्या है? A. आलोचना B. कहानी C. उपन्यास D. आत्मकथा 3. ‘देवरानी-जेठानी की कहानी’ की अंतर्वस्तु में शामिल है? A. बाल विवाह B. विवाह में फिजूल खर्ची C. स्त्रियों की… Continue reading पं. गौरीदत्त : ‘देवरानी जेठानी की कहानी’ उपन्यास – प्रश्नोत्तरी
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा संपादित भ्रमरगीत : प्रश्नोत्तरी
1. गोपियों ने मधुकर शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है? A. भौंरे के लिए B. कृष्ण के लिए C. उद्धव के लिए D. इनमें से कोई नहीं 2. गोपियों की बात सुनकर उद्धव की क्या दशा हो गई? A. प्रसन्न हुए B. दु:खी हुए C. सभी गति नष्ट हो गयी D. रोने लगे… Continue reading आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा संपादित भ्रमरगीत : प्रश्नोत्तरी
कमलेश्वर: ‘राजा निरबंसिया’ (कहानी)भाग-2
उस दिन के बाद बचनसिंह लगभग रोज़ ही आने-जाने लगा। जगपती उसके साथ इधर-उधर घूमता भी रहता। बचनसिंह के साथ वह जब तक रहता, अजीब-सी घुटन उसके दिल को बाँध लेती, और तभी जीवन की तमाम विषमताएँ भी उसकी निगाहों के सामने उभरने लगतीं, आख़िर वह स्वयं एक आदमी है, बेकार...यह माना कि उसके सामने… Continue reading कमलेश्वर: ‘राजा निरबंसिया’ (कहानी)भाग-2
कमलेश्वर: ‘राजा निरबंसिया’ (कहानी) भाग-1
''एक राजा निरबंसिया थे”- माँ कहानी सुनाया करती थीं। उनके आसपास ही चार-पाँच बच्चे अपनी मुठ्ठियों में फूल दबाए कहानी समाप्त होने पर गौरों पर चढ़ाने के लिए उत्सुक-से बैठ जाते थे। आटे का सुंदर-सा चौक पुरा होता, उसी चौक पर मिट्टी की छः ग़ौरें रखी जातीं, जिनमें से ऊपरवाली के बिंदिया और सिंदूर लगता,… Continue reading कमलेश्वर: ‘राजा निरबंसिया’ (कहानी) भाग-1
कबीर के महत्वपूर्ण कथन – प्रश्नोत्तरी
1. “कबीर के निर्गुण पंथ का आधार भारतीय वेदान्त और सूफीयों का प्रेम तत्व है।” यह विचार किसका है? A. आचार्य रामचंद्र शुक्ल B. राहुल सांकृत्यायन C. हजारीप्रसाद द्विवेदी D. गोविंद त्रिगुणायत 2. कबीरा कूता राम का मुतिया मेरा नाऊँ। गले राम की जेबरी जित खैंचे तित जाऊँ।। उपर्युक्त दोहे में किस तरह की… Continue reading कबीर के महत्वपूर्ण कथन – प्रश्नोत्तरी
ज्ञानरंजन: पिता (कहानी)
उसने अपने बिस्तरे का अंदाज़ लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फ़र्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ़ करवट लेकर चुप हो गई। लेट जाने पर उसे एक बड़ी डकार आती मालूम पड़ी, लेकिन उसने डकार ली नहीं। उसे लगा कि… Continue reading ज्ञानरंजन: पिता (कहानी)
कृष्णा सोबती: सिक्का बदल गया (कहानी)
खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुँची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के पर्दे पर लालिमा फैलती जा रही थी। शाहनी ने कपड़े उतारकर एक ओर रखे और ‘श्री…राम, श्री…राम’ करती पानी में हो ली। अंजलि भरकर सूर्य देवता को नमस्कार किया, अपनी उनींदी आँखों पर… Continue reading कृष्णा सोबती: सिक्का बदल गया (कहानी)
भीष्म साहनी चीफ़ की दावत (कहानी)
आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ़ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फ़ुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्ख़ी और पाउडर को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फ़ेहरिस्त हाथ में थामे, एक कमरे… Continue reading भीष्म साहनी चीफ़ की दावत (कहानी)
भीष्म साहनी ‘अमृतसर आ गया है’ (कहानी)
गाड़ी के डिब्बे में बहुत मुसाफिर नहीं थे। मेरे सामनेवाली सीट पर बैठे सरदार जी देर से मुझे लाम के किस्से सुनाते रहे थे। वह लाम के दिनों में बर्मा की लड़ाई में भाग ले चुके थे और बात-बात पर खी-खी करके हँसते और गोरे फौजियों की खिल्ली उड़ाते रहे थे। डिब्बे में तीन पठान… Continue reading भीष्म साहनी ‘अमृतसर आ गया है’ (कहानी)
शेखर जोशी : कोसी का घटवार (कहानी)
अभी खप्पर में एक-चौथाई से भी अधिक गेहूँ शेष था। खप्पर में हाथ डालकर उसने व्यर्थ ही उलटा-पलटा और चक्की के पाटों के वृत्त में फैले हुए आटे को झाड़कर एक ढेर बना दिया। बाहर आते-आते उसने फिर एक बार और खप्पर में झाँककर देखा, जैसे यह जानने के लिए कि इतनी देर में कितनी… Continue reading शेखर जोशी : कोसी का घटवार (कहानी)