Author: इंदु सिंह
रामनरेश त्रिपाठी जीवन परिचय
गर्मी
चढ़ा जेठ तपी धरा चहू दिशा बही गर्म बयार ताल-तलैया सूख रहे भीषण ताप से झूलस रहा है जन-जीवन अब तो करो रहम की दान। जय हिन्द
समय बलवान है
ऐ वक्त और कितना साधेगा चाहे तू जितना भी साध ले लेकिन याद रखना मैं भी जिद्दी हूं हार नही मानूंगी, कहीं किसी मोड़ पर तुझे बदलने के लिए मजबूर कर दूंगी विश्वास मुझे है तू मेरे साथ होगा। जय हिन्द
भारत का संविधान
तुम्हारी हर तकलीफों का, मैं मुक्कमल जबाब हूं। कभी वक्त मिले तो, मुझे पढ़ लेना, मैं भारत का संविधान हूं। हमारे संविधान निर्माता सही में ईमानदार थे।
कहती हूँ मैं (कविता)
कहती हूँ मैं सबसे, मुझे कोई दुःख नहीं रहती हूँ मैं अकेले, मुझे कोई दुःख नहीं दुःख इतना है कि, बस दुःख पी जाती हूँ फिर भी कहती हूँ कि, मुझे कोई दुःख नहीं । मुस्कुराती हूँ तो अधर, जलने लग जाते हैं पश्चाताप करती हूँ तो, दिल बैठ जाते है फिर भी कहती… Continue reading कहती हूँ मैं (कविता)
ध्वज वंदना (रामधारी सिंह ‘दिनकर’)
नमस्कार ! सतहत्तरर्वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर आप सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। स्वतंत्र भारत का यह स्वतंत्रता दिवस हम भारतियों को यह याद दिलाता है कि आजादी एक यात्रा है, मंजिल नहीं। राष्ट्र अपनी उपलब्धियों का जायजा लेता है। अतीत के बलिदानों को याद रखना तथा और भी अधिक उर्जावान होकर… Continue reading ध्वज वंदना (रामधारी सिंह ‘दिनकर’)
भारवि (संस्कृत-रचनाकार)
भारवि कालिदास के ही समकालीन थे। भारवि का कीर्ति का आधार-स्तम्भ उनकी एक मात्र रचना ‘किरातार्जुनीयम’ महाकाव्य है। इसकी कथावस्तु महाभारत से ली गई। इसमें अर्जुन तथा ‘किरात’ वेशधारी ‘शिव’ के बीच युद्ध का वर्णन है। भारवि (मूलनाम- दामोदर) समय- 560 ई. लगभग, रचनाकाल- 580 ई. के लगभग। (छठी शताब्दी का उत्तरार्द्ध या सातवीं शताब्दी… Continue reading भारवि (संस्कृत-रचनाकार)
भवभूति (संस्कृत-रचनाकार)
भवभूति संस्कृत के महान कवि एवं सर्वश्रेष्ठ नाटककार थे। उन्होंने अपने नाटकों में संस्कृत और प्राकृत दोनों भाषाओँ का प्रयोग किया है। राजशेखर ने इन्हें वाल्मिकी का अवतार कहा है। समय- 650 ई. से 750 के बीच माना जाता है। (7वीं शताब्दी का उतरार्द्ध) जन्म स्थान- दक्षिणी भारत का पदमपुर नगर मूलनाम- श्रीकंठ/भट्ट श्रीकंठ… Continue reading भवभूति (संस्कृत-रचनाकार)
महाकवि भास (संस्कृत-महाकवि)
महाकवि भास संस्कृत साहित्य के सुप्रसिद्ध नाटककार थे। संस्कृत नाटककारों में महाकवि भास का नाम सम्मान का विषय रहा है। भास के जीवनकाल के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त नहीं है। महाकवि कालिदास जी को गुप्तकालीन कहा जाता है। कालिदास ने अपने नाटक में पहले के लोकप्रिय नाटककारों का चर्चा करते हुए सबसे पहले महाकवि… Continue reading महाकवि भास (संस्कृत-महाकवि)

