भारत में आजादी के पहले और आजादी के बाद कई महान सपूत हुए जिन्होंने अपने बूते पर समाज को बदलने की कोशिश की, उन्ही सपूतों में से एक थे भारतीय जनता पार्टी के मार्ग दर्शक और नैतिक प्रेरणा के स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी। पंडित जी ने अपने चिंतन और कार्य से केवल भारत माता… Continue reading महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय
Author: इंदु सिंह
मकर संक्रांति
चला भास्कर मकर से मिलने धनु राशि को छोड़।नई वर्ष की नई उमंगे जन-जीवन में जोड़ ।। तील-तील बड़ा होने लगा दिन और रातें तील-तील छोटी।सर्दी की अब हुई बिदाई गर्मी की स्वागत होती ।। गंगा स्नान और दान-पुण्य कर दही चिवड़ा खाते।आसमान में पतंगों का मेला लोग लगाते ।। भारत त्यौहारों का देश है।… Continue reading मकर संक्रांति
रामकृष्ण परमहंस
भारत एक विशाल देश है। इस देश में अनेक भाषा भाषी, संस्कृति तथा जाति के लोग रहते हैं। यहाँ प्रकृति ने प्राणियों के लिए अनेक सुख सुविधाएँ प्रदान की है। हमारे देश की धरती पर अनेक संतों, कवियों, लेखकों, वज्ञानिकों, सैनिकों तथा ऋषि मुनिओं का जन्म हुआ है। कोलकाता शहर में एक संत रामकृष्ण का… Continue reading रामकृष्ण परमहंस
नववर्ष की शुभकामनाएं
नया वर्ष आएगा नई रोशनी लेकर सभी प्राणियों के लिए कई खुशियाँ लेकर । अपने विश्वास की लौ हमेशा जलाये रखना वही रौशनी देगा अंधेरे में दीया बनकर ।। नया वर्ष आजकल राष्ट्रीय पर्व की तरह पूरे विश्व में मनाया जाता है। भारत एक विशाल देश है। हमारे देश में विभिन्न संस्कृतियों, समप्रदायों तथा विभिन्न… Continue reading नववर्ष की शुभकामनाएं
पिता की परिवार में भूमिका
हम सभी हमारे जीवन में हर चीज की परिभाषा लिखते और पढ़ते हैं । ये परिभाषाएँ तथ्य पर आधारित होती हैं लेकिन हमारा भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है, जहाँ कुछ परिभाषाएँ भावनाओं से बनती हैं जैसे- प्यार, लगाव और भावनाओं की परिभाषाएँ आदि । आज ऐसी ही परिभाषा हम लिखने की कोशिश करने जा… Continue reading पिता की परिवार में भूमिका
परिवार का बदलता स्वरूप
साधारण बोल - चाल की भाषा में संस्कार का अर्थ होता है शुद्धिकरण। संस्कार के दो रूप है -आतंरिक रूप और बाहरी रूप। बाहरी रूप का नाम रीति-रिवाज है जो हमारी आतंरिक रूप की रक्षा करता है। आतंरिक रूप हमारी जीवन चर्या में शामिल है जो कुछ नियमों पर आधारित होता है। इन नियमों के पालन में अनुशासन का बहुत महत्व होता है। अनुशासन और सामाजिक नियमों को सम्मान देकर ही मनुष्य आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
आज मुझे राहुल सांस्कृत्यायन की एक पंक्ति याद आ रही है- “भागो नहीं दुनिया को बदलो” ‘ऐ मेरे देश के युवाओं जड़ता तोड़ो आगे आओ, संगठित होकर कदम बढाओ, फिर से मुक्ति मशाल जलाओ । भारत एक विकासशील और विशाल जनसंख्या वाला देश है । संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा जनसंख्या वाला देश… Continue reading राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

