राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

आज मुझे राहुल सांस्कृत्यायन की एक पंक्ति याद आ रही है- “भागो नहीं दुनिया को बदलो” ‘ऐ मेरे देश के युवाओं जड़ता तोड़ो आगे आओ, संगठित होकर कदम बढाओ, फिर से मुक्ति मशाल जलाओ । भारत एक विकासशील और विशाल जनसंख्या वाला देश है । संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा जनसंख्या वाला देश है । राष्ट्र के निर्माण में युवा वर्ग का बहुत महत्व है । ये हमारे देश के आन, बान, शान के साथ-साथ देश का भविष्य भी हैं । राष्ट्र की सुरक्षा के लिए हजारों लाखों व्यक्तियों ने कुर्बानियाँ दी है। राष्ट्र निर्माण के लिए हमारी नई पीढ़ी को तैयार करने का सबसे पहला कर्तव्य परिवार का है, परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला और माँ उनकी प्रथम शिक्षिका होती है । परिवार ही बच्चों को सर्वगुण संपन्न बना सकता है । बच्चा संघर्ष करना पिता से और संस्कार माँ से सीखता है, बाकी सब कुछ उसे दुनिया सीखा देती है । स्वामी विवेकानंद जी ने अपने अमेरिका प्रवास के दौरान कहा था कि किसी भी देश का भविष्य उस देश की युवा शक्ति के ऊपर निर्भर करता है ।

युवा किसे कहते हैं – “जो वायु की गति से तेज चलने वाला हो, जिसकी सोंच सकारात्मक हो, जो हमेशा यह सोंचे की उसे कुछ नया करना है । जिसका जीवन उत्साह से भरा हो और हर सुबह एक नये विचार से दिन का आरम्भ करने वाले को युवा कह सकते हैं। कोई भी देश युवा शक्ति के बिना मजबूत नहीं हो सकता है और न ही आगे बढ़ सकता है । अतः हमारी युवा पीढ़ी ही देश को महाशक्तिशाली बना सकती है । आज हमारे युवा वर्ग में कुछ स्वार्थी तत्व भी हैं जो सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हैं और मुक्य धारा से भटक रहे हैं। ये बात सभी युवाओं के विषय में नहीं कहा जा सकता है । हमारे देश में कर्मठ युवाओं की कमी नहीं है । वे सब आज भी अपने परिवार, समाज, और देश की सिर्फ चिंता ही नहीं करते बल्कि उसके विकाश और समृधि के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं । यहाँ एक प्रश्न ये भी उठता है कि हमारे ‘युवा’ देश के लिए वरदान हैं या चुनौती ? अगर युवाओं का कदम सही दिशा में हो तो वे किसी भी चुनौती का हल बहुत आसानी से निकाल सकते हैं और अगर गलती से भी उनका कदम भटक गया तो शायद इन्हें रोकना बहुत ही मुश्किल हो सकता है । कुछ भ्रमित युवा आजकल मनमानी करने लगे हैं । यह चिंता का विषय है । वे दिशाहीन और अनुशासनहीन हो रहे हैं । आज से कुछ दशक पहले तक युवा वर्ग अपर्याप्त साधन और सुविधाओं के बावजूद भी अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हुए । भारत को आजादी दिलाने में मुख्य भूमिका युवा वर्ग का ही था । भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, चंद्राशेखर आजाद, खुदिराम बोस आदि को कौन नहीं जानता । बहुत से स्वतंत्रता सेनानी और युवा लेखकों ने देश के नाम पर अपने आप को समर्पित कर दिया । विधार्थी के रूप में भी उनका मानना था कि- “सुखार्थिन कुतो विद्या, आ विद्यार्थिन कुतो सुखं” अर्थात सुख विकाश में बाधक है ।

राष्ट्र निर्माण एक ऐसी परिकल्पना है जिसमें राष्ट्र से जुड़े हुए हरेक पहलू का ध्यान रखना अति आवश्यक है । कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति में आकार ही राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है लेकिन ये सच नहीं है । राष्ट्र निर्माण के कई पहलू हैं । देश के विकाश एवं राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा, कृषि, उधोग-धंधे और सैन्य क्षमता सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं । प्रगति के कार्यों में सबको युवाओं का साथ देना होगा, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करना होगा । तभी ‘सबका साथ, सबका विकाश हो’ सकता है ।

आधुनिक भारत के नव युवक सन्यासी ‘स्वामी विवेकानंद’ के जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है । आइए हम सब मिलकर इसे एक यादगार दिन बनाएं । किसी ने सच ही कहा है- ज़िदगी की असली उडान बाकी है, अभी तो कई इम्तिहान बाकी है । नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने, अभी तो सारा आसमान बाकी है ।

                * जय हिन्द ! जय भारत ! *

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