नरेंद्र दामोदरदास मोदी का 76वां जन्मदिन
वडनगर की गलियों में जब,
नन्हे बालक ने आँखें खोलीं,
छोटा-सा घर, सीमित साधन,
पर सपनों की दुनिया बोली।
जीवन-मंत्र बनाया मेहनत को,
पग-पग सीखा आगे बढ़ना,
पिता संग चाय की दुकान पर
सीखा लोगों से मिलना-जुड़ना।
न था अपना राजमहल,
न सुख-सुविधाओं का संसार,
पर मन में कुछ कर गुजरने का
जलता था इक दृढ़ अंगार।
कभी कठिन हुईं राहें,
कभी समय ने ली परीक्षा,
काँटों से होकर चलने वाले
सिखा उसने जीवन-जीना।
घर को त्याग युवावस्था में
छोड़ घर चला, अपनी राह,
सेवा, संगठन, राष्ट्र-चिंतन
पूरी की जीवन की चाह।
धीरे-धीरे बढ़ते कदमों ने
गुजरात की धरती छू ली,
संघर्षों की धूप सहकर भी
आशा की लौ नहीं बुझने दी।
आया जब भी कठिन समय,
तब इतिहास ने प्रश्न किए,
आरोपों और विवादों के बीच
राजनीति ने कई मोड़ लिए।
हुआ विरोध और मिला समर्थन,
आलोचना भी साथ चले उनके,
सार्वजनिक जीवन में यूँ ही
नहीं रुका उनका सफ़र।
पहुँचे जब गुजरात से दिल्ली
फिर लिखी एक नई कहानी,
जनादेश ने सौंप दी उनको
देश-सेवा की जिम्मेदारी।
जब साल दो हजार चौदह आया,
बदला राजनीति का परिदृश्य,
संसद की उस पावन चौखट पर
गूँजा जनादेश का दृश्य।
कभी प्रशंसा, कभी आलोचना,
कभी प्रश्नों की बौछार,
लोकतंत्र में सत्ता के संग
चलता रहता है व्यवहार।
जीवन ने जो राह दिखाई,
थी उसमें उतार-चढ़ाव,
हर पड़ाव ने सिखलाया,
हर मोड़ पर नया भाव ।
आज जन्मदिन के अवसर पर
देता देश शुभकामनाएँ-संदेश
स्वस्थ रहें, दीर्घायु रहे वह,
राष्ट्र कर रहा प्रार्थना विशेष।
देश की धरती, देश की जनता,
लोकतंत्र रहे सदा महान,
कर्तव्य-पथ पर बढ़ते रहें वे,
भारत का रखें ऊँचा मान।
हार्दिक शुभकामनाएँ जन्मदिवस पर
संपूर्ण भारतवासी देते हैं
नव ऊर्जा से भरे जीवन उनका,
बढ़ते रहे नित कर्मपथ पथ की ओर।
जय हिन्द