मैं समय हूँ

मैं समय हूँ।
मेरा जन्म
सृष्टि के प्रथम स्पंदन के साथ हुआ।
मैं बीते हुए युगों में भी था,
आज भी हूँ,
और आने वाले अनंत युगों तक रहूँगा।

मैंने देखा है-
अनंत काल से
पृथ्वी पर आधिपत्य की लड़ाई चलती रही है।

लाखों वर्ष पूर्व
इस धरती पर
डायनासोर जैसे महा बलशाली जीवों का साम्राज्य था,
पर कालचक्र के एक ही झटके ने
उनके अस्तित्व को
इतिहास के जीवाश्मों में बदल दिया।

फिर आया मानव-
ईश्वर की अद्भुत सृष्टि,
जिसने बुद्धि और परिश्रम के बल पर
धरती को अपना घर बनाया।

पर यहीं से आरम्भ हुई
सत्ता, साम्राज्य और वर्चस्व की दौड़।

मैंने देखा-
महान सभ्यताओं का उदय भी,
और उनका पतन भी।

मैंने
मिस्र के पिरामिडों का गौरव देखा,
यूनान की बुद्धि और शक्ति देखी,
रोम की अपराजेय सत्ता देखी,
मुग़ल सल्तनत की बुलंदियाँ देखीं,
और वह ब्रिटिश साम्राज्य भी देखा
जिसके राज्य में कहा जाता था-
“सूर्य कभी अस्त नहीं होता।”

किन्तु समय के आगे
किसी का साम्राज्य अमर नहीं रहा।

मैं इन सब का साक्षी हूँ,
किसी का पक्षधर नहीं।

इतिहास ने सब को बहुत कुछ सिखाया,
किन्तु अधिकांश साम्राज्य
अपनी विजय को स्थायी मान बैठे।

वे भूल गए कि-

जो समय के साथ नहीं बदलते,
समय उन्हें बदल देता है।

आज फिर
समय करवट ले रहा है।

नई तकनीक, नए विचार, नई चुनौतियाँ,
नए अवसर-
सब एक नए युग का आह्वान कर रहे हैं।

यदि सफलता चाहिए,
तो परिवर्तन से भय नहीं,
उसका स्वागत करना होगा।

आने वाले कल की विजय का
बस एक ही मंत्र है

परिवर्तन, परिवर्तन, परिवर्तन।

समय कभी नहीं रुकता,
वह निरंतर आगे बढ़ता है।
प्रश्न यह नहीं कि समय बदलेगा या नहीं,
प्रश्न यह है-
क्या हम समय के साथ बदलेंगे?
क्योंकि
जो समय के साथ नहीं बदलते,
समय उनका इतिहास बदल देता है।

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