आज भी मुझे अपने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई जी का वह भाषाण याद आता है। जब उन्होंने सदन में कहा था- मुझपर आरोप लगाया गया है, और यह आरोप मेरे ह्रदय में घाव कर दिया है। आरोप था- " मुझे सत्ता का लोभ हो गया है"। मैंने पिछले दस दिनों में जो भी… Continue reading भरोसा और विश्वास
सुंदर विचार
वैशाली-वधू
आम्रपाली बौद्ध काल के इतिहास की एक ऐसी स्त्री पात्र थी। जिसे सबसे खूबसूरत महिला होने का सौभाग्य प्राप्त था। अपनी जिस खूबसूरती के कारण आम्रपाली प्रसिद्ध थी, उसी खूबसूरती के कारण आम्रपाली को बहुत अपमान भी सहना पड़ा था। लेकिन अन्त में यही खूबसूरती उसे अध्यात्म के मार्ग पर ले गया। एक समय की… Continue reading वैशाली-वधू
लिविंग रिलेशनशिप
यह मेरी अपनी सोच है। मेरे ख्याल से जिन दो व्यक्तियों को जीवन भर साथ रहना हैं। उसके साथ पहले ही रहकर देख लेने में क्या हर्ज है। कम से कम यह तो पता चल जाएगा कि वे दोनों जीवन भर साथ निभा सकते है या नहीं। बाद में परिवार और समाज आता है। आज… Continue reading लिविंग रिलेशनशिप
हीर रांझा प्रेम (कहानी)
आज के समय में 'लव मैरिज' का बोलबाला है। लव के बाद मैरिज हो रहा है या मैरिज के बाद लव।यह कहना बड़ा मुश्किल है। 'लव' तो उन लोगों ने किया था। जिसका उदाहरण हम आज भी देते हैं। 'लैला ने मजनू' के साथ, 'श्री ने फरहाद' के साथ 'सोनी ने महीवाल' के साथ और… Continue reading हीर रांझा प्रेम (कहानी)
जीने की राह (कविता)
जिन सपनों में जीना चाही वे सपने बिखर गए दिल के अरमान अब, आंसू बन बह गए। राह कौन सी जाऊं? यह सोचकर थक गई। दुनिया की भीड़ देख, जीने की राह मिल गई।
आत्मसम्मान (कविता)
चाहे जो भी हो जाए, आत्मसम्मान न खोने देना। भावना से यह जुड़ा शब्द है, स्वयं को यह सम्मान दिलाता। जागृत जब होता सम्मान, तब आत्मनिर्भरता आ जाता है। बिना आत्मसम्मान के, मानव नहीं बढ़ पाता है। कष्टमयी हो जाता जीना, जब आत्मसम्मान गिर जाता है। हो जब प्राणी कर्त्तव्यपरायण, वह आत्मनिर्भर बन जाता है।… Continue reading आत्मसम्मान (कविता)
जाड़े की भोर
हुई भोर जाड़े की, ओढ़ कोहरे की चादर। रवि ने खोली देर से आंखें, सोई चिरैया देख रवि को, करली अपनी आंखें बंद। ऊषा ने जब ली अंगड़ाई, तब रवि की लाली आई। मंद-मंद सुमन मुस्काई, नभ में खग ने दौड़ लगाई। धरा प्रसन्न होकर नहाई, गीत सभी ने मिलकर गाई।
रात पूनम की
आई पूनम की रात सुहानी, हुआ प्रफुल्लित सम्पूर्ण गगन। चांद से होगा चांदनी का मिलन, हर्षित हुई रात की रानी। स्नेह रस बरखा वसुंधरा पर, गोपियों का इंतजार हुआ खत्म, रास रचाने आए वसुदेव पुत्र, गोपियों का होगा कान्हा से मिलन।
फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट (अनुरोध सखा) कविता
तुमसे है अनुरोध सखा, आया है एक संदेशा सखा। देख अनुरोध आई मुस्कान, मालूम न था हम दोनों मिलेंगे। मिलकर दोनों जुदा हुए थे, पर पता नही था कैसे मिलेंगे? मन में थी आशा फिर भी सखा, पर था यह बहुत कठिन सखा। हो! धन्यवाद आनन ग्रंथ (फेसबुक) का, बिछड़ों को मिला दिया इसने सखा।
आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता
मिडिया पर आई एक नई किताब, कहते हैं जिसे आनन ग्रंथ (फेसबुक)। यह आनन ग्रंथ निराला है, लगता है सबको प्यारा है। लॉग इन करके मित्र बनाते, और बढ़ाते अपनी पहचान। औरों की बात हम सुनते हैं, अपनी बात सुनाते है। सबकी होती सबसे पहचान, साझा करते सब अपनी बात। मित्र बनाते हैं सब मिलजुल,… Continue reading आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता