राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम ततुल्यं, रामनाम वरानने।। इस मंत्र को ‘श्री रामतारक मंत्र’ भी कहा जाता है। इस मंत्र का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के एक हजार नामों के जाप के सामान है। इस मंत्र से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। एक समय भगवान भूतनाथ जी ने अपनी… Continue reading श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र
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नचिकेता
वैदिक युग में नचिकेता नाम का एक तेजस्वी ऋषिबालक था। उस बालक की कथा ‘तैत्रीय ब्राह्मण’, ‘कठोपनिषद्’ तथा ‘महाभारत’ में भी उपलब्ध है। नचिकेता ने बाल्यकाल में ही भौतिक वस्तुओं का परित्याग कर यम से ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। नचिकेता के पिता महर्षि वाजश्रवा ने "विश्वजित्" यज्ञ किया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया था कि इस यज्ञ… Continue reading नचिकेता
वक्त (कविता)
वक्त वक्त की बात है भईया वक्त बड़ा ही है बलवान । वक्त के आगे सब कोई हारा दुर्बल हो या हो पहलवान। वक्त बदलता रहता सबका गरीब हो या हो धनवान । वक्त वक्त पर भारी है अब वक्त बड़ा ही है बलवान।। बदला वक्त जब हरिश्चन्द्र का पहुँचा दिया उनको श्मशान।… Continue reading वक्त (कविता)
लिंग (Gender)
लिंग- संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु के नर या मादा जाती का बोध होता हैं उसे लिंग कहते हैं। जैसे- दादा, दादी, माता, पिता, शेर, शेरनी, लड़का, लड़की आदि। लिंग के तीन प्रकार होते हैं- पुल्लिंग- जिन शब्दों से ‘पुरुष’ या ‘नर’ जाती का बोध होता है उसे पुल्लिंग कहते हैं।… Continue reading लिंग (Gender)
तृण धरि ओट
बात उस समय कि है, जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया था। लंका में माता सीता जी वट वृक्ष के नीचे बैठ गई और चिंतित रहने लगी। रावण वही पर आकर सीता माता को रोज धमकाता और चला जाता था लेकिन सीता माता उसे कुछ भी नहीं बोलती थी। कई बार… Continue reading तृण धरि ओट
रघुकुल का त्याग एवं समर्पण
रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई।। रामायण ‘रघुकुल’ की त्याग एवं समर्पण की कथा है। बात उस समय की है, जब दशरथ पुत्र भरत नंदीग्राम में रहते थे। तब शत्रुघ्न जी भरत के आदेशानुसार राज्य का संचालन कर रहे थे। एक दिन माता कौशल्या अपने महल में सो रही थी,… Continue reading रघुकुल का त्याग एवं समर्पण
गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’
“गुरु वही श्रेष्ठ है जिसकी प्रेरणा से शिष्य का चरित्र बदल जाए” गुरुभक्त आरुणि- पुराने समय में गुरु धौम्य के आश्रम में कई छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आश्रम में रहते थे। कुलीन राजघरानों और ब्राहमणों के पुत्र भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल और आश्रमों में एक साथ रहा करते थे। गुरु… Continue reading गुरु भक्त ‘आरुणि’ और ‘उपमन्यु’
करोना (कविता)
प्रातःकाल का दृश्य देख आज आखों ने मन को समझाया। देख मानव ! दशा तू अपनी पशु-पंछी उन्मुक्त है जानवर पर तू फँसा है, जाल में अपनी तेरी कैसी यह है लाचारी अजब यह मनहूस घड़ी । प्रकृति ने छेड़ी है जंग चारों ओर हाहाकार मची है। घर के बाहर डर ही डर है घर… Continue reading करोना (कविता)
संत रविदास जी की पोथी
आज संत रविदास जी की इस पोथी’ को पढ़ने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे हमारे भारत के संत और महात्मा भविष्य में होने वाली हर घटनाओं से परिचित थे। आज जो हो रहा है उसका वर्णन संत रविदास जी ने अपने इस कविता में पहले ही लिख चुके थे। धन्य थे… Continue reading संत रविदास जी की पोथी
खिलाड़ी अवुमनिया
(महिला खिलाड़ी) "न तो हारना जरुरी है, न तो जितना जरुरी है,जीवन एक खेल है, सिर्फ खेलना जरुरी है।" किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और मजबूत इक्षा शक्ति का होना आवश्यक है। नाम, प्रसिद्धि, धन आदि आसानी से प्राप्त नहीं होता है। सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य,… Continue reading खिलाड़ी अवुमनिया