आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह 15 अगस्त केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के संघर्ष, त्याग, आत्मसम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।
15 अगस्त 1947 को हमारा देश लगभग दो सौ वर्षों की औपनिवेशिक दासता से स्वतंत्र हुआ था। यह स्वतंत्रता हम सबकों उपहार में नहीं मिली है। इसके पीछे असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और बलिदान है।
लेकिन आज हमें स्वयं से एक प्रश्न पूछना चाहिए—
क्या स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति का नाम है? नहीं।
- सच्ची स्वतंत्रता तब होगी
- जब हर व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और न्याय मिलेगा।
- जब देश में जाति, धर्म, लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव समाप्त होगा
- जब कोई बच्चा गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा और
- और सभी बेटियाँ अपने सपनों को पूरा करने से समर्थ होगी।
- हमारा संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जिम्मेदारी भी देता है।
- आज के युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। हमारी जिम्मेदारी केवल अपने भविष्य का निर्माण करना नहीं, बल्कि देश के भविष्य को भी बेहतर बनाना है।
- ईमानदारी से अपना काम करना, संविधान का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, स्त्रियों का सम्मान करना और समाज में भाईचारा बनाए रखना- ये सभी राष्ट्रसेवा के रूप हैं।
आज तिरंगे के सामने हमें केवल यह नहीं पूछना है कि –
“देश ने हमें क्या दिया?”
बल्कि हमें यह पूछना चाहिए-
“हमने अपने देश को क्या दिया?”
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझेंगे और अपने ज्ञान, श्रम तथा ईमानदारी से भारत को और मजबूत बनाएँगे।
और अंत में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन पंक्तियों को स्मरण करना चाहूँगी—
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध;
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।”
आज आवश्यकता तटस्थ रहने की नहीं, बल्कि अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की है।
आइए, हम अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करें, केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सम्मान, समानता और अवसर लेकर आए।
जय हिंद! जय भारत! वंदे मातरम्!
हम लाये हम लाये हैं तूफ़ान से
पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के …
देखो कहीं बरबाद न होवे ये बगीचा-2
इसको हृदय के ख़ून से बापू ने है सींचा-2
रक्खा है ये चिराग शहीदों ने बाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…
दुनिया के दांव पेंच से रखना न वास्ता-2
मंजिल तुम्हारी दूर है लंबा है रास्ता-2
भटका न दे कोई तुम्हें धोके में डाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…
एटम बमों के ज़ोर पे ऐंठी है ये दुनिया-2
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया-2
तुम हर क़दम उठाना जरा देखभाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…
आराम की तुम भूल भुलय्या में न भूलो-2
सपनों के हिंडोलों में मगन हो के न झूलो-2
अब वक़्त आ गया मेरे हंसते हुए फूलो
उठो छलांग मार के आकाश को छू लो
तुम गाड़ दो गगन में तिरंगा उछाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के…
जय हिंद! जय भारत! वंदे मातरम्!