क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम

  ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की

  धरती नाचे घूम-घूम

  सावन की हरियाली में

2. साजन में बगिया महके

  लगी मेहंदी हथेलियों पर

  सावन आया संग सखी

  गाएँ गीत हम बगियन में

3. बादल जब गाए प्रेम राग

  नाचे मोर बगियन में

  सावन में हर पत्ता बोले

  प्रकृति ने भेजा पाती।  

4. कदम के नीचे बैठी थी मैं 

  सावन की पहली फुहार में

  उसने कहा – भीगने दो

  मैं खो गई उनके प्यार में।

5. झूले की रस्सी बुलाई

  तु आजा मेरी बाहों में

  लिखी सावन ने पाती  

नाचों मेरी आँगन में ।

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