मुहावरा मूलत: ‘अरबी’ भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। मोटे तौर पर जिस सुगठित शब्द-समूह से लक्षणाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है उसे मुहावरा कहते हैं। कई बार ये व्यांग्यात्मक भी होते हैं। मुहावरे भाषा को रुचिकर, सुदृढ़ और गतिशील बनाते है। मुहावरों के प्रयोग से भाषा में एक अद्भुत चित्रमयता आती है।
दूसरे शब्दों में, “जो वाक्यांश अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करता है उसे मुहावरा कहते हैं।” इसमें धाराप्रवाहता होने के कारण इसे ‘वाग्धारा’ भी कहा जाता है। ‘मुहावरा’ की सबसे अधिक व्यापक तथा सन्तोषजनक परिभाषा डॉ. ओमप्रकाश गुप्त ने निम्न शब्दों में दी है-
“प्रायः शारीरिक चेष्टाओं, अस्पष्ट ध्वनियों और कहावतों अथवा भाषा के कतिपय विलक्षण प्रयोगों के अनुकरण या आधार पर निर्मित और अभिधेयार्थ से भिन्न कोई विशेष अर्थ देने वाले किसी भाषा के गठे हुए रूढ़ वाक्य, वाक्यांश या शब्द-समूह को मुहावरा कहते हैं।” जैसे-
1. नौ दो ग्यारह हो जाना – भाग जाना
2. अगर-मगर करना – हुज्जत करना
3. अपना उल्लू सीधा करना – अपना मतलब निकालना
4. एक आँख से देखना – समान दृष्टि से देखना
5. कलम तोड़ना – लिखने में कमाल करना उपर्युक्त परिभाषाओं और उदाहरणों से निम्न बातें स्पष्ट होती है-
मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है ‘अभ्यास’ मुहावरा वह वाक्यांश है, जो अपने शाब्दिक अर्थों से भिन्न लोकाभ्यास के रूप में किसी विशिष्ट संदर्भ में रूढ़ होकर प्रयोग किया जाता है।
इसका प्रयोग कभी वाक्य के आरंभ में, कभी बीच में और कभी अंत में किया जाता है। इसके प्रयोग से भाषा-सौष्ठव और अर्थ का प्रभाव बढ़ जाता है।
मुहावरें वाक्यांश होते है। इनका शाब्दिक अर्थ नहीं, अपितु सांकेतिक अर्थ ही ग्रहण किया जाता है।
मुहावरों में प्रयुक्त शब्दों के स्थान पर उनके पर्यायवाची या समानार्थक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। ये अपना अर्थ स्पष्ट करने के लिए वाक्य पर आश्रित होते हैं।
इनका अक्षरश: अनुवाद दूसरी भाषा में नहीं हो सकता है। यहाँ हम कुछ मुहावरे और उसके अर्थ को देखते हैं जो परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं-
| क्र.सं | मुहावरे | अर्थ |
| 1. | अगर-मगर करना | टालमटोल करना बहाना बनाना |
| 2. | अपना उल्लू सीधा करना | अपना मतलब निकालना |
| 3. | अपना-सा मुँह लेकर रह जाना | लज्जित होना |
| 4. | अपनी खिचड़ी अलग पकाना | साथ मिलकर नहीं रहना |
| 5. | अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना | अपनी प्रशंसा स्वयं करना |
| 6. | अपने पाँव पर आप कुल्हाड़ी मारना | अपनी हानि स्वयं करना |
| 7. | अक्ल पर पत्थर पड़ना | बुद्धि से काम न लेना |
| 8. | अंग-अंग ढीला होना | बहुत थक जाना |
| 9. | अंगारे उगलना | क्रोध में कठोर वचन बोलना |
| 10. | अँगूठा दिखाना | समय पड़ने पर मना कर देना |
| 11. | अंग-अंग मुस्काना | अति प्रसन्न होना |
| 12. | अनुनय विनय करना | प्रार्थना करना |
| 13. | अक्ल का दुश्मन | मुर्ख व्यक्ति |
| 14. | अँधेरे घर का उजाला | इकलौता पुत्र |
| 15. | अंधे की लाठी | एकमात्र सहारा |
| 16. | अक्ल चरने जाना | बुद्धिहीनता का काम करना |
| 17. | आँचल पसारना | प्रार्थना करना |
| 18. | आकाश-पातल एक करना | बहुत परिश्रम करना |
| 19. | आसमान पर चढ़ना | बहुत अभिमान करना |
| 20. | आसमान सर पर उठाना | बहुत शोर करना |
| 21. | आड़े हाथों लेना | खरी-खरी सुनाना |
| 22. | आकाश से बातें करना | बहुत ऊँचा होना |
| 23. | अपने से बाहर होना | क्रोध से सुद्ध-बुद्ध खो बैठना |
| 24. | आँसू पोछना | धीरज दिलाना |
| 25. | आँखों में धूल झोकना | धोखा देना |
| 26. | आँखें बिछाना | बहुत आदर-सम्मान करना |
| 27. | आँखें चुरा लेना | अनदेखा कर देना |
| 28. | आँखों से गिरना | सम्मान घटना |
| 29. | आँखों में खटकना | बुरा लगना |
| 30. | आँखें तरसना | किसी को देखने की तीव्र इच्छा होना |
| 31. | आँखें खुलना | होश आना |
| 32. | आँखें दिखाना | क्रोध करना |
| 33. | आँखें चार होना | दोनों का एक दूसरे को देखना |
| 34. | आँखें पथरा जाना | राह देखते बहुत थक जाना |
| 35. | आँखें उठाना | बुरी दृष्टि से देखना |
| 36. | आँखों पर पर्दा पड़ना | धोखा देना |
| 37. | आँखों का तारा होना | बहुत प्यारा होना |
| 38. | आँच नही आने देना | हानि नहीं होने देना |
| 39. | आँखें फेरना | परवाह नहीं करना |
| 40. | आस्तीन का साँप होना | कपटी मित्र होना |
| 41. | आसमान पर थूकना | निर्दोष को लांछन लगाना |
| 42. | आग बबूला होना | बहुत क्रोध करना |
| 43. | आकाश-पातल का अंतर होना | बहुत अधिक अंतर होना |
| 44. | आग में घी डालना | क्रोध को और भड़काना |
| 45. | इधर-उधर की हाँकना | व्यर्थ की गप्पें मारना |
| 46. | ईंट का जबाब पत्थर से देना | दुष्ट की दुष्टता से बढ़-चढ़कर दुष्टता करना |
| 47. | ईद का चाँद होना | बहुत दिनों के बाद दिखाई देना |
| 48. | ईंट से ईंट बजाना | नष्ट करना |
| 49. | उल्लू बनाना | मूर्ख बनाना |
| 50. | उन्नीस-बीस का अंतर होना | बहुत थोडा अंतर होना |
| 51. | उल्टी गंगा बहाना | विपरीत काम करना |
| 52. | उँगली पर नचाना | अच्छी तरह वश में करना |
| 53. | उँगली उठाना | दोष निकालना |
| 54. | उड़ती चिड़िया पहचानना | बहुत अनुभवी होना |
| 55. | ऊँट के मुँह में जीरा | अधिक खाने वाले को कम देना |
| 56. | एक आँख से देखना | सामान दृष्टि से देखना |
| 57. | एक ही लकड़ी से हाँकना | सबसे एक जैसा व्यवहार करना |
| 58. | एड़ी चोटी का जोड़ लगाना | बहुत प्रयत्न करना |
| 59. | एक ही थैले के चट्टे-बट्टे | एक जैसा होना |
| 60. | ओखली में सिर देना | जानबुझकर आपत्ति मोल लेना |
| 61. | कमर बाँधना | तैयार होना |
| 62. | कलम तोड़ना | लिखने में कमाल करना |
| 63. | कठपुतली बनना | दूसरों के इशारे पर चलना |
| 64. | कलेजा मुँह को आना | बहुत दुखी होना |
| 65. | कान पर जूँ न रेंगना | थोड़ा भी असर नहीं पड़ना |
| 66. | कान कतरना | बढ़-चढ़कर काम करना |
| 67. | कान भरना | चुगली करना |
| 68. | काँटे बिछाना | बाधा डालना |
| 69. | कीचड़ उछालना | दूसरों का निरादर करना |
| 70. | कफन बाँधकर चलना | मौत से नहीं डरना |
| 71. | कलेजा ठण्डा होना | संतोष होना |
| 72. | कलई खुलना | भेद सामने आना |
| 73. | कलेजे पर साँप लोटना | ईर्ष्या से जलना |
| 74. | काया पलट होना | बिलकुल बदल जाना |
| 75. | कान काटना | बहुत चलाक होना |
| 76. | काम आना | युद्ध में मरना |
| 77. | कमर कसना | तैयार होना |
| 78. | कोरा जबाब देना | साफ़ इनकार करना |
| 79. | कंचन बरसना | बहुत लाभ होना |
| 80. | खून का प्यासा होना | जान लेने पर उतारू होना |
| 81. | खाक में मिलाना | नष्ट करना |
| 82. | खाक छानना | मारे-मारे फिरना |
| 83. | खरी-खोटी सुनाना | बुरा वचन कहना |
| 84. | खरी-खरी सुनाना | सच्ची-सच्ची कहना |
| 85. | खटाई में पड़ना | कुछ भी निर्णय नहीं होना |
| 86. | खून का घूँट पीकर रह जाना | गुस्सा सहन करना |
| 87. | खून खौलना | जोश में आना |
| 88. | गागर में सागर भरना | थोड़े शब्दों में बहुत कुछ कहना |
| 89. | गड़े मुर्दे उखाड़ना | बीती बातों को ढ़ोना |
| 90. | गरदन पर सवार होना | पीछा नहीं छोड़ना |
| 91. | गिरगिट की तरह रंग बदलना | सिद्धांत हीन होना |
| 92. | गाँठ बाँधना | अच्छी तरह याद रखना |
| 93. | गुदड़ी का लाल | सामान्य स्थान पर बैठा गुणी व्यक्ति |
| 94. | गाल बजाना | डींग हाँकना |
| 95. | गुड़ गोबर होना | बात बिगड़ जाना |
| 96. | घोड़े बेचकर सोना | गहरी नींद में सोना |
| 97. | घुटने टेकना | हार मान लेना |
| 98. | घी के दिए जलाना | ख़ुशी मनाना |
| 99. | घाव हरा होना | भूला हुआ दुःख याद आना |
| 100. | घाट-घाट का पानी पीना | देश-विदेश का व्यापक अनुभव प्राप्त होना |
| 101. | घाव पर नमक छिड़कना | दुखी को और भी दुखी करना |
| 102. | घर में गंगा बहना | सुविधा होना |
| 103. | घर फूँक तमाशा देखना | अपना नाश करके मस्ती में रहना |
| 104. | घड़ों पानी पड़ना | बहुत लज्जित होना |
| 105. | चाँद पर थूकना | निर्दोष पर दोष लगाना |
| 106. | चैन की बंशी बजाना | सुख से रहना |
| 107. | चिकना घड़ा | निर्लज्ज, कहने-सुनने का असर नहीं होना |
| 108. | चेहरे पर हवानियाँ उड़ना | डर जाना |
| 109. | चूड़ियाँ पहनना | कायर बनना |
| 110. | चौकड़ी भुलना | मस्ती भूल जाना |
| 111. | चल बसना | परलोक सिधारना |
| 112. | चिराग लेकर ढूँढ़ना | कठिनाई से मिलना |
| चिराग (दीपक) तले अँधेरा | महत्वपूर्ण स्थान के नीचे अपराध का पनपना | |
| 113. | चादर से बाहर पेर पसारना | आय से अधिक व्यय करना |
| 115. | चार चाँद लगना | प्रतिष्ठा बढ़ना |
| 116. | चुल्लू भर पानी में डूब मरना | बहुत शर्म महसूस करना |
| 117. | छठी का दूध याद दिलाना | भारी संकट में पड़ना |
| 118. | छक्के छुड़ाना | बुरी तरह हराना |
| 119. | छाती पर मूँग दलना | जान-बुझकर दुःख देना |
| 120. | छाती पर साँप लोटना | बहुत ईर्ष्या होना |
| 121. | छाती पर पत्थर रखना | चुपचाप आपत्ति सहन करना |
| 122. | छिपा रुस्तम | देखने में साधारण, वास्तव में गुणी |
| 123. | जमीन पर पैर न रखना | अधिक घमंड होना |
| 124. | जले पर नमक छिड़कना | दुखी को और भी दुखी करना |
| 125. | जहर का घूँट पीना | अपमान सहन करना |
| 126. | जमीन आसमान एक कर देना | प्रयत्न करने में कोई कसर नही छोड़ना |
| 127. | जहर उगलना | ईर्ष्यापूर्ण बातें करना |
| 128. | जान पर खेलना | जोखिम उठाना |
| 127. | जान के लाले पड़ना | विपत्ति में फँसना |
| 129. | जूतियाँ चटकाना | इधर-उधर बेकार की घूमना |
| 130. | झक मारना | व्यर्थ समय बिताना |
| 131. | झंडा गाड़ना | अधिकार जमा लेना |
| 132. | झमेले में पड़ना | झंझट में फसना |
| 133. | झाँसा देना | धोखा देना |
| 134. | टस से मस न होना | तनिक भी प्रभावित न होना |
| 135. | टका-सा जवाब देना | साफ़ इनकार कर देना |
| 136. | टाँग अड़ाना | विघ्न डालना |
| 137. | टेढ़ी खीर | कठिन काम |
| 138. | ठन-ठन गोपाल | बिलकुल कंगाल |
| 139. | ठिकाने लगाना | जलाना या दफनाना |
| 140. | ठोकरें खाना | भूल के कारण कष्ट उठाना |
| 141. | टीका-टिप्पणी करना | आलोचना करना |
| 142. | टुकुर-टुकुर देखना | टकटकी लगाकर देखना |
| 143. | डंका बजाना | प्रभाव होना |
| 144. | डंके की चोट पर कहना | सरे-आम कहना |
| 145. | डींग मारना/ हाँकना | अपनी झूठी प्रशंसा करना |
| 146. | डूब मरना | बहुत लज्जित होना |
| 147. | डूबते को तिनके का सहारा | संकट में फँसे व्यक्ति को सहायता देना |
| 148. | डेढ़ ईंट की मस्जिद बनाना | अलग रहना |
| 149. | ढाक के तीन पात | कभी कोई विशेषता नहीं होना |
| 150. | ढोल पीटना | पत्राचार करना |
| 151. | ढर्रे पर आना | रास्ते पर आना |
| 152. | तलवे चाटना | चापलूसी करना |
| 153. | ताक में रहना | मौका ढूँढ़ना |
| 154. | ताँता बाँधना | लाइन लगाना |
| 155. | तिल का ताड़ बनाना | छोटी बात को बड़ी बनना |
| 156. | तूती बोलना | बहुत प्रभाव होना |
| 157. | तितर-बितर हो जाना | बिखर जाना |
| 158. | तिल रखने की जगह नहीं होना | अधिक भीड़ होना |
| 159. | तीन-पाँच करना | टालमटोल करना |
| 160. | तिलांजलि देना | छोड़ देना |
| 161. | थूककर चाटना | वचन से फिर जाना |
| 162. | थाली का बैंगन | सिद्धांतहीन व्यक्ति |
| 163. | दर-दर भटकना | जगह-जगह घूमना |
| 164. | दम भरना | अभिमान से कहना |
| 165. | दांग रह जाना | आश्चर्य चकित हो जाना |
| 166. | दबे पाँव निकल जाना | चुपचाप चले जाना |
| 167. | दम में दम आना | शांति प्राप्त होना |
| 168. | दम मारने की फुर्सत न होना | जरा भी फुरसत नहीं मिलना |
| 169. | दम घुटना | साँस लेने में कठिनाई होना |
| 170. | दाई से पेट छिपाना | जाननेवाले से भेद छिपाना |
| 171. | डाल नहीं गलना | वश नहीं चलना |
| 172. | दाँत खट्टे करना | नीचा दिखाना/ हराना |
| 173. | दाँतों टेल उँगली दबाना | चकित रह जाना |
| 174. | दाल में काला होना | संदेह करना |
| 175. | दाँत तोड़ना | बुरी तरह पीटना |
| 172. | दाँत काटी रोटी होना | घनिष्ठ मित्रता होना |
| 176. | दाग़ लगाना | कलंक लगाना |
| 177. | दाने-दाने को मोहताज होना | भूखे मरना |
| 178. | दो नाव पर सवार होना | किधर का भी नहीं होना |
| 179. | दिन फिरना | भाग्य पलटना |
| 180. | दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करना | तीव्र गति से उन्नति करना |
| 181. | दो टूक जवाब देना | साफ़-साफ़ जवाब देना |
| 182. | दुम दबाकर भागना | डरकर भाग जाना |
| 183. | दौड़ धूप करना | कठिन परिश्रम करना |
| 184. | दाल-भात में मूसलचंद | व्यर्थ में दखल देनेवाला |
| 185. | दो दिन का मेहमान | मृत्यु निकट होना |
| 181. | दूध का दूध पानी का पानी | ठीक-ठीक न्याय करना |
| 186. | दाल में काला होना | गड़बड़ होना |
| 187. | धज्जियाँ उड़ाना | दोष निकालना/दुर्गति करना |
| 188. | धाक ज़माना | प्रभाव ज़माना/रोब ज़माना |
| 189. | धूप में बाल सफ़ेद न करना | बहुत अनुभवी होना |
| 190. | धरती पर पाँव न पड़ना | अभिमान में रहना |
| 191. | धूल फाँकना | व्यर्थ में भटकना |
| 192. | नमक-मिर्च लगाना | तनिक सी बात को बढ़ाकर कहना |
| 193. | नाक कटना | इज्जत चले जाना |
| 194. | नाक में दम करना | तंग करना/ सताना |
| 195. | नाकों चने चबाना | बहुत तंग होना |
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