‘स्कंदगुप्त’ नाटक प्रश्नोत्तरी

1. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘स्कंदगुप्त’ नाटक का प्रकाशन वर्ष हैं?

A. 1927 ई. B. 1928 ई. C. 1929 ई. D. 1930 ई. 

2. स्कंदगुप्त नाटक में कुल कितने अंक हैं?

A. तीन   B. चार   C. पाँच   D. छह

3. स्कंदगुप्त नाटक में कुल कितने दृश्य हैं?

A. 33   B. 34   C. 35   D. 36

4. स्कंदगुप्त नाटक के प्रथम अंक में कितने दृश्य हैं?

A. छह   B. सात   C. आठ   D. नौ

5. स्कंदगुप्त नाटक में कुल कितने गीत हैं?

A. 13   B. 15   C. 17   D. 19

6. “प्रसाद के नाटकों में स्कंदगुप्त श्रेष्ठ है।” यह किस आलोचक का कथन है?

A. डॉ. रामविलास शर्मा   B. डॉ. गुलाबराय C. डॉ. गोपालराय       D. रामचंद्र शुक्ल

7. स्कंदगुप्त नाटक का कौन सा अंक और उसका स्थान सुमेलित नहीं हैं?

A. प्रथम अंक- उज्जयिनी में गुप्त साम्राज्य का स्कंधावार 

B. द्वितीय अंक- मालवा में शिप्रा तट कुंज

C. तृतीय अंक- शिप्रा तट

D. चतुर्थ अंक- राजपथ

8. स्कंदगुप्त नाटक की नायिका कौन है?

A. अनंतदेवी B. देवकी C. देवसेना D. विजया

9. स्कंदगुप्त की माता का नाम क्या था?

A. देवकी B. अनंतदेवी C. जयमाला D. कमला

10. स्कंदगुप्त नाटक के अनुसार अंतर्वेद का विषयपति कौन था?

A. प्रपंचबुद्धि B. शर्वनाग C. पृथ्वीसेन D. गोविंदगुप्त

11. स्कंदगुप्त नाटक में वर्णित बंधुवर्मा कहाँ का राजा था?

A. मगध B. विक्रमशिला C. मालव D. उत्तरापथ

12. स्कंदगुप्त नाटक के अनुसार भटार्क की माता का नाम क्या था?

A. अनंतदेवी B. जयमाला C. विजया D. कमला

13. “अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. स्कंदगुप्त B. पर्णदत्त C. मुद्गल D. मातृगुप्त

14. “राष्ट्रनीति, दार्शनिकता और कल्पना का लोक नहीं है। इस कठोर प्रत्यक्षवाद की समस्या बड़ी कठिन होती है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

  1. अनंतदेवी B. स्कंदगुप्त C. पर्णदत्त D. चक्रपालित

(C. पर्णदत्त का कथन स्कंदगुप्त से)

15. “कविता करना अनंत पुण्य का फल है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. स्कंदगुप्त B. मातृगुप्त C. मुद्गल D. चक्रपालित

16. “कवित्व वर्णमय चित्र है जो स्वर्गीय भाव-पूर्ण संगीत गाया करता है। अंधकार का अलोक से, असत् का सत् से, जड़ का चेतन से और बाह्य जगत् का अंतर्जगत् से संबंध कौन कराती है? काविता ही न?” स्कंदगुप्त नाटक में मातृगुप्त का यह कथन किससे है?

A. स्कंदगुप्त B. पर्णदत्त C. विजया D. मुद्गल

17. “मनुष्य पशु नहीं है, क्योंकि उसे बातें बनाना आता है, अपनी मूर्खताओं को छिपाना, पापों पर बुद्धि का आवरण चढ़ाना आता है और वाग्जाल की फाँस उसके पास है। अपनी घोर आवश्यकताओं में कृत्रिमता बढ़ाकर, सभ्य और पशु से कुछ ऊँचा द्विपद मनुष्य, पशु बनने से बच जाता है।” स्कंदगुप्त नाटक में यहाँ कथन किसका है?

  1. मातृगुप्त  B. मुद्गल C. स्कंदगुप्त D. देवसेना

(B. मुद्गल का कथन मातृगुप्त से)

18. “यदि यह विश्व इंद्रजाल ही है, तो इस इंद्रजाल की अनंत इच्छा को पूर्ण करने का साधन यह मधुर मोह चिरजीवी हो और अभिलाषा के मनचले वाले भूखे ह्रदय को आहार मिले।” स्कंदगुप्त नाटक में यहाँ कथन किसका है?

A. मातृगुप्त B. कुमारगुप्त C. पुरगुप्त D. मुद्गल

19. “एक दुर्भेद्द नारी ह्रदय में विश्व प्रहेलिका का रहस्यबीज है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. भटार्क  B. मातृगुप्त  C. स्कंदगुप्त D. अनंतदेवी

(A. भटार्क का कथन अनंतदेवी के प्रति)

20. “पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है। दुःख, पुण्य की कसौटी है पाप।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. देवसेना B. विजया C. कमला D. अनंतदेवी

(A. देवसेना का कथन विजया से)

21. “जहाँ हमारी सुंदर कल्पना आदर्श का नीड़ बनाकर विश्राम करती है, वही स्वर्ग है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. स्कंदगुप्त B. चक्रपालित C. विजया D. देवसेना

(D. देवसेना का कथन विजया से)

22. “क्षुद्र हृदय जो चूहे के शब्द से भी शंकित होते हैं, जो अपनी साँस से ही चौंक उठते हैं, उनके लिए उन्नति का कंटकित मार्ग नहीं है। महत्वकांक्षा का दुर्गम स्वर्ग उनके लिए स्वप्न है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

  1. जयमाला B. विजया C. अनंतदेवी D. देवसेना

23. “जीवन-रहस्य के चरम सौंदर्य की नग्न और भयानक वास्तविकता का अनुभव केवल सच्चे वीर ह्रदय को होता है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

  1. विजया B. जयमाला C. कमला D. अनंतदेवी

(B. जयमाला का विजया से)

24. “त्याग का दूसरा नाम महत्व है। प्राणों का मोह त्याग करना वीरता का रहस्य है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. पुरगुप्त B. चक्रपालित C. स्कंदगुप्त  D. मातृगुप्त

(C. स्कंदगुप्त का कथन चक्रपालित से)

25. “यदि राज्यशक्ति के केंद्र में ही अन्याय होगा तब तो समग्र राष्ट्र अन्यायों का क्रीडा-स्थल हो जायेगा। आपको सबके अधिकारों की रक्षा के लिए अपना अधिकार सुरक्षित करना ही पड़ेगा।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. चक्रपालित B. कुमारगुप्त C. शर्वनाग D. पुरगुप्त

(A. चक्रपालित का कथन स्कंदगुप्त से)

26. “मनुष्य ने अपना स्वर विकृत कर रखा है, इसी से तो उसका स्वर विश्ववीणा में शीघ्र नहीं मिलता।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. विजया  B. देवसेना  C. आनंतदेवी  D. जयमाला

(B. देवसेना का कथन विजया से)

27. “किसी कर्म को पाप नहीं कह सकते, वह अपने नग्न रूप में पूर्ण है, पवित्र है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. शर्वनाग B. प्रपंचबुद्धि C. स्कंदगुप्त D. कुमारगुप्त

(B. प्रपंचबुद्धि का कथन शर्वनाग से)

28. “समष्टि में भी व्यष्टि रहता है। व्यक्तियों से ही जाति बनती है। विश्वप्रेम, सर्वभूत-हित कामना परम धर्म है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. जयमाला B. देवसेना C. अनंतदेवी D. विजया  

(A. जयमाला का कथन देवसेना से)

29. “क्षुद्र ममत्व ने हमको दुष्ट भावना की ओर प्रेरित किया है, इसी से हम स्वार्थ का समर्थन करते है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. भीमवर्मा B. बंधुवर्मा C. मातृगुप्त D. शर्वनाग

(B. बंधुवर्मा का कथन जयमाला से)

30. “वीरता उन्माद नहीं है, आँधी नहीं है जो उचित-अनुचित का विचार न करती हो। केवल शस्त्र-बल पर टिकी हुई वीरता बिना पैर की होती है। उसकी दृढ़ भित्ति है- न्याय।”  स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. मुद्गल B. मातृगुप्त C. पुरगुप्त D. गोविंदगुप्त 

(D. गोविंदगुप्त का कथन मुद्गल से)

31. “भारत समग्र विश्व का है और संपूर्ण वसुंधरा इसके प्रेमपाश में आबद्ध है। अनादि काल से ज्ञान की, मानवता की  ज्योति यह विकीर्ण क्र रहा है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. धातुसेन B. प्रख्यातकीर्ति C. शर्वनाग D. स्कंदगुप्त

(A. धतुसेन का कथन प्रख्यातकीर्ति से)

32. “मनुष्य की अदृष्ट-लिपि वैसी ही है, जैसी अग्नि-रेखाओं से कृष्ण मेघ में बिजली की वर्णमाला, एक क्षण में प्रज्वलित, दूसरे क्षण में विलीन होने वाली भविष्यत् का अनुचर तुच्छ मनुष्य केवल अतीत का स्वामी है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. चक्रपालित B. बंधुवर्मा C. शर्वनाग D. भीमवर्मा

33. “जो अपने कर्मों का ईश्वर का कर्म समझकर करता है, वही ईश्वर का अवतार है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

A. विजय B. कमला C. जयमाला D. देवसेना

(B. कमला का कथन स्कंदगुप्त से)

34. “संसृति के वे सुंदरतम क्षण यों ही भूल मत जाना।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. विजया B. देवसेना C. मातृगुप्त D. मुद्गल

(C. मातृगुप्त ने प्रथम अंक के तृतीय दृश्य में)

35. “हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. मातृगुप्त B. देवसेना C. विजया D. जयमाला

    (A. मातृगुप्त ने पंचम अंक के पंचम दृश्य में गाया है)

36. “भरा नैंनों के मन में रूप किसी छलिया का अमल अनूप।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. विजया B. देवसेना C. जयमाला D. मुद्गल

(B. देवसेना ने प्रथम अंक के सप्तम दृश्य में गाया है)

37. “आह वेदना मिली विदाई। मैंने भ्रमवश जीवन संचित मधुकरियों की भीख लुटाई।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. देवसेना B. मातृगुप्त C. मुद्गल D. विजया

(A. देवसेना ने पंचम अंक के षष्ठ दृश्य में गाया है)

38. “उमड़कर चली भिगोने आज तुम्हारा निश्चल अंचल छोर।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. देवसेना B. जयमाला C. विजया D. अनंतदेवी

(C. विजया ने तृतीय अंक के प्रथम दृश्य में गाया है)

39. “अगरु-धूम की श्याम लहरियाँ उलझी हो इन अलकों से।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. मुद्गल B. मातृगुप्त C. देवसेना D. विजया

(D. विजया ने पंचम अंक के द्वितीय दृश्य में गाया है)

40. “माँझी साहस है खे लोगे जर्जर तरी भरी पथिकों से।” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. पहली सखी ने     B. नर्तकियों ने

C. नेपथ्य गान       D. देवसेना

(A. पहली सखी ने तृतीय अंक के चतुर्थ दृश्य में गाया है)

41. “स्कंदगुप्त नाटक में ‘घने प्रेम तरु तले’ शीर्षक गीत किसने गाया है?

A. देवसेना B. विजया C. जयमाला D. अनंतदेवी

(A. देवसेना ने द्वितीय अंक के प्रथम दृश्य में गाया है)

42. स्कंदगुप्त नाटक में ‘शुन्य गगन में खोजता जैसे चंद्र निराश’ शीर्षक गीत किसने गाया है?

A. मातृगुप्त B. मुद्गल C. देवसेना D. विजया

(C. देवसेना ने पंचम अंक के तृतीय दृश्य में गाया है)

43. “हे नाथ हमारे निर्बलों के बल कहाँ हो?” स्कंदगुप्त नाटक में यह गीत किसने गाया है?

A. समूह गान B. नर्तकियों ने C. पहली सखी ने D. नेपथ्य गीत

(A. समूह गान, प्रथम अंक के षष्ठ दृश्य में गाया है)

44. यह संवाद किसका है? “रोने से भीख माँगने से कुछ अधिकार मिलता है? जिसके हाथों में बल नहीं उसका अधिकार ही कैसा?  

A. धातुसेन B. भटार्क C. स्कंदगुप्त D. कुमारगुप्त  

45. यह किसका संवाद है- “कष्ट हृदय की कसौटी है, तपस्या अग्नि है।”

A. शर्वनाग B. मातृगुप्त C. देवकी D. देवसेना

46. किसने किससे कहा- “अहा! यदि आज राजाधिराज कहकर युवराज पुरगुप्त का अभिनंदन कर सकती।”

A. देवसेना ने धातुसेन से B. जयमाला ने प्रहरी 2 से

C. मालिनी ने अनंतदेवी से D. विजया ने भटार्क से

47. “अपने कुकर्मों का फल चखने में कडुआ परंतु परिणाम में मधुर होता है।” यह किसका कथन है?

A. स्कंदगुप्त B. प्रख्यातकीर्ति C. मातृगुप्त D. भटार्क

48. “मेरी समझ से तो मेरे शरीर की धातु मिट्टी है, जो किसी के लोभ की सामग्री नहीं और वास्तव में उसी के लिए सब धातु अस्त्र बनकर चलते हैं, लड़ते हैं, टूटते है, फिर मिट्टी होते हैं।” यह संवाद किस नाटक हैं?

A. चंद्रगुप B. ध्रुवस्वामिनी C. कामना D. स्कंदगुप्त

49. “कष्ट ह्रदय की कसौटी है, तपस्या अग्नि है सम्राट, यदि इतना भी न कर सके तो क्या? सब क्षणिक सुखों का अंत है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसके द्वारा कही गयी पंक्ति है?

A. अनंतदेवी B. मुद्गल C. देवसेना D. विजया

50. ‘स्कंदगुप्त’ नाटक में ‘क्रांति उपस्थित है’ यह चेतावनी किसने दी?

A. अनंतदेवी B. विजया C. पृथ्वीसेन D. स्कंदगुप्त

51. “आवश्यकता ही संसार के व्यवहारों की दलाल है।” स्कंदगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?

  1. देवसेना B. मातृगुप्त C. विजया D. अनंतदेवी

स्कंदगुप्तनाटक के महत्वपूर्ण तथ्य: 

1.‘स्कन्दगुप्त’ नाटक 1928 में प्रकाशित एक ऐतिहासिक नाटक है।

2. स्कंदगुप्त नाटक में गुप्तवंश के सन् 455 से लेकर सन् 466 तक के 11 वर्षों का वर्णन है।

3. इस नाटक में लेखक ने गुप्त कालीन संस्कृति, इतिहास, राजनीति संधर्ष, पारिवारिक कलह एवं षडयंत्रों का वर्णन किया है।

4. यह नाटक देशभक्त, वीर, साहसी, प्रेमी स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाट्यकृति है।

5. स्कंदगुप्त हूणों के आक्रमण (455 ई.) से हूण युद्ध की समाप्ति (466) तक की कहानी है। गुप्त राजवंश का समय   275 ई. से 540 ई. तक रहा।

6. नाटक का आरम्भ स्कंदगुप्त के इस कथन से होता है।

अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है।  

सभी प्रश्नों के उत्तर

1. B. 1928 ई.

2. C. पाँच 

3. A. 33

4. B. सात (प्रथम-7,द्वितीय-7, तृतीय-6, चतुर्थ- 7, पंचम- 6) 

5. C. 17

6. D. रामचंद्र शुक्ल

7. D. चतुर्थ अंक- राजपथ (चतुर्थ अंक का स्थान प्रकोष्ट तथा पंचम अंक स्थान पथ में मुद्गल है)

8. C. देवसेना

9. A. देवकी

10. B. शर्वनाग

11. C. मालव

12. D. कमला

13. A. स्कंदगुप्त

14. C. पर्णदत्त (पर्णदत्त का कथन स्कंदगुप्त से)

15. B. मातृगुप्त

16. D. मुद्गल

17. B. मुद्गल (मुद्गल का कथन मातृगुप्त से)

18. A. मातृगुप्त

19. A. भटार्क  

20. A. देवसेना  

21. D. देवसेना   

22. C. अनंतदेवी

23. B. जयमाला

24. C. स्कंदगुप्त 

25. A. चक्रपालित

26. B. देवसेना 

27. B. प्रपंचबुद्धि

28. A. जयमाला

29. B. बंधुवर्मा

30. D. गोविंदगुप्त 

31. A. धातुसेन

32. A. चक्रपालित  

33. B. कमला

34. C. मातृगुप्त   

35. A. मातृगुप्त

36. B. देवसेना  

37. A. देवसेना

38. C. विजया

39. D. विजया

40. A. पहली सखी ने    

41. A. देवसेना

42. C. देवसेना

43. A. समूह गान

44. B. भटार्क

45. D. देवसेना

46. D. विजया ने भटार्क से

47. D. भटार्क

48. D. स्कंदगुप्त

49. C. देवसेना

50. A. अनंतदेवी

51. C. विजया

जय हिन्द

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.