जन्म- 15 फरवरी, 1922 ई. मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के शाजापुर में हुआ था।
निधन- 22 नवंबर. 2000 ई.
पिता- पंडित बिहारीलाल
मूलनाम- पूर्णशंकर शुक्ल (नई कविता के प्रमुख कवि) नरसिंहगढ़ की राजमाता ने एक काव्य सभा में उनके काव्यपाठ पर प्रसन्न होकर उन्हें ‘नरेश’ की उपाधि दी। कालांतर में इन्होंने यही नाम रख लिया।
‘दूसरा सप्तक’ (1951) में संकलित प्रमुख कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं।
नरेश मेहता के उपनाम- वेद-उपनिषद् और रामायण-महाभारत महाकाव्यों की मिथकीय चेतना का उनके काव्य में प्रवेश हुआ। इसलिए उन्हें ‘वैष्णव परंपरा का कवि’ भी कहा गया है।
नरेश मेहता के प्रमुख काव्य संकलन-
1. वन पाखी सुनो (1957 ई.)
2. बोलने दो चीड़ों को (1961 ई.)
3. मेरा समर्पित एकांत (1962 ई.)
4. उत्सवा (1979 ई.)
5. तुम मेरा मौन हो (1982 ई.)
6. अरण्या (1985 ई.)
7. आखिर समुद्र से तात्पर्य (1988 ई.)
8. चैत्या (1993 ई.)
9. पिछले दिनों नगें पैरो
10. देखना एक दिन
नरेश मेहता के खंडकाव्य:
1. संशय की एक रात- 1962 ई.
2. महाप्रस्थान- 1965 ई.
3. प्रवाद पर्व- 1977 ई.
4. शबरी- 1978 ई.
5. प्रार्थना पुरुष- 1985 ई.
नरेश मेहता के प्रमुख उपन्यास
1. डूबते मस्तूल- 1954 ई.
2. धूमकेतु: एक श्रुति- 1962 ई.
3. यह पाठ बंधू था- 1963 ई.
4. दो एकांत- 1964 ई.
5. नदी यशस्वी है- 1964 ई.
6. प्रथम फाल्गुन- 1968 ई.
7. उत्तर कथा- (प्रथम भाग- 1979)
8. उत्तर कथा- (द्वितीय भाग- 1982)
कहानी संग्रह:
1. तथापि- 1962 ई.
2. एक समर्पित महिला- 1965 ई.
3. जलधर- 1980 ई.
नाटक साहित्य:
1. सुबह के घंटे- 1953 ई.
2. खंडित यात्राएँ- 1965 ई.
एकांकी संग्रह:
1. सनोवर के फूल- 1962 ई.
2. पिछली रात की बरफ- 1962 (रेडियों नाटकों का संग्रह)
आलोचनात्मक रचनाएँ:
1. काव्य का वैष्णव व्यक्तित्व- 1972 ई.
2. मुक्तिबोध: एक अवधूत कवि- 1987 ई.
3. शब्द पुरुष: अज्ञेय- 1988 ई.
4. काव्यात्मकता का दिक्पाल- 1991 ई.
जीवनी: ‘हम अनिकेतन’- 1995 ई. (मेरे लेखन के पचास वर्ष)
यात्रा-वृत्तांत- ‘साधु न चले जमात’- 1991 ई.
अनुवाद- ‘आधी रात कोई दस्तक दे रहा है’- 1978 ई.
संपादन-
1. गाँधी गाथा- (खंडकाव्य)
2. साहित्यकार- (दिल्ली निर्मल वर्मा के साथ)
3. कृति (श्रीकांत वर्मा के साथ)
4. भारतीय श्रमिक
5. वाग्देवी
6. चौथा संसार (इंदौर) दैनिक पत्र
विशेष तथ्य:
1. साल 1882 में हिंदी साहित्य सम्मलेन की ओर से उन्हें ‘मंगला प्रसाद पारितोषिक’ से सम्मानित किया गया।
2. अरण्या पर 1988 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
3. संपूर्ण साहित्य के लिए 1992 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
4. ‘महाप्रस्थान’ के लिए पांडवों के हिमालय में गलने की कथा है।
5. ‘प्रवाद पर्व’ सीता वनवास पर आधारित रचना है।
6. समय देवता एक लंबी कविता है जो ‘मेरा समर्पित एकांत’ में संकलित है। इसमें धरती के विभिन्न भागों की राजनैतिक-सांस्कृतिक स्थितियों का सीनिरियों प्रस्तुत किया गया है।
7. ‘संशय की एक रात’ नाट्य शैली में लिखा गया यह खंडकाव्य है। इसमें राम के मन के इस संशय को चित्रित किया गया है कि एक सीता के लिए इतना बड़ा नरसंहार क्यों? सहयोगी उन्हें समझाते हैं कि यह युद्ध सीता के लिए नहीं अपितु प्रजा के लिए किया जा रहा है, तब वे युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं।
8. ‘प्रर्थना-पुरुष’ महात्मा गाँधी के जीवन चरित्र पर आधारित यह खंडकाव्य है।
9. नरेश मेहता ने इंदौर से प्रकाशित ‘चौथा संसार’ दैनिक पत्र का संपादन भी किया।
काव्य की प्रसिद्ध पंक्तियाँ:
1. अब मैं निर्णय हूँ सबका
अपना नहीं (संशय की एक रात से)
2. सामने वाला यदि आवेश में
पशु हो गया तो
विवेक रहते
प्रतीक्षा करो
उसके पुनः मनुष्य होने की (संशय की एक रात)
3. क्या कोई कभी यह जान पाएगा कि
किन परिस्थितियों, विषमताओं में
जीकर यहाँ तक पहुँचा?
4. पुत्र मेरे ! संशय या शंका नहीं
कर्म ही उत्तर हैं
यश जिसकी छाया है
उस कर्म को करो॥ (प्रवाद पर्व)
5. यह यौवन की भूमि सोवियत
यहाँ मनुष्य की
उसके श्रम की होती पूजा (मेरा समर्पित एकांत)
6. प्रत्येक युद्ध
जिसमें एक-एक राज्य जन्म लेता है
कितनी स्त्रियों को विधवा
और कितने बच्चों को अनाथ कर जाता॥ (महाप्रस्थान)
नरेश मेहता की प्रसिद्ध कविताएँ:
1. चाहता मन (प्रथम कविता)
2. तीर्थजल
3. वनघासे
4. ये हरिण की बदलियाँ
5. बीमार साँझ ले किनारे
6. उषस् (4 भाग में)
7. किरन धेनुएँ
8. वृक्षत्व
9. माँ
10. केवल हिम
11. पीले फुल कनेर के
12. यह सों जूही-सी चचाँदनी
जय हिंद